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यों ही नहीं कोई विराट कोहली बन जाता !

विराट कोहली की ऐसी कई आदतें हैं जो उन्हें खेल के मैदान में जेंटलमैन बनाती हैं

Riya Kasana Riya Kasana Updated On: Nov 21, 2017 10:36 PM IST

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यों ही नहीं कोई विराट कोहली बन जाता !

15 हजार रन, 348 पारियों में 50 शतक, हर फॉर्मेट में 50 से ऊपर का औसत और महज 10 साल का करियर. यह रिकॉर्ड शायद यह बताने के लिए काफी हैं कि क्रिकेट जगत में विराट कोहली का नाम कितना ‘विराट’ हो चुका है. 2008 के अंडर-19 विश्व कप से लेकर अब तक के अपने सफर में विराट ने जो कुछ पाया है उससे आज वह हर उम्र के लोगों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं.

अपनी मेहनत से उन्होंने वह मुकाम पाया है जो बहुत से खिलाड़ियों के लिए केवल सपना ही है. विराट कोहली का नाम यकीनन भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे समर्पित, भावुक और आक्रामक खिलाड़ियों में गिना जाता है. विराट आज सफलता के उच्चतम पायदान पर हैं. विराट ने खेल के हर उस विभाग में खुद को साबित किया है जो कि एक अच्छे स्पोर्टस मैन की पहचान होती है. फिटनेस से लेकर लीडरशिप तक विराट में हर गुण मौजूद है जो उन्हें सर्वश्रेष्ठ बनाता है. खेल को अपना करियर बनाने वाले लोग विराट से बहुत कुछ सीख सकते हैं. कोहली हमेशा से ऐसे नहीं थे.

एक वो वक्त भी था जब विराट एक आम दिल्ली वाले, सैर सपाटा करने वाले मनमौजी इंसान थे. अपने खेल के प्रति उनके प्रेम और उनकी मेहनत से ही वह बन पाए हैं जो वो आज हैं.

क्या सीखें विराट से

विराट की फिटनेस

सबसे पहली चीज जो किसी विराट कोहली की ताकत है वह है उनकी फिटनेस. कोहली की अपनी फिटनेस को लेकर निष्ठा के तो दिग्गज भी कायल हैं. पिछले पांच सालों में कोहली ने अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत की है. 2012 के आईपीएल सीजन के बाद से कोहली ने खुद को पूरी तरह बदल दिया. अपनी खाने की आदतें, वर्कआउट हर तरीके से उन्होंने अपनी जीवन शैली बदल दी. धीरे-धीरे इसका असर उनके खेल में दिखाई देने लगा.

virat gym

हाल ही में एक शो में कोहली ने कहा, ‘पहले अपना पसंदीदा खाना ना खाने की वजह से दुख होता था पर आज खुद पर गर्व होता है.’ पिछले पांच सालों से उन्होंने मैदा से बनी कोई चीज नहीं खाई है. वह कहीं भी हो जिम जाना नहीं छोड़ते. एक खिलाड़ी के लिए उसकी फिटनेस सबसे ज्यादा जरूरी है और उसके प्रति विराट का जुनून देखने लायक है.

दबाव में प्रदर्शन करना

विराट कोहली को चेज का मास्टर कहा जाता है. जब भी भारतीय टीम दबाव में होती है खासकर तब विराट के बल्ले से रन बरसते हैं. वनडे में विराट कोहली चेज करते हुए 4000 से भी रन बना चुके हैं. कप्तान के तौर पर भी विराट कोहली दबाव में टीम को बिखरने नहीं देते, बल्कि लगातार उनका उत्साह बढ़ाते हुए दिखते हैं. अच्छे खिलाड़ी की यही पहचान होती है कि वह दबाव में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके खुद को साबित करे.

Kolkata: Indian skipper Virat Kohli exults as he celebrates his century during the final day of the 1st cricket test match against Sri Lanka at Eden Gardens in Kolkata on Monday. PTI Photo by Ashok Bhaumik (PTI11_20_2017_000062B)

साथी खिलाड़ियों के प्रति सम्मान

विराट कोहली की तुलना हमेशा ही सचिन तेंदुलकर से होती है. उनके हर शतक और हर रिकॉर्ड के साथ ही कोहली को सचिन के समानांतर बिठाने की कोशिश की जाने लगती है. लेकिन खुद कोहली ने इस बात को कभी भी नहीं माना. वह हमेशा ही कहते हैं कि वह उनसे बराबरी के बारे में सोच भी नहीं सकते. कोहली की कप्तानी में आशीष नेहरा, युवराज सिंह, धोनी, हरभजन सिंह जैसे कई सीनियर टीम का हिस्सा रहे हैं, लेकिन कभी भी किसी को कोहली से कोई शिकायत नहीं हुई. कोहली मैच के वक्त मुश्किल समय में आए दिन धोनी की सलाह लेते नजर आते हैं और उन्हें इस बात का श्रेय भी देते हैं. अपने साथी और सीनियर खिलाड़ियों का सम्मान करना आपको खेल का जेंटलमैन बनाता है.

 

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