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संडे स्पेशल: चेतन शर्मा और रमाकांत देसाई की याद दिलाते विदर्भ के गेंदबाज रजनीश गुरबानी

चेतन और देसाई की तरह गुरबानी भी औसत कद के दुबले-पतले खिलाड़ी हैं जो कहीं से तेज गेंदबाज नहीं लगते

Rajendra Dhodapkar Updated On: Dec 24, 2017 03:01 PM IST

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संडे स्पेशल: चेतन शर्मा और रमाकांत देसाई की याद दिलाते विदर्भ के गेंदबाज रजनीश गुरबानी

एक दौर में मध्यप्रदेश की रणजी ट्रॉफी टीम में दोनों भाईअशोक और संजय जगदाले काफी सालों तक साथ-साथ खेलते रहे थे. संजय जगदाले को आजकल के क्रिकेटप्रेमी भी जानते हैं. वह राष्ट्रीय चयनकर्ता रहे हैं और यह भी जानते हैं कि वह सवा छह फीट ऊंचेलहीमशहीम इंसान हैं. उनके बड़े भाई अशोक औसत कद के दुबले-पतले खिलाड़ी थे. दोनों भाई ऑलराउंडर थेलेकिन जहां लंबे चौड़े संजय ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थेवहीं अशोक बहुत अच्छे मध्यम तेज गेंदबाज थे, जिन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 182 विकेट लिए.

यह बात याद आने की वजह कर्नाटक और विदर्भ के बीच पिछले दिनों हुआ रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल है, जिसे जीत कर विदर्भ की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची. कर्नाटक की टीम घरेलू क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में से है और विदर्भ की टीम ने उसे हरा कर एक तरह से उलटफेर किया है. विदर्भ की इस जीत का काफी सारा श्रेय रजनीश गुरबानी की गेंदबाजी को जाता है, जिन्होंने पहली पारी में पांच और दूसरी पारी में सात विकेट लिए.

रजनीश गुरबानी उभरते हुए मध्यम तेज गेंदबाज हैं, जिनसे भविष्य में उम्मीदें रखी जा सकती हैं. गुरबानी भी औसत कद के दुबले पतले खिलाड़ी हैं, जो कहीं से तेज गेंदबाज नहीं लगते. हम यह सोचते हैं कि तेज गेंदबाजी करने के लिए ताकत की जरूरत पड़ती है. इसलिए हर तेज गेंदबाज लंबा चौड़ा शख़्स होगा. लेकिन अक्सर एकाध ऐसा गेंदबाज आ जाता है जो हमारी कल्पना की छवि के मुताबिक नहीं बैठता और जिसकी गेंदें हमारी कल्पना से ज्यादा तेज रफ्तार से विकेट ले जाती हैं. कोई दुबला-पतला शख्स अपने कंधों से ऐसी ताकत पैदा कर जाता है कि बल्लेबाज चौंधिया जाता है.

चेतन की कदकाठी से धोखा खा जाते थे बल्लेबाज

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हमारी स्मृति में एक ऐसा नाम चेतन शर्मा का है जो अपने मिजाज और अंदाज से तो तेज गेंदबाज थे, लेकिन उनके कद और बनावट से ऐसा नहीं लगता था कि वह तेज गेंदबाज होंगे. छोटे कद के इकहरे बदन के चेतन शर्मा ने भारत के लिए 23 टेस्ट और 64 एक दिवसीय मैच खेले. अक्सर बल्लेबाज चेतन शर्मा की कदकाठी से धोखा खा जाते थे. चेतन के कई स्पेल आक्रामक और घातक गेंदबाजी की मिसाल होते थे. उनमें दमखम भी बहुत था और हौसला भीइसलिए लंबे-लंबे स्पेल कर सकते थे. उनके साथ खेले खिलाड़ी बताते हैं कि चेतन को उकसाने के लिए यह कहना काफी होता था कि वह थक गए हैं, इसलिए आराम कर लें. इसके बाद चेतन की गति फिर तेज हो जाती थी.

साढ़े पांच फीट के दुबले-पतले खिलाड़ी थे देसाई

इस तरह के तेज गेंदबाजों में सबसे ऊपर नाम आता है रमाकांत देसाई का. रमाकांत देसाई का कद था साढ़े पांच फीट और वह भी दुबले-पतले ही खिलाड़ी थे, लेकिन लोग बताते हैं कि वह बहुत शानदार तेज गेंदबाज थे. उन्होंने अपनी जगह उस दौर में बनाई जब यह माना जाता था कि भारत में तेज गेंदबाज हो ही नहीं सकतायह उनकी प्रतिभा का सबूत है.

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रमाकांत देसाई के टेस्ट करियर का आगाज उन्नीस साल की उम्र में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ हुआ. यह सन 1958 - 59 की घरेलू टेस्ट सीरीज थी जिसमें वेस्टइंडीज ने भारत को रौंद दिया था. यह टेस्ट सीरीज कई बातों के लिए जानी जाती है. पहली बातइस टेस्ट सीरीज में चयनकर्ताओं की क्षेत्रीय गुटबाजी इस स्तर पर पहुंच गई थी कि पांच टेस्ट मैचों में पांच कप्तानों ने भारत का नेतृत्व किया था. दूसरेयही सीरीज थी जिसमें खतरनाक गेंदबाजी करने के लिए तेज गेंदबाज रॉय गिलक्रिस्ट को वापस वेस्टइंडीज भेज दिया गया और वह फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेले. हंटबुचर, सोबर्ससोलोमन और कन्हाई जैसे बल्लेबाजों ने ढेर सारे रन बनाए और हॉलगिलक्रिस्ट की जोड़ी ने भारतीय बल्लेबाजों को रन नहीं बनाने दिए. इस सीरीज का पांचवां टेस्ट दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला गयातब तक वेस्टइंडीज की टीम तीन शून्य की बढ़त ले चुकी थी. आखिरी टेस्ट में रमाकांत देसाई को टीम में शामिल किया गया.

प्रथम श्रेणी मैच में सोबर्स और कन्हाई के लिए थे विकेट

इसके पहले देसाई ने एक प्रथम श्रेणी मुकाबले में वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ पारी में पांच विकेट लिए थेइनमें हंटसोबर्स और कन्हाई जैसे दिग्गजों के विकेट शामिल थे. इसी प्रदर्शन के बूते उन्हें टेस्ट टीम में शामिल किया गया. भारतीय ओपनिंग गेंदबाजी की क्या स्थिति थी यह इस बात से जाहिर होता है कि देसाई के साथ दूसरे छोर से पहले दो ओवर पंकज रॉय ने डाले. वह बेशक कामयाब ओपनिंग बल्लेबाज थे, लेकिन गेंदबाज वह सुनील गावस्कर जैसे ही थे, जिन्होंने करीब डेढ़ दशक बाद भारत के लिए एक बार ओपनिंग गेंदबाजी की थी. कोटला की विकेट तब भी वैसी ही होनी चाहिए, जैसी अब है.

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हो सकता है वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के खतरे को कम करने लिए उसे और भी पटरा बना दिया गया होगा. यह इस बात से भी जाहिर है कि हॉल और गिलक्रिस्ट के खिलाफ भारतीय टीम ने सीरीज का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 415 रन का बनाया. जवाब में वेस्टइंडीज ने अपनी एकमात्र पारी में आठ विकेट पर 644 रन बनाए. देसाई ने 49 ओवर गेंदबाजी की और 168 रन देकर चार विकेट लिए, जिनमें कन्हाई और सोबर्स के विकेट थे. वह भारत के सबसे ज्यादा कामयाब गेंदबाज थे. टेस्ट बराबरी पर छूटा.

छोटे कद के थे रॉय गिलक्रिस्ट भी

बहरहालवेस्टइंडीज के सबसे तेज और शायद दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाज रॉय गिलक्रिस्ट थे. उन्हें बल्लेबाज को आउट करने की बजाय उसे आतंकित करने और ज़ख़्मी करने में शायद ज्यादा मज़ा आता था. उनका टेस्ट करियर जल्दी खत्म हो गया. गिलक्रिस्ट का कद भी सिर्फ पांच फीट, आठ इंच था.

बाउंसर से हनीफ को खूब परेशान किया देसाई ने

देसाई की गति अच्छी खासी तेज थीवह अच्छी स्विंग करवा लेते थे और छोटे कद के बावजूद उनकी बाउंसर बहुत घातक थी, जिस पर उन्होंने अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को परेशान किया. महान बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद को भी उनकी बाउंसर समझने में बहुत दिक्कत आई. पाकिस्तान के भारत के दौरे पर तीन टेस्ट में चार बार उनकी विकेट देसाई ने निकाली. देसाई ने अपना सारा क्रिकेट उस दौर में खेला जब भारतीय क्रिकेट स्पिन गेंदबाजी पर पूरी तरह निर्भर हो गया था और तेज गेंदबाज की भूमिका सिर्फ शुरुआती औपचारिकता पूरी करने की होती थी. अक्सर यह औपचारिकता कोई भी यहां तक कि नवाब पटौदीअजित वाडेकरबुधी कुंदरन जैसे लोग भी पूरी कर लेते थे. भारत की पिचें भी स्पिन के लिहाज से ही बनाई जाती थीं. ऐसे में देसाई को इन्हीं पिचों पर जी-तोड़ मेहनत करनी होती थी और उन्हें दूसरे छोर से भी कोई मदद नहीं मिलती थी. उन्हें टीम से भी अक्सर अंदर बाहर होते रहना पड़ा. 30 वर्ष के होते-होते उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया.

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छोटे कद और ऊंचे हौसले की एक बड़ी मिसाल

दिलचस्प बात यह है कि इसके बावजूद उनका रिकॉर्ड घरेलू मैदानों पर बेहतर है. विदेशी मैदानों पर वह कामयाब नहीं हुए. एक तो बहुत कम उम्र में उन्हें मुश्किल दौरों पर जाना पड़ा और उनका मार्गदर्शन करने वाला भी कोई नहीं था. लेकिन इस दौर में वह अकेले भारतीय तेज गेंदबाज थे जो नामी विदेशी बल्लेबाजों को दहला सकते थे. घरेलू क्रिकेट में वह बहुत कामयाब थे. मुंबई के लिए उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 15.26 की औसत से 238 विकेट लिए. वह बाद में राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे. टाइनी” रमाकांत देसाई छोटे कद और ऊंचे हौसले वाले तेज गेंदबाजों की एक बड़ी मिसाल हैं.

(फोटो साभार - इनमेमोरीऑफ ट्विटर)

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