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संडे स्पेशल: मिलिए क्रिकेट के सबसे बड़े 'लिटिल मास्टर' से

रिवर्स स्वीप के अविष्कार का श्रेय हनीफ़ को ही जाता है.

Rajendra Dhodapkar Updated On: Feb 19, 2017 02:18 PM IST

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संडे स्पेशल: मिलिए क्रिकेट के सबसे बड़े 'लिटिल मास्टर' से

कुछ समय पहले ओपनर्स की बात करते हुए कॉनराड हंट के सिलसिले में हनीफ़ मोहम्मद का जिक्र आया था. नए दौर में लोग ‘लिटिल मास्टर’ सचिन तेंदुलकर को जानते हैं. उसके पहले सुनील गावस्कर को लिटिल मास्टर कहा जाता था. लेकिन सबसे पहले ‘लिटिल मास्टर’ हनीफ मोहम्मद हुआ करते थे.

मैदान में अक्सर उनके साथी खिलाड़ी भी उन्हें मास्टर कह कर बुलाते थे. अक्सर यह होता है कि अगर किसी व्यक्ति से हम प्रभावित होते हैं, तो कल्पना कर लेते हैं कि वह जरूर लंबा, रौबदार व्यक्ति होगा. उसकी उपलब्धियों के कद को हम उसका शारीरिक कद भी मान लेते हैं. हनीफ़ कद में बहुत छोटे थे. जब डॉन ब्रैडमैन से वे पहली बार मिले तो सर डॉन ने उनसे कहा- मैं तो सोच रहा था कि तुम छह फीट दो इंच के लंबे तगड़े आदमी होगे. लेकिन तुम तो कद में मुझसे भी छोटे निकले.

जिसका कद सर डॉन को इतना ऊंचा लग रहा था, जाहिर है वे बहुत ऊंचे पाए के खिलाड़ी रहे होंगे. ‘लिटिल मास्टर’ हनीफ़ ने विश्व क्रिकेट में दो कीर्तिमान बनाए थे. टेस्ट क्रिकेट में समय के हिसाब से सबसे लंबी पारी (970 मिनट) खेलने का कीर्तिमान, जो साठ साल बाद आज तक बना हुआ है. दूसरा कीर्तिमान प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सबसे बड़े स्कोर 499 का, जो इसके पहले सर डॉन ब्रैडमैन के 452 रनों का था.

जब हनीफ़ 1965 में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान की हैसियत से ऑस्ट्रेलिया गए तो सर डॉन उस खिलाड़ी से मिलने विशेष रूप से आए जिसने उनका रिकॉर्ड तोड़ा था. उस दौरे में एकमात्र टेस्ट में हनीफ़ ने 104 और 93 रन तेज़ और हरी पिच पर बनाए. सर डॉन ने उनसे कहा कि वे एक शतक और बनाएं और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में उन्होंने सचमुच शतक बनाया.

जो पारी टेस्ट क्रिकेट में सबसे लंबी पारी थी, उसकी कहानी भी दिलचस्प है. वह वेस्ट इंडीज़ में पाकिस्तान के दौरे का पहला टेस्ट था जो ब्रिजटाउन, बारबेडोस में 17 से 23 जनवरी 1958 में हुआ था. वेस्टइंडीज़ की तरफ से हंट और सर एवर्टन वीक्स ने शतक बनाए और वेस्टइंडीज़ ने 579 रन बनाए. पाकिस्तान की पहली पारी 106 रन पर सिमट गई.

473 रन से पिछड़ने के बाद फॉलोऑन मिलने पर पाकिस्तान ने तीसरे दिन चाय के करीब एक घंटे पहले अपनी दूसरी पारी शुरू की, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह ऐतिहासिक पारी होने वाली है. खेल के करीब साढ़े तीन दिन बचे थे और वेस्ट इंडीज़ की गेंदबाजी बहुत मजबूत थी. अपने दौर के सबसे तेज और सचमुच खूंखार गेंदबाज रॉय ग्रिलक्रिस्ट ने हनीफ का स्वागत ऐसे बाउंसर से किया जो विकेटकीपर के ऊपर से उड़ता हुआ बिना और कोई टप्पा खाए सीमा पार हो गया.

उस शाम हनीफ़ 61 रन पर नाबाद लौटे. पाकिस्तान का एक ही विकेट गिरा था. अगले दिन यानी चौथे दिन हनीफ फिर नाबाद थे. उसके अगले दिन भी वे शाम को नाबाद थे. तब तक वे 270 रन बना चुके थे.  अगले दिन तीन सौ रन पार करने के बाद यह लगने लगा कि वे उस वक्त का सबसे ज्यादा रन का सर लिओनार्ड हटन का रिकॉर्ड (364 रन) पार कर सकते हैं.

यह भी लग रहा था कि पाकिस्तान टेस्ट मैच बचा सकता है. दूसरी उम्मीद तो पूरी हुई लेकिन हटन का रिकॉर्ड तोड़ने के पहले ही हनीफ़ आउट हो चुके थे. हटन का रिकॉर्ड दो टेस्ट बाद उसी सीरीज में एक और नौजवान खिलाड़ी गैरी सोबर्स ने तोड़ा. पाकिस्तान ने दूसरी पारी में 657 रन बनाए और अंत तक वेस्टइंडीज़ ने बिना कोई विकेट खोए 28 रन बनाए.

इस मैराथन पारी के साथ कई क़िस्से जुड़े हुए हैं. सबसे दिलचस्प किस्सा यह है कि कई लोग मैदान के आसपास पेड़ों पर चढ़े हुए मैच देख रहे थे. एक किशोर हनीफ की पारी देखते हुए ऊंघने लगा और पेड़ से सिर के बल नीचे गिरा. बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल पहुँचाया गया. जब दो दिन बाद उसे अस्पताल में होश आया तो पहला सवाल उसने पूछा- क्या हनीफ अब भी खेल रहे हैं? जाहिर है हनीफ की पारी तब भी जारी थी.

Pakistani batsman Inzamam ul Haq (L) receives man of the match award for his 138 runs in the third test against Sri Lanka from former cricketer Hanif Mohammad (R) while commissioner Karachi Shafiq Paracha (C) looks on at national stadium Karachi on 15 March. Pakistan won the third test on Wednesday but Sri Lanka clinched the three match series by 2-1. ZH/WS - RTRT1DT

इंजमाम-उल हक को मैन ऑफ द मैच से नवाजते हनीफ़ मोहम्मद.

ऐसा नहीं कि हनीफ तेज नहीं खेल सकते थे. सुनील गावस्कर की तरह ही उनके पास तमाम शॉट थे. लेकिन वे जानते थे कि टीम का दारोमदार उन्हीं पर है. इसलिए उन्होंने रक्षात्मक खेलने का रास्ता अपनाया हुआ था. यह जानना भी दिलचस्प है कि रिवर्स स्वीप के अविष्कार का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है. हालाँकि खुद हनीफ का कहना था कि रिवर्स स्वीप उनके भाई सादिक़ की ईजाद थी और उन्होंने अपने भाई से इसे सीखा था

हनीफ मोहम्मद का जन्म अविभाजित भारत के जूनागढ़ में हुआ था. विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर बस गया. हनीफ के तीन और भाई- वज़ीर, सादिक़ और मुश्ताक़ नामी टेस्ट खिलाड़ी थे और पांचवें रियाज एक टेस्ट मैच में बारहवें खिलाड़ी रहे.

नए बने देश पाकिस्तान को अपनी पहचान के लिए नायकों की तलाश थी और हनीफ ऐसे ही एक नायक थे. उन्हें यह अहसास था कि उनके देशवासियों के लिए उनकी हैसियत सिर्फ एक खिलाड़ी से ज़्यादा एक राष्ट्रीय गौरव की है. उनकी आत्मकथा का नाम ‘प्लेइंग फ़ॉर पाकिस्तान’ शायद इसी बात को दर्शाता है.

हनीफ स्वभाव से संजीदा और अंतर्मुखी इन्सान थे. बताया जाता है कि इंग्लैंड के दौरे पर वे हर शाम अकेले सितार पर शास्त्रीय संगीत सुनते थे, जिसके कई टेप वे अपने साथ ले गए थे. यह बात उस इन्सान और उसकी बल्लेबाजी की कला को समझने में मददगार हो सकती है.

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