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जाते-जाते बीसीसीआई को झटका देंगे चीफ जस्टिस ठाकुर?

डेढ़ साल से सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद फैसला सोमवार को आने की उम्मीद

Updated On: Jan 02, 2017 08:37 AM IST

FP Staff

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जाते-जाते बीसीसीआई को झटका देंगे चीफ जस्टिस ठाकुर?

2 जनवरी 2017 का दिन बीसीसीआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है. करीब डेढ़ साल से सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद फैसला सोमवार को आने की उम्मीद है.

पूरे मामले की सुनवाई करते आए चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर रिटायर होने से पहले इस पर फैसला सुना सकते हैं. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और अपने तेवर भी साफ कर दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट बोर्ड के तमाम अधिकारियों को हटाने का निर्देश दे सकता है. जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिश पर पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई को पर्यवेक्षक नियुक्त किया जा सकता है और लोढ़ा कमेटी की सारी सिफारिशों का पालन करने का ऑर्डर भी जारी हो सकता है.

बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के लिए साल की शुरुआत से ही मुश्किलें बढ़ सकती हैं. बीसीसीआई अध्यक्ष पर पहले ही कोर्ट में गलत हलफनामी देने का आरोप लग चुका है.

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि झूठी गवाही के लिए बोर्ड अध्यक्ष को सजा क्यों ना दी जाए. उन पर कोर्ट की अवमानना का केस चलाया जा सकता है अगर बिना शर्त माफी ना मांगी तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है.

अनुराग पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला और सुधार प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश की. हालांकि अनुराग ने इन आरोपों से इनकार किया है.

वैसे ये नौबत इसलिए आई क्योंकि बोर्ड अपने अड़ियल रुख पर कायम रहा. बोर्ड के मुताबिक लोढ़ा कमेटी की ज्‍यादा सिफारिशें मान ली गई हैं, लेकिन कुछ बातें नहीं मानी जा सकती है जिसको लेकर अभी तक गतिरोध बना है.

जिनमें अधिकारियों की उम्र और कार्यकाल का मुद्दा, अधिकारियों के कूलिंग ऑफ पीरियड का मुद्दा और एक राज्य, एक वोट की सिफारिश बीसीसीआई को मंजूर नहीं है.

इसके साथ ही बोर्ड का कहना है कि उन्हें लोढ़ा कमेटी ने अपनी बात रखने का पूरा समय नहीं दिया लेकिन अब बातों का समय बीत गया है. संभव है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बीसीसीआई का पूरा तंत्र ही हिल जाए.

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