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गांगुली का फैसला, सचिन का सुझाव : एक फ्लॉप और दूसरा....

गांगुली चाहते थे कि न्यूट्रल वेन्यू पर हो रणजी, सचिन चाहते हैं दो पिच पर हो एक मैच

Updated On: Dec 06, 2016 07:30 AM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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गांगुली का फैसला, सचिन का सुझाव : एक फ्लॉप और दूसरा....

पिछले कुछ महीनों में घरेलू क्रिकेट को लेकर दो बातें हुई हैं. एक फैसला हुआ और दूसरा सुझाव आया. दोनों में दो बड़े क्रिकेटर का रोल है. फैसला था, रणजी ट्रॉफी अब न्यूट्रल जगहों पर होगी. इससे पहले मैच दो टीमों के घरों में होते थे. जैसे दिल्ली और मुंबई के मैच में एक सीजन का मैच दिल्ली में और उसके बाद मुंबई में हुआ करता था. इस सीजन में तय किया गया कि अब किसी तीसरी जगह मैच होगा. लागू भी हो गया और अब सीजन के अंत में उसकी समीक्षा की जा सकती है. इस फैसले में सौरव गांगुली की अहम भूमिका थी, जो निर्विवाद रूप से देश के बेहतरीन कप्तानों में एक हैं.

न्यूट्रल वेन्यू पर घरेलू मुकाबलों के फैसला का असर

जिस कमेटी के सुझावों के बाद न्यूट्रल वेन्यू तय किया गया, उसमें गांगुली का अहम रोल था. अब आखिरी चरण शुरू हो गया है. वैसे भी रणजी मैचों के लिए लोग स्टेडियम में नहीं आते थे. इस साल और दूर हैं. बल्कि अपनी टीम न होने की वजह से आयोजकों में ही उदासीनता है. रांची में एक मैच होना था. जगह बदल दी गई, टीमों तक को पता नहीं चला. हरियाणा की टीम रांची पहुंची, तो पता चला कि मैच तो जमशेदपुर में होना है. यह उदासीनता दर्शाता है. क्या उनमें एक टीम झारखंड होती, तो भी ऐसा ही होता? यकीनन नहीं.

LONDON, ENGLAND - JULY 21: Former Indian batsman Sourav Ganguly rings the five minute bell ahead of day five of 2nd Investec Test match between England and India at Lord's Cricket Ground on July 21, 2014 in London, United Kingdom. (Photo by Gareth Copley/Getty Images)

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान और असम की टीमों से कहा गया कि हर खिलाड़ी के लिए एक बोंडा और एक वडा मिलेगा. मतलब खाने में राशनिंग. यह उम्मीद नहीं कर सकते कि अगर दिल्ली टीम अपने घर यानी फिरोजशाह कोटला में खेले, तो खाने को लेकर राशनिंग के बारे में कोई सोच भी सके. क्यूरेटर ने पिच की तैयारी में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है. ऐसे में जो चंद लोग रणजी से जुड़ते भी थे, उन्हें भी दूर कर दिया गया. इसके अलावा, चूंकि रणजी मैच दूर-दराज के इलाकों में भी होते हैं, तो खिलाड़ियों के लिए यात्रा बहुत बढ़ गई है, वो भी बस से. तमाम जगह ऐसी हैं, जहां पहुंचने के लिए बस के अलावा कोई साधन नहीं है.

सचिन का सुझाव

दूसरी बात सुझाव के तौर पर आई. वो दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में एक की तरफ से आई. सचिन तेंदुलकर ने सुझाव दिया कि रणजी मैच दो पिचों पर खेले जाएं. एक पिच तेज गेंदबाजों की मददगार हो और दूसरी टर्निंग विकेट हो. यानी वो चाहते हैं कि पुराने जमाने में पर्थ की विकेट और इस जमाने की कोई भारतीय विकेट एक-दूसरे के बगल हों. दिलचस्प है कि दोनों बड़े क्रिकेटरों के सुझाव विदेश में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहतर हो, इसके मद्देनजर दिए गए हैं.

कैसा है सचिन का सुझाव

रणजी की बात करने से पहले सचिन के सुझाव की बात कर लेते हैं. दिल्ली के लिए काफी समय तक पिच तैयार करते रहे राधेश्याम इस सुझाव को व्यावहारिक नहीं बताते. उनके मुताबिक, ‘इस तरह के सुझाव का कोई मतलब नहीं, जिसे किसी हालत में लागू न किया जा सके.’ बीसीसीआई से जुड़े एक और क्यूरेटर का विचार भी ऐसा ही है, ‘सचिन हैं, उनके मन में कोई बात आई होगी. उस लिहाज से उन्होंने बोल दिया. लेकिन ऐसा संभव नहीं है.’

पहला सवाल

ऐसा क्यों संभव नहीं है, इसे लेकर कई तर्क हैं. पहला यह कि जिस पिच पर मैच होगा, उस समय दूसरी पिच का बचाव कैसे होगा. जाहिर है, दोनों पिच अगल-बगल होंगी. ऐसे में आप स्पाइक्स पहने गेंदबाज, बल्लेबाज और फील्डर को दूसरी पिच पर आने से कैसे रोका जा सकेगा. दूसरी पिच फॉरवर्ड शॉर्ट लेग और सिली पॉइंट पर होगी. ऐसे में फील्डर फील्डिंग करते समय कहां खड़ा होगा.

दूसरा सवाल

मान लीजिए मैच लाहली में होना है. हरियाणा की इस जगह के बारे में सब जानते हैं कि आसपास खेत होने की वजह से वॉटर लेवल ऊंचा है. इस वजह से पिच में नमी होती है. इसके बाद, आसपास का माहौल भी ऐसा है कि स्विंग को मदद मिलती है. यहां पर सूखी हुई, दरकती हुई पिच कैसे बनाई जाएगी.

Wayanad: Deepak Behera of Odisha in action against Maharashtra in the Ranji trophy match at Krishnagiri Cricket Stadium in Wayanad on Tuesday. PTI Photo (PTI11_29_2016_000281B)

तीसरा सवाल

पिच को तैयार करने के लिए दिन के समय काफी काम होता है. अगर पहले तेज गेंदबाजों की मददगार पिच का इस्तेमाल होगा, तो दूसरी पिच को तैयार करने के लिए कितना समय मिलेगा. दिन में छह घंटे मैच चलने के बाद जाहिर है, धूप खत्म हो चुकी होगी. ऐसे में जो प्रक्रिया आजमाई जाती हो, वो कैसे आजमाई जाएगी.

कुल मिलाकर भारत के महानतम कप्तानों में एक और महानतम बल्लेबाजों में एक के सुझाव भारतीय क्रिकेट को सुधारने के हैं. वे चाहते हैं कि टीम घर में भी जीते और बाहर भी. लेकिन सुझावों से ऐसा लगता है, जैसे सिर्फ प्रयोग ही उनके दिमाग में है. सवाल कुछ और हैं. जैसे, अगर सौरव गांगुली या बाकी लोगों को लगता है कि घरेलू पिच पर क्यूरेटर अपनी मर्जी की पिच बनवाते हैं, तो क्या किसी बाहर के आदमी को अपनी देख-रेख में पिच बनवाने का काम नहीं सौंपा जा सकता? अगर सचिन को लगता है कि दो पिच पर मैच होना चाहिए, तो क्या बीसीसीआई ये तय नहीं करा सकती कि जितने मैच एक टीम को खेलने हैं, वे अलग-अलग तरह की पिच पर हों? आखिर क्यूरेटर तो उनके ही हैं. वे जगह और माहौल देखकर पिच की मिजाज तो तय कर ही सकते हैं ना!

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