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...तो इतनी जल्दी गेंदबाजों का पीछा नहीं छोड़ेंगे विराट कोहली

विराट ने कहा ' मैं अंतिम समय तक प्रदर्शन करना चाहता हूं, मेरे अंदर 8 साल या अगर मैं कड़ी ट्रेनिंग करता हूं तो 10 साल का खेल बचा है

Updated On: Sep 09, 2017 05:22 PM IST

FP Staff

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...तो इतनी जल्दी गेंदबाजों का पीछा नहीं छोड़ेंगे विराट कोहली

विराट कोहली के हालिया बयान से यह तो तय हो गया है कि उनके मैदान में उनके आतंक से गेंदबाजो को इतनी जल्दी छुटकारा नहीं मिलने वाला है.एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने बताया कि आने वाले दस साल तक क्रिकेट को अलविदा कहने का उनका कोई इरादा नहीं है.

कोहली ने शुक्रवार को आरपी-एसजी ग्रुप के साथ मिलकर देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए आरपी-एसजी इंडियन स्पोर्ट्स ऑनर अवॉर्ड की शुरुआत की है. उसी कार्यक्रम में बोलते हुए कोहली ने अपनी फिटनेस को लेकर की बातों का खुलासा किया वहीं उन्होंने भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की.

उन्होंने कहा, 'मैं भी यही करने का प्रयास करता हूं. मेरे अंदर प्रदर्शन की भूख कभी खत्म नहीं होती. मैं अंतिम समय तक प्रदर्शन करना चाहता हूं. मेरे अंदर 8 साल या अगर मैं कड़ी ट्रेनिंग करता हूं तो 10 साल का खेल बचा है. मैं रोज नई शुरआत करता हूं और छोटी चीजें भी मेरे लिए काफी मायने रखती हैं.' कोहली ने इस दौरान युवाओं को घर से बाहर निकलकर खेलने की सलाह दी.

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि अब तक उन्होंने जो कुछ भी पाया है, वह क्रिकेट की बदौलत है और वह हरसंभव तरीके से इसमें योगदान देना चाहते हैं. भारतीय कप्तान का मानना है कि आज के युवा मैदान पर समय बिताने के बजाय गैजेट्स में लगे रहते हैं. नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में विराट कोहली ने कहा कि आज के बच्चे आईपैड्स और फोन पर लगे रहते हैं. हमारे दिनों में हम लोग बाहर जाकर मैदान या गलियों में खेलते थे. बचपन के दिनों को याद करते हुए विराट ने कहा, अगर हमारे किसी दोस्त के पास महंगा गेम होता था तो हम प्लान बनाते थे कि एक दिन सब उसके घर खेलने जाएंगे.

इस साल 6 शतक और 7 अर्धशतक की मदद से 1639 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले कोहली ने यहां आरपीएसजी इंडियन स्पोर्ट्स ऑनर्स अवॉर्ड लॉन्च के दौरान कहा, 'लगातार प्रदर्शन में सुधार में कुछ भी छिपी हुई चीज नहीं है. काफी सारे लोगों को तो यह पता भी नहीं है कि हम रोजाना कितनी मेहनत करते हैं. मैंने कभी नहीं देखा कि थकान होने के बावजूद 70 फीसदी ट्रेनिंग करने के बाद कोई खिलाड़ी बीच में ही कह दे कि बस अब मेरा काम पूरा हो गया. हम काम पूरा करने के लिए पूरा जोर लगाते हैं.'

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