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क्या वाकई बहुत लंबा होता है अंडर-19 क्रिकेट टीम से सीनियर टीम तक का सफर

यकीनन कम है बाकी खेलों के मुकाबले क्रिकेट में जूनियर से सीनियर टीम तक के सफर का औसत

Updated On: Jan 10, 2018 07:24 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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क्या वाकई बहुत लंबा होता है अंडर-19 क्रिकेट टीम से सीनियर टीम तक का सफर

2008 की बात है. विराट कोहली अंडर 19 टीम के कप्तान थे. टीम ने मलेशिया में वर्ल्ड कप जीता था. जब टीम जीतकर लौटी, तो चार्टर्ड फ्लाइट से टीम को बेंगलुरु लाया गया था. खुली बस में रोड शो हुआ था. कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन ने टीम के लिए एक कार्यक्रम रखा था. उसमें राहुल द्रविड़ भी आए थे. वहां द्रविड़ ने एक छोटा-सा भाषण दिया था. विराट कोहली पर लिखी गई किताब ड्रिवेन – द विराट कोहली स्टोरी में इसका जिक्र है.

राहुल द्रविड़ ने अपने भाषण में कहा था, ‘मुझे उम्मीद है कि आप किसी दिन सीनियर विश्व कप विजय का भी हिस्सा होंगे.’ उन्होंने उसी साल ऑस्ट्रेलिया में हुई सीबी सीरीज का जिक्र किया था और कहा था कि इस सीरीज में साल 2000 में जीती अंडर 19 टीम का एक ही खिलाड़ी था. जिस खिलाड़ी का जिक्र द्रविड़ ने किया, वो युवराज सिंह थे. द्रविड़ ने अपने बारे में भी बताया कि उन्होंने 1991 में अंडर 19 क्रिकेट खेली, उस टीम से वो अकेले थे, जो भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बने.

आखिर द्रविड़ ने ऐसा क्यों कहा? क्या वाकई अंडर-19 टीम से सीनियर टीम का सफर बहुत लंबा होता है. दिलचस्प है कि इस बार द्रविड़ ही अंडर 19 टीम के कोच हैं. ऐसे में देखना जरूरी है कि उनके इस बयान का क्या मतलब था.

MUMBAI, INDIA - APRIL 15: Delhi Daredevils captain Virender Sehwag looks on during the practice section at Wankhede Stadium on April 15, 2012 in Mumbai, India. The Mumbai Indians will play Delhi Daredevils on April 16, 2012. (Photo by Sattish Bate/ Hindustan Times via Getty Images)

1998 में जो टीम गई थी, उसके कप्तान अमित पगनिस थे, जिन्हें बहुत प्रतिभाशाली माना जाता था. हालांकि सीनियर टीम के लिए सबसे ज्यादा खेलने का सौभाग्य वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह को मिला. मोहम्मद कैफ भी कुछ समय खेले. अमित भंडारी और लक्ष्मी रतन शुक्ला वनडे तो खेले, लेकिन टेस्ट तक नहीं पहुंचे. यानी टेस्ट खेलने वालों में तीन खिलाड़ी थे. उसमें भी वीरेंद्र सहवाग और हरभजन ही बड़े खिलाड़ी बन सके.

Cricket - India v England - Second One Day International - Barabati Stadium, Cuttack, India - 19/01/17. India's Yuvraj Singh plays a shot. REUTERS/Adnan Abidi - RTSW7MO

दो साल बाद यानी साल 2000 में भारत चैंपियन बना. इसके कप्तान मोहम्मद कैफ थे. टीम से अजय रात्रा और टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज रहे युवराज सिंह टेस्ट खेले. रात्रा ज्यादा नहीं खेल पाए. युवराज ने नाम कमाया. हालांकि उन्हें टेस्ट से ज्यादा लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट के लिए जाना जाता है. इस टीम में भी वेणुगोपाल राव, विद्युत शिवरामकृष्णन, शलभ श्रीवास्तव जैसे खिलाड़ी थे, जिनसे काफी उम्मीदें की जा रही थीं. वेणुगोपाल राव तो टीम इंडिया का हिस्सा भी रहे. लेकिन टेस्ट स्तर के खिलाड़ी नहीं बन पाए.

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2002 की कप्तानी पार्थिव पटेल के पास थी, जिन्हें युवा सेंसेशन कहा गया. उनका करियर बहुत तेजी से ऊपर उठा. लेकिन ज्यादा लंबा नहीं चला. उन्होंने फिर से पिछले सालों में शानदार प्रदर्शन किया है. लेकिन टेस्ट टीम में जगह हाल-फिलहाल तो मिलती नहीं दिख रही. उस टीम में इरफान पठान भी थे, जिनका करियर रॉकेट की तरह आगे गया. लेकिन वो भी कहीं भटक गए. स्टुअर्ट बिन्नी को लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट के लिए जाना गया. हालांकि सही बात है कि उन्होंने छह टेस्ट खेले. लेकिन बिन्नी कभी उस लीग के खिलाड़ी नहीं समझे गए. यानी इस वर्ल्ड कप तक राहुल द्रविड़ की वो बात सही ही दिखाई दे रही है, जो उन्होंने अंडर 19 से सीनियर टीम के सफर को लेकर कही थी.

PERTH, AUSTRALIA - JANUARY 30: Suresh Raina of India leaves the field after being dismissed by Moeen Ali of England during the One Day International match between England and India at WACA on January 30, 2015 in Perth, Australia. (Photo by Will Russell - CA/Cricket Australia/Getty Images)

2004 जरूर ऐसा वर्ल्ड कप था, जिससे कई खिलाड़ी सीनियर स्तर तक पहुंचे. अंबाति रायडू, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, आरपी सिंह, वीआरवी सिंह और रॉबिन उथप्पा. लेकिन एक बार फिर शिखर धवन और कुछ हद तक सुरेश रैना को छोड़कर टेस्ट स्तर पर इनमें से कोई भी बहुत ज्यादा नहीं खेल पाया. धवन जरूर वर्तमान टीम का हिस्सा हैं. सुरेश रैना ने 18 टेस्ट खेले, लेकिन उन्होंने वनडे और टी 20 में ज्यादा नाम कमाया.

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2006 में रविकांत शुक्ला कप्तान थे. इस टीम से चेतेश्वर पुजारा, पीयूष चावला और रवींद्र जडेजा बड़े स्तर तक पहुंचे. यो महेश जैसे खिलाड़ियों से उम्मीदें थीं, जो पूरी नहीं हो पाईं.

2008 में भारत फिर चैंपियन बना. इस बार विराट कोहली की कप्तानी में. जडेजा इस टीम में भी थे. सिद्धार्थ कौल थे, जिनका नाम पिछले दिनों अचानक सुर्खियों में आया था. अभिनव मुकुंद और मनीष पांडे थे. लेकिन समझा जा सकता है कि विराट और जडेजा के अलावा कोई और उस स्तर तक नहीं पहुंचा, जिसकी बात द्रविड़ कर रहे थे. 2010 में अशोक मेनारिया कप्तान थे. केएल राहुए और जयदेव उनाद्कट के अलावा टीम में कोई और सीनियर स्तर पर कामयाब खिलाड़ी के तौर पर खुद को स्थापित नहीं कर पाया. 2012 का तो कोई भी खिलाड़ी सीनियर स्तर पर नहीं पहुंच पाया. हालांकि उन्मुक्त चंद की कप्तानी वाली टीम चैंपियन बनी थी. उन्मुक्त को लेकर तब काफी चर्चा हुई थी. हालांकि अभी उन्मुक्त रणजी टीम के भी सदस्य नहीं हैं. 2014 की टीम से सिर्फ कुलदीप यादव टेस्ट खेले हैं. पिछली बार यानी 2016 की टीम से भी कोई अभी तक टेस्ट स्तर तक नहीं पहुंचा है.

Cricket - Sri Lanka v India - First Test Match - Galle, Sri Lanka - July 28, 2017 - India's Shikhar Dhawan reacts as he walks off the field after his dismissal by Sri Lanka's Dilruwan Perera (not pictured). REUTERS/Dinuka Liyanawatte - RC1C837E6970

पिछली बार भी राहुल द्रविड़ ही टीम के कोच थे. लेकिन तब उन्हें ज्यादा वक्त नहीं हुआ था. माना यही जाता है कि 18-19 के आसपास की उम्र ऐसी होती है, जहां से भटकने की ज्यादा आशंका होती है. दुनिया में तमाम चमक-दमक दिखाई देती है. इसमें तमाम खिलाड़ी खो जाते हैं. जैसे शिखर धवन खोए थे और उन्हें वापसी में कई साल लगे. क्रिकेट में जूनियर से सीनियर के सफर का औसत बाकी खेलों के मुकाबले यकीनन कम है. अगर हर विश्व कप में 14 या 15 की टीम मानी जाए, तो औसतन हर बार के महज दो ऐसे खिलाड़ी रहे होंगे, जो बड़े स्तर पर खुद को ठीक से स्थापित कर पाए. शायद इस बार हालात बदलें.

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