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शर्मिंदगी के साए में भी सरे को काउंटी के दरवाजे खोलने को मजबूर किया है विराट ने

2014 इंंग्‍लैंड दौरे पर विराट कोहली ने पांच मैचों में उनके सिर्फ 134 रन बनाए थे और सरे भारतीय बल्‍लेबाजों को गंभीरता ने नहीं लेता

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: May 04, 2018 03:10 PM IST

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शर्मिंदगी के साए में भी सरे को काउंटी के दरवाजे खोलने को मजबूर किया है विराट ने

2014 में भारतीय कप्तान विराट कोहली इंग्लैंड के अपने पहले दौरे पर नॉटिंघम टेस्ट मैच की पहली पारी में नंबर चार पर 32 वें ओवर में बल्लेबाजी करने उतरे थे. जुलाई के मौसम में स्लिप पर फील्डर्स की भीड़ इस एकाएक चर्चा में आए बल्लेबाज के स्वागत के लिए खड़ी थी.

उस पारी की सात बॉल विराट को एशिया से बाहर के बिलकुल अलग तरह के क्रिकेट से रू-ब-रू करवाने के लिए काफी साबित हुई. आठवीं बॉल सेकंड स्लिप पर इयान बेल के हाथ में थी.

विराट की पहली पारी को महज एक रन, 6 मिनट और आठ बॉल पर खत्म करने के बाद स्टुअर्ट ब्रॉड की आंखों में चमक देखते लायक थी. दूसरी पारी में भी विराट आठ रन के स्कोर पर ब्रॉड के सामने एलबीडब्ल्यू हुए.

उस दौरे में पांच टेस्ट मैच की दस पारियों में विराट 6 में दस रन से ऊपर नहीं जा पाए. 13.40 की औसत से पांच मैचों में उनके सिर्फ 134 रन थे. वह दौरा भारतीय क्रिकेट के मौजूदा स्टार के लिए बतौर बल्लेबाज हिला देने वाला था. लेकिन काउंटी टीम सरे से मिला करार साबित करता है कि इन करीब चार सालों में बतौर पेशेवर क्रिकेटर विराट की अब तक की यात्रा में वह दौरा एक बुरे सपने की तरह काफी पीछे छूट गया है.

विराट जून में सरे के लिए मैदान पर होंगे और बाद ही महीने भारतीय टीम का इंग्लैंड का दौरा शुरू होगा. भारत में विराट के काउंटी करार को इंग्लैंड के दौरे की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन ऐसा नहीं है.

सरे के इतिहास में निगाह डाले तो इस टीम ने कभी भारतीय बल्लेबाजों को गंभीरता से नहीं लिया. इस टीम की रुचि हमेशा भारतीय गेंदबाजों, खासकर स्पिनरों में ही रही है.

भारत के टॉप क्रिकेटरों में अनिल कुंबले (2006), जहीर खान ( 2004) हरभजन सिंह (2005-2007), प्रज्ञान ओझा (2011) और मुरली कार्तिक (2012) बतौर ओवरसीज प्लेयर्स सरे के लिए खेल चुके हैं. भारत की बात दूर, सरे ने एशियाई टीमों के बल्लेबाजों को करार देने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई.

साफ है कि विराट को यह करार पिछले चार सालों के दौरान उनकी विपक्षी टीमों के सामने हावी होकर और अपनी शर्तों पर खेलने की काबिलियत के कारण है मिला है और यह उनके क्रिकेट के कैरियर के सबसे बेहतरीन दौर पर मुहर की तरह हैं.

अभी साफ नहीं है कि विराट कौन-कौन से मैच खेलेंगे. लेकिन सरे 9 जून से हैंपशायर के खिलाफ साउथैंप्टन में चार दिन का मैच खेलेगी. उसके बाद 20 जून से समरसेट फिर 25 जून से यॉर्कशायर से मैच होने हैं. वैसे लगता नहीं कि विराट कोई मैच छोड़ेंगे.

सरे से साथ नेट पर उन्हें साउथ अफ्रीकी मोर्ने मोर्कल के सामने बल्लेबाजी करने का मौका भी मिलेगा. विराट के लिए सरे के साथ बिताया समय अपनी बल्लेबाजी को और निखारने में मदद करेगा, क्योंकि इस टीम से पास काउंटी क्रिकेट के सबसे तेज गेंदबाजों में से एक स्टुअर्ट मिकर भी है.

स्टुअर्ट इंग्लैंड के लिए दो टी-20 मैच भी खेल चुके हैं और इनमें उनके दो ही विकेट हैं. ये दोनों विराट कोहली के ही हैं. 2012 के दौरे पर उन्होंने पुणे में विराट को बोल्ड किया था जबकि मुंबई में एलबीडब्ल्यू.

एशिया के नामी बल्लेबाजों में पाकिस्तानी दिग्गज इंतखाब आलम ही 1969 से लेकर 1981 तक इस टीम के लिए खेले. एशियाई बल्लेबाजों में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मोहम्मद युनूस व श्रीलंकाई तिलकरत्ने दिलशान को टीम ने मौका दिया. लेकिन एशियाई बल्लेबाजों की फेहरिस्त लंबी नहीं है. तेज गेंदबाज वकार युनूस और शोएब अख्तर भी सरे को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

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