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संडे स्पेशल: ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद छोड़ने को कला के स्तर पर पहुंचा दिया था गावस्कर ने

वकार यूनुस ने राहुल द्रविड़ को इस मामले में अपने दौर का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना था

Rajendra Dhodapkar Updated On: Jan 14, 2018 01:10 PM IST

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संडे स्पेशल: ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद छोड़ने को कला के स्तर पर पहुंचा दिया था गावस्कर ने

टीम इंडिया केपटाउन में पहला टेस्ट हारने के बाद अब दूसरे सेंचुरियन में साउथ अफ्रीका से मुकाबला कर रही है. भारत के इस साउथ अफ्रीका दौरे में टीम इंडिया के बल्लेबाजों की जिस कमजोरी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छेड़ने के लालच में फंस जाना.

 बल्लेबाजों का ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों को छोड़ना या जिसे क्रिकेट की भाषा में लीविंग“ कहते हैं. पहले टेस्ट में बहुत से भारतीय बल्लेबाज ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों का पीछा करते पकड़े गए थे इसलिए इस टेस्ट के पहले गेंद छोड़ना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. खबरें आ रही थीं कि नेट में भारतीय बल्लेबाज गेंद छोड़ने का अभ्यास कर रहे थे. इस टेस्ट मैच में गेंद वैसी नहीं घूम रही है जैसी पहले टेस्ट मैच में थीतब भी यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय बल्लेबाजों के अभ्यास का नतीजा क्या है.

वैसे यह बात सुनने में अजीब लगती है कि बल्लेबाजों के लिए गेंद छोड़ना इतना मुश्किल क्यों हो जाता है. अगर ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद पर आक्रामक शॉट खेलते हुए कोई आउट हो जाए तो समझ में भी आता है कि रन बनाने की कोशिश कर रहे थे और आउट हो गए. लेकिन अक्सर बल्लेबा अच्छी खासी ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद पर रक्षात्मक शॉट खेलने की कोशिश में बाहरी किनारा दे बैठते हैं. यह सोचने की बात है कि जिस गेंद पर रन भी नहीं मिलना है और न वह स्टंप पर आ रही हैउसे बल्लेबा क्यों खेलने की कोशिश करता हैलेकिन हम पाते हैं कि ऐसा अमूमन होता है और इसलिए गेंद को छोड़ने का बाकायदा अभ्यास करना पड़ता है. बल्कि गेंद खेलने की तरह गेंद छोड़ना भी एक कौशल है, जिसमें कुछ बल्लेबा दूसरे बल्लेबाजों के मुकाबले ज्यादा माहिर होते हैं.

धीरज की परीक्षा लेती है ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद

इस बात से ज़ाहिर होता है कि क्रिकेट या और कोई भी खेल जितना शारीरिक होता है उतना ही दिमाग में भी खेला जाता है. बल्लेबाज हर गेंद पर यह हिसाब लगाता रहता है कि इस गेंद को खेला जाए कि छोड़ा जाए.  और जब यह हिसाब ज्यादा पेचीदा हो जाता है तो किसी गेंद पर गलती हो जाने की संभावना बढ़ जाती है. अक्सर यह भी देखने में आता है कि गेंदबाज लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद डालकर बल्लेबाज के धीरज की परीक्षा लेते रहते हैं. कभी-कभी बल्लेबाज का धीरज चुक जाता है और वह बाहर की गेंद पर बल्ला लगा देता है.

सीमित ओवरों में गेंद छोड़ने का विकल्प ज्यादा नहीं

नए दौर के क्रिकेट में सीमित ओवरों का क्रिकेट काफी होता है. सीमित ओवरों के क्रिकेट में गेंद को छोड़ने का विकल्प ज्यादा नहीं रहता. इसका असर ज्यादा बड़े दौर के क्रिकेट पर भी पड़ता है और अक्सर बल्लेबाज चाहते न चाहते हुए बाहर की गेंद पर बल्ला लगा ही देता है. चूंकि क्रिकेट गेंदबाजी और बल्लेबाजी का खेल है इसलिए बल्लेबाज का रिफ्लेक्स गेंद की तरफ बल्ला बढ़ा देने का होता है. गेंद को छोड़ने के लिए इस रिफ्लेक्स के खिलाफ सतर्क रूप से सोचने की जरूरत होती है. जिस वक्त यह सतर्कता जरा कम होती है बिना जाने ही बल्ला गेंद की ओर बढ़ जाता है.

इसका सबसे अच्छा उदाहरण अक्सर लेग की ओर से ऑफ स्टंप के बाहर जाने वाली गेंदों पर देखने को मिलता है. बल्लेबाज ऑफ या मिडिल स्टंप पर आने वाली गेंद के लिए बल्ला सामने करता है और गेंद जैसे-जैसे ऑफ स्टंप के बाहर की ओर जाने लगती हैबल्लेबाज का बल्ला भी गेंद के पीछे-पीछे चलता चला जाता है. जैसे गेंद में कोई चुंबकीय शक्ति हो या बल्लेबाज सम्मोहित हो गया हो. मुझे याद है एक बार टीवी पर इयान बॉथम ने अंग्रेज बल्लेबाज रॉबिन स्मिथ के सामने उनकी नकल बनाते हुए बताया था कि कैसे स्मिथ का बल्ला शेन वॉर्न की गेंद के पीछे पीछे चला जाता है.

ऑफ स्टंप कहां हैये मालूम होना बड़ा गुण

गेंद को छोड़ने के लिए बल्लेबाज को यह मालूम होने की जरूरत होती है कि उसका ऑफ स्टंप कहां हैइसलिए यह बड़े बल्लेबाज का एक बड़ा गुण माना जाता है. वकार यूनुस ने राहुल द्रविड़ को इसलिए भी अपने दौर का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना था क्योंकि उनके मुताबिक वह अपने ऑफ स्टंप की स्थिति बहुत अच्छी तरह जानते थे.

India's Rahul Dravid drives the ball during day three of the second cricket Test against Australia at the Sydney Cricket Ground on January 5, 2012. IMAGE STRICTLY RESTRICTED TO EDITORIAL USE - STRICTLY NO COMMERCIAL USE AFP PHOTO / Greg WOOD / AFP PHOTO / GREG WOOD

यही बात इमरान खान ने सुनील गावस्कर के बारे में कही थी. अगर अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज यह सर्टिफिकेट दें तो इसका बड़ा महत्व है.

आखिरी मौके तक तेज गेंद को देखते थे गावस्कर

जब गेंद को छोड़ने की बात आती है तो सुनील गावस्कर का नाम न आए यह कैसे हो सकता है. गावस्कर ने ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद छोड़ने को कला के स्तर पर पहुंचा दिया था. वह जिस तरह से आखिरी मौके तक तेज गेंद को देखते रहते थे और ठीक वक्त पर ऑफ स्टंप के जरा सी बाहर गेंद को छोड़ देते थे  वह देखने की ही चीज थी. उनका बल्ला ठीक उस वक्त गेंद की लाइन से हट जाता था जब वह स्टंप के पास होती थी. ऑफ स्टंप के आसपास की लाइन को अनिश्चितता का गलियारा कहा जाता है, क्योंकि यहां बल्लेबाज अक्सर समझ नहीं पाता कि वह गेंद को खेले या छोड़ दे. गावस्कर ऐसे बल्लेबाज थे जिनके लिए यह अनिश्चय लगभग नहीं होता था.

रिचर्ड हेडली उठाते थे इस कमजोरी का फायदा

अनिश्चिय के इस गलियारे का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने वाले जो गेंदबाज हमने देखे हैं उनमें सबसे बड़े रिचर्ड हेडली थे. वह लगातार ऑफ स्टंप के आसपास गुड लेंथ पर एक ही एक्शन से गेंद को अंदर बाहर स्विंग कराते रहते थे. उनकी शायद ही किसी गेंद पर बल्लेबाज आश्वस्त हो पाता था और उनके खिलाफ़ आक्रामक बल्लेबाजी करना तो तकरीबन नामुमकिन था.

Former New Zealand cricketer Richard Hadlee gestures as he attends a function organised by the International Cricket Council (ICC) to present him a cap for the hall of fame, during the lunch break of the first day of the final Test match between New Zealand and India, at the Basin Reserve stadium in Wellington on April 3, 2009. Hadlee was the first ever cricketer to claim 400 Test wickets, and is one of the 50 players which whom the ICC is honouring with in the Hall of Fame. AFP PHOTO/Dibyangshu SARKAR / AFP PHOTO / DIBYANGSHU SARKAR

हेडली के सबसे करीब दूसरे गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा थे, जो बल्लेबाज के धीरज और कौशल की वैसी ही परीक्षा ले सकते थे.

... जब संधू की गेंद ले उड़ी ग्रीनिज का ऑफ स्टंप

बाहर जाती हुई गेंद को छेड़कर आउट होना तो आम है, लेकिन बल्लेबाज तब सचमुच बुद्धू बना मंजर आता है जब वह गेंद को छोड़ देता है और गेंद आकर स्टंप बिखेर जाती है. इस तरह की एक ऐतिहासिक गेंद वह थी जिस पर सन 1983 के विश्व कप फाइनल में गॉर्डन ग्रीनिज आउट हुए थे. वह बलविंदर संधू की धीमी गेंद थीजो लगभग एक तेज ऑफ स्पिन गेंद की तरह थी. उसका टिप्पा ऑफ स्टंप के काफी बाहर पड़ा और ग्रीनिज ने उसे जाने देने के लिए बल्ला ऊपर उठा दिया. वह गेंद टिप्पा खाकर तेजी से अंदर आई और ग्रीनिज का ऑफ स्टंप ले गई. वह वेस्टइंडीज का पहला विकेट था और कह सकते हैं कि उस गेंद से भारत की जीत की नींव पड़ी और इस तरह भारतीय क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत हुई. देखना यह है कि इस टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजों का गेंद छोड़ने का अभ्यास कितना काम आता है!

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