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दुश्मनों की दोस्ती ने बीसीसीआई में बदला खेल, क्या अमित शाह ने भी दिया दखल?

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू करने के रास्ते में आई अनुराग ठाकुर-श्रीनिवासन की दोस्ती!

Updated On: Jun 27, 2017 01:01 PM IST

FP Staff

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दुश्मनों की दोस्ती ने बीसीसीआई में बदला खेल, क्या अमित शाह ने भी दिया दखल?

दो दुश्मन थे, क्या इस वक्त वो सबसे अच्छे दोस्त हैं? बीसीसीआई के दो पूर्व अध्यक्ष मिलकर कहीं सुप्रीम कोर्ट की बनाई प्रशासन समिति के साथ ‘खेल’ तो नहीं कर रहे? बोर्ड के लोगों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोर्ड में लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है. इसके बावजूद अभी बोर्ड के लोगों ने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं. इसी उम्मीद के चलते लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने में हो रही मुश्किलों का हल निकालने के लिए कमेटी बनाने का फैसला किया गया है.

अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के मुताबिक बोर्ड के एक प्रमुख अधिकारी ने बताया है, ‘श्रीनिवासन, ठाकुर और यहां तक कि अजय शिर्के गैंग-अप हो गए हैं. ये मिलकर जस्टिस लोढ़ा की सिफारिशों को लागू करने में रोड़ा अटका रहे हैं.’ दिलचस्प है कि जो कमेटी बनाने के पक्ष में थे, उनमें बीजेपी अध्यक्ष और गुजरात क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हैं. अखबार के मुताबिक अमित शाह ने अपने बेटे जय को संदेश भिजवाया. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी.

बोर्ड अधिकारी के मुताबिक, ‘एक साथ होने का फैसला रविवार रात का है. जब प्रशासन समिति के सामने प्रस्ताव रखे जाने की बात हुई, उस वक्त गैंग बनने का काम शुरू हुआ. उम्मीद थी कि एक समझदारी भरा बीच का रास्ता निकलेगा. इससे बोर्ड की इमेज भी सुधरेगी. ऐसा कोई प्रस्ताव सीओए के सामने रखा जाएगा. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.’

अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोर्ड अध्यक्ष और सचिव के पद से हटना पड़ा था. श्रीनिवासन इस वक्त तमिनलाडु क्रिकेट संघ की ओर से एसजीएम का हिस्सा थे. एसजीएम में जो लोग अलग-थलग पड़ गए, उनमें राजीव शुक्ला, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अभय आप्टे शामिल हैं.

कहा यही जा रहा है कि एक ग्रुप जो लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू करने पर राजी था, आखिरी समय में अपनी बातों से हट गया. इस वजह से जो तस्वीर एसजीएम के बाद निकलकर आई, वो यही संकेत है कि 18 जुलाई 2016 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए लोग तैयार नहीं हैं.

19 संघ सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले ही प्रस्ताव दे चुके हैं. टेलीग्राफ के मुताबिक श्रीनिवासन और उनके लोगों ने अधिकतम 70 साल वाले कैप पर आपत्ति को भी प्रस्ताव में शामिल करा दिया. हालांकि संघ मे अधिकतम नौ साल वाले मुद्दे को नहीं डलवा सके.

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