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क्रिकेट के शौकीन हैं तो इनके बारे में जानना जरूरी है

दो ऐसे महान क्रिकेटरों की कहानी, जो कभी टेस्ट नहीं खेले

Manoj Chaturvedi Updated On: Mar 01, 2017 02:16 PM IST

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क्रिकेट के शौकीन हैं तो इनके बारे में जानना जरूरी है

अपने समय के दिग्गज लेफ्ट आर्म स्पिनर राजिंदर गोयल और पद्माकर शिवालकर को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कर्नल सीके नायुडू लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए मनोनीत किया है. इस पुरस्कार के लिए इन दोनों को चुना जाना अच्छा है. हालांकि एक लिहाज से देखा जाए तो इनको इस अवॉर्ड के लिए चुनने में देरी कर दी गई. दोनों ही अब इस स्थिति में हैं कि उनके लिए इस समय इस खुशी के बहुत मायने नहीं हो सकते हैं.

यह सही है कि यह दोनों ही बेहतरीन गेंदबाज होने पर भी टेस्ट मैच नहीं खेल सके. इसके बाद भी उनकी काबिलियत पर कभी किसी ने शक नहीं किया. राजिंदर गोयल के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 750 विकेट और शिवालकर के नाम 589 विकेट दर्ज हैं.

जब पद्माकर शिवालकर ने गाए रफी के गीत

यह कोई 1980 के दशक की बात है. खेल पत्रकारों के जेके बोस क्रिकेट टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए हम मुंबई गए थे. वहां शाम को पद्माकर शिवालकर के बैंड का आयोजन था. मुझे याद है कि उन्होंने मोहम्मद रफी के गाने गाकर वहां मौजूद सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया था.

वह 47 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेले. इस उम्र तक खेलने की वजह थी कि मुंबई के तत्कालीन कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने जोर देकर शिवालकर को संन्यास से वापस बुला लिया था. शिवालकर के दमखम का कोई जवाब नहीं था. संन्यास से वापस आने पर खेले पहले मैच में उन्होंने 46 ओवर गेंदबाजी की. यही नहीं, स्पिन खेलने के मास्टर माने जाने वाले गुंडप्पा विश्वनाथ का विकेट लिया. विश्वनाथ को उन्होंने कवर में कैच कराया.

राजिंदर गोयल की सादगी के क्या कहने...

राजिंदर गोयल की जितने शानदार गेंदबाज थे, उतनी सादगी पसंद भी हैं. कुछ समय पहले की बात है लाहली (रोहतक) में मैच था और उसे देखने के लिए भारत के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी भी वहां पहुंचे थे. राजिंदर गोयल को बेदी ने अपने आने की सूचना दी तो वह रोहतक से अपना स्कूटर उठाकर लाहली के क्रिकेट मैदान पर पहुंच गए. बेदी साहब ने 74 साल की उम्र में स्कूटर चलाकर आने पर उन्हें सलाह दी कि भाई राजिंदर, इस उम्र में स्कूटर चलाना ठीक नहीं है. इसलिए आप कार खरीद लो.

राजिंदर गोयल के लिए बेदी की किसी भी सलाह के बहुत मायने हैं. इसलिए उन्होंने कार खरीद ली. पर कार चलाना जानते नहीं हैं, इसलिए कार घर में खड़ी रहती है. जब कभी बेटा नितिन आता है तो वह पिता को कार में बैठाकर ले जाता है. गोयल साहब पहले की तरह ही स्कूटर पर चलते रहते हैं. वह कहते भी हैं कि स्कूटर से मेरा साथ छूटने वाला नहीं है.

भारतीय स्टेट बैंक की नौकरी से रिटायर होने वाले राजिंदर गोयल की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह कभी कप्तान से अपने हिसाब से फील्डिंग सजाने को नहीं कहते थे. वह हमेशा कप्तान द्वारा सजाई फील्डिंग के हिसाब से गेंदबाजी किया करते थे. शिवालकर और राजिंदर गोयल दोनों को ही टेस्ट नहीं खेल पाने का कोई मलाल नहीं है.

गोयल इस धारणा से कतई इत्तेफाक नहीं रखते कि बेदी की वजह से वह टेस्ट नहीं खेल पाए. वह कहते हैं कि बेदी बहुत बड़े खिलाड़ी थे और वह अपनी बेहतरी की वजह से टेस्ट खेलते रहे. गोयल एक बार टेस्ट खेलने के करीब भी पहुंचे पर भाग्य में टेस्ट खेलना नहीं लिखा होने की वजह से वह टेस्ट खिलाड़ी बनने का गौरव नहीं पा सके.

यह बात 1974-75 की बात है. वेस्ट इंडीज की टीम भारतीय दौरे पर आई थी. बेंगलुरू में में खेलने जाने वाले टेस्ट मैच की टीम से बिशन सिंह बेदी को हटा दिया गया था. राजिंदर गोयल टीम में थे, इसलिए यह माना जा रहा था कि गोयल का टेस्ट पदार्पण हो जाएगा. लेकिन टीम प्रबंधन ने गोयल को खिलाने के बजाय दो ऑफ स्पिनरों प्रसन्ना और वेंकटराघवन को खिलाने का फैसला कर लिया और राजिंदर गोयल एक बार फिर टेस्ट खिलाड़ी बनने से रह गए.

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