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अलविदा 2017: स्पोर्ट्स चैनल्स के लिए उथल पुथल से भरा रहा 2017

इस साल स्टार ने अपना वर्चस्व कायम किया वहीं सोनी को आईपीएल छिन जाने से बड़ा झटका लगा

Updated On: Dec 30, 2017 12:25 PM IST

Neeraj Jha

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अलविदा 2017: स्पोर्ट्स चैनल्स के लिए उथल पुथल से भरा रहा 2017

2017 में टेलीविजन प्रसारण उद्योग में हलचल रही, खासकर स्पोर्ट्स चैनल्स के लिए तो ये साल बहुत ही अहम रहा. ये अधिग्रहण और नए लॉन्च का साल रहा. 2017 के दूसरे छमाही में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में देखा जाएगा. सितंबर में दो घटनाओं ने देश के खेल चैनलों का खेल ही बदल दिया. सबसे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने प्रसार भारती को महत्वपूर्ण स्पोर्ट्स इवेंट की केबल टीवी और डीटीएच कंपनियों को लाइव फ़ीड देने पर रोक लगा दी.

इसका मतलब की सैटेलाइट के द्वारा डीडी मैच का प्रसारण नहीं कर पाएगा. उनके पास सिर्फ टेरेस्ट्रियल अधिकार ही होगा. यानी इसका सीधा फायदा स्टार स्पोर्ट्स को मिलेगा, जिनका अब सैटेलाइट और डीटीएच पर एक छत्र राज होगा. इसके अलावा दूसरी सबसे बड़ी खबर जिसने स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया वह थी रूपर्ट मर्डोक के स्टार इंडिया को इंडियन प्रीमियर लीग का अधिकार मिलना.

आईपीएल पर स्टार का कब्जा

इस साल टीवी प्रसारण उद्योग की सबसे बड़ी खबर रही स्टार को आईपीएल प्रसारण अधिकार मिलना. स्पोर्ट्स टीवी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्रीमियर लीग सोनी के हाथों से छीन गई  जिनपर उनका कब्जा पिछले 10 सालों से था. स्टार स्पोर्ट्स को इसे हासिल करने के लिए करीब 16,348 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े. इस से स्टार इंडिया का प्रभुत्व बाज़ार में और बढ़ जाएगा और ये कहना गलत नहीं होगा की आने वाले दिनों में बाजार पर उनका एकाधिकार हो जाएगा. हालांकि इतने बड़े निवेश से स्टार के लिए फायदा कमाना इतना आसान नहीं होगा.

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सोनी, सेट मैक्स को बड़ा झटका

सोनी चैनल को शायद पहले से इस बात का आभास था की शायद उनको आईपीएल ना मिले और यही वजह था की उन्होंने टेन स्पोर्ट्स नेटवर्क को आईपीएल बिडिंग से कुछ दिन पहले ही खरीद लिया था. अपने स्पोर्ट्स क्लस्टर में 10 चैनलों और आईपीएल को स्टार इंडिया के पास जाने के नुकसान के साथ, सोनी स्पोर्ट्स को अपने खेल प्रोग्रामिंग को पूरी तरह से दोबारा बनाना होगा. हालांकि, 2018 में भारत क्रिकेट अधिकारों की भी बिडिंग प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, और सोनी इसे हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा. लेकिन मार्केट लीडर स्टार इंडिया से इसे छीनना इतना आसान नहीं होगा.

बड़ा हो रहा है स्टार इंडिया का वर्चस्व

याद रहे कि आईसीसी और भारत में क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अधिकार पहले से ही स्टार के पास है. आईपीएल के आने से एक बहुत बड़ा दर्शक वर्ग पूर्ण रूप से स्टार के साथ जुड़ जाएगा. और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब तो स्थानीय केबल चैनलों के दर्शक ही नहीं बल्कि दूरदर्शन पर मैच देखने वाले लोग भी स्टार के झोली में चले जाएंगे. क्रिकेट के अलावा, स्टार के पास अन्य खेलों में भी बढ़त है. उनके पास फुटबॉल की आईअसएल, प्रो-कबड्डी लीग, विंबलडन, फ्रेंच ओपन और फॉर्मूला वन के अधिकार हैं, जो सोनी के अन्य कार्यक्रमों की तुलना में अधिक दर्शकों की संख्या को स्टार से जोड़ती है.

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उधर सोनी के पास फीफा वर्ल्ड कप, प्रीमियर फुटसाल लीग, वर्ल्ड कबड्डी लीग, एनबीए और द इंडियन ओपन ग्रांप्री गोल्ड है जिसको देखनेवालों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं है. सोनी को अगर बाजार में अपनी लोकप्रियता वापस हासिल करनी है तो उसे दर्शकों को जोड़ने के लिए कोई न कोई बड़ा दांव खेलना ही होगा.

डी स्पोर्ट्स का आगमन

अगर आपको याद होगा कि एक जमाने में नियो स्पोर्ट्स नाम का एक चैनल हुआ करता था, जिस पर क्रिकेट का प्रसारण होता था. एक लम्बे विवाद के बाद ये अधिकार स्टार को मिला और उसके बाद नियो बिलकुल ही खत्म सा हो गया और इस चैनल के पास दर्शकों को खींचने के लिए कुछ था भी नहीं. रिंग में सिर्फ स्टार और सोनी ही थे की इस साल एक और प्लेयर का रिंग में आगमन हुआ, डी स्पोर्ट्स. इस चैनल के पीछे डिस्कवरी का भी करीब 30 प्रतिशत का निवेश है. लेकिन अभी तक इस चैनल के पास कोई स्पोर्ट्स का बड़ा इवेंट नहीं है और बहुत से खेल प्रेमियों को इस चैनल के बारे में पता भी नहीं है.

डिजनी कंपनी का स्टार पर कब्जा

दिसंबर में, मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक ने वॉल्ट डिजनी कंपनी के साथ सभी मीडिया सौदों की घोषणा कर दी. डिजनी ने टवेंटी सेंचुरी फॉक्स इंक के शेयरों के स्टॉक 52.4 अरब डॉलर में खरीद लिए. इस सौदे का भारतीय बाज़ार पर दूरगामी प्रभाव होने वाला है. आने वाले दिनों में स्टार का डिजनी साम्राज्य के साथ विलय होगा. सौदे का मतलब है कि इन चैनलों के साथ ही कंपनी के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म हॉटस्टार को भी डिजनी अपने कब्जे में ले लेगी. इसके अलावा डिजनी, डीटीएच प्लेटफार्म टाटा स्काई में स्टार की हिस्सेदारी अर्जित करेगी. हालांकि इस समझौता को पूरा करने में 12-18 महीने लग सकते हैं. लेकिन ये बात तो तय है की यह डील डिजनी को भारत का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर बना देगा.

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