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कैसे आपके बटुए में हाथ डाल कर पैसा निकालेगा आईपीएल का 16 हजार करोड़ का करार!

जिस कंपनी ने इतनी बड़ी रकम देकर प्रसारण अधिकार हासिल किए हैं, वह निर्दयी होकर पैसा वसूलने जा रही है

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Sep 04, 2017 06:28 PM IST

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कैसे आपके बटुए में हाथ डाल कर पैसा निकालेगा आईपीएल का 16 हजार करोड़ का करार!

सोनी टीवी को मात दे कर स्टार इंडिया ने 16 हजार 347 करोड़ रुपए में पांच साल के लिए इंडियन प्रीमियर लीग के प्रसारण और अधिकार कर लिए हैं. स्टार इन पांच सालों में बीसीसीआई को हर साल ढाई हजार करोड़ रुपये से भी अधिक पैसा देगा.

यह रकम दिमाग को घुमा देने वाली है. हर किसी को यह सवाल करना चाहिए कि क्या टीवी प्रसारण का दाम वाकई इतना है या इसे आर्टिफिशल तरीके के बढ़ा दिया गया है.

सवाल यह भी है कि विराट कोहली या रोहित शर्मा को आईपीएल के मैचों में देखने वाले आम जनमानस के लिए इस हैरान कर देने वाली डील के मायने क्या हैं.

जाहिर है कि जिस कंपनी ने इतनी बड़ी रकम देकर प्रसारण अधिकार हासिल किए हैं, वह निर्दयी होकर पैसा वसूलने जा रही है. जिस दस सेकेंड के लिए कंपनियां अपने ब्रांड के विज्ञापन के लिए 4 से सात लाख तक देती थीं, उन्हें इस दोगुनी डील के बाद कितना पैसा देना होगा, कोई भी अंदाजा लगा सकता है. स्टार एक पेड चैनल है. आईपीएल के मैचों को देखने के लिए आम ग्राहक के कितना पैसा देना होगा, स्टार पर ही निर्भर करेगा.

इस गणित को यूं समझते हैं. मान लिया आपने स्टार का स्पोर्ट्स या क्रिकेट चैनल पैकेज में ले रखा है. एक बार आपका सब्सक्रिप्शन खत्म होने के बाद दोबारा उसे रिन्यू करने के लिए मनमर्जी का पैसा मांगने लगे क्योंकि वह स्टार स्पोर्ट्स या स्टार क्रिकेट का दाम बढ़ाना चाहता है तो आपके पास दो ही विकल्प हैं. पैसा दीजिए या फिर आईपीएल भूल जाइए.

यहां सिर्फ आईपीएल मैचों की बात नहीं हो रही. तकनीकी तौर पर अप्रैल और मई में होने वाले इस मैचों के लिए ग्राहक को पूरे साल ज्यादा पैसा देना पड़ सकता है क्योंकि बिना ऐसा किए स्टार के पास करार की वसूली करना असंभव है.

यह तो बात रही स्टार की. क्रिकेट प्रेमियों, खासकर आईपीएल के दीवानों पर दोहरी मार पड़ने की संभावना है.

यह तो तय है कि 16 हजार करोड़ से भी अधिक को करार हासिल करने के बाद सोनी के पास सीधे प्रसारण के दौरान विज्ञापनों के दाम बढ़ाने के सिवा कोई चारा नहीं. यानी हर दस सेकेंड के लिए चार-छह लाख से दाम बढ़ कर 10-15 लाख चला जाता है तो मान लीजिए कि विज्ञापन देने वाली कंपनी का ब्रांड आपको पहले वाली कीमत पर मिलने वाला नहीं हैं.

यहां पर जिक्र करना जरूरी है कि सोनी ने 2008 में यही करार 8200 करोड़ रुपए में लिया था. इस बार यह रकम दोगुनी से ऊपर चली गई है.

एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि ज्यादा पैसा देने के बावजूद क्या आम क्रिकेट प्रेमी को एक विश्वस्तरीय बिना किसी बाधा के प्रसारण देखने को मिलेगा. इस करार की रकम को देखने के बाद लगता नहीं कि ऐसा होने जा रहा है.

14 मई 2012 को टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की नोटिफिकेशन के मुताबिक कोई भी टीवी चैनल सीधे प्रसारण के दौरान एक घंटे में 12 मिनट से ज्यादा का विज्ञापन नहीं दिखा सकता. 12 में से दो मिनट चैनल के अपने और अपने प्रोग्रामों के प्रमोशन के लिए रखे गए हैं. इसकी अनदेखी करना केबल टीवी नेटवर्क रूल्स 1994 का उल्लघंन है.

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इस साल के आईपीएल मैचों में सोनी ने एक घंटे में 20-22 मिनट तक के एड दिखाए थे. कारण, उसने बीसीसीआई से करार ही इतना महंगा खरीदा था कि बिना अतिरिक्त एड दिखाए उसकी भरपाई नहीं हो सकती है.

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि स्टार को हर घंटे कितनी आक्रामकता से अपना पैसा निकालना है.

वैसे सिर्फ सोनी ही नहीं, बल्कि अन्य चैनल भी केबल टीवी नेटवर्क रूल्स 1994 का उल्लघंन कर रहे हैं क्योंकि इसको लेकर मामला हाई कोर्ट में लंबित है. केस कई चैनलों के एक समूह ने डाल रखा है और सरकार  इसे लेकर संजीदा नहीं है. लिहाजा आपके टीवी सीरियल,  फिल्म और क्रिकेट मैच के दौरान विज्ञापनों का खलल बदस्तूर जारी है.

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