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संडे स्पेशल: छोटे कद के इस बड़े खिलाड़ी को सलाम...

स्क्वायर कट के शहंशाह गुंडप्पा विश्वनाथ के जन्मदिन पर विशेष

Rajendra Dhodapkar Updated On: Feb 12, 2017 02:11 PM IST

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संडे स्पेशल: छोटे कद के इस बड़े खिलाड़ी को सलाम...

सन 1969 में न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच एकनाथ सोलकर का पहला टेस्ट था. होटल में उनके रूम पार्टनर थे गुंडप्पा विश्वनाथ जो टीम में तो थे लेकिन खेल नहीं रहे थे. सोलकर पहली इनिंग्स में शून्य पर आउट होकर लौटे तो स्वाभाविक है कि बहुत दुखी थे. रात में उनके पार्टनर विश्वनाथ ने उनका हौसला बढ़ाने के लिए कहा कि दुनिया के कई महान खिलाड़ी अपनी पहली पारी में शून्य पर आउट हुए थे. इसके बाद उन्होंने मिसाल के तौर पर उन्हें जो भी याद आए, उन तमाम महान खिलाड़ियों के नाम गिना दिए.

उसी साल कुछ दिन बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कानपुर में दूसरे टेस्ट में विश्वनाथ के टेस्ट करियर का आगाज हुआ. पहली इनिंग्स में उन्होंने भी शून्य बनाया. तब भी उनके रूम पार्टनर सोलकर ही थे. अब उन महान खिलाड़ियों के नाम गिनाने की बारी सोलकर की थी, जिन्होंने कथित रूप से पहली इनिंग्स में शून्य बनाया था. सोलकर ने तमाम नाम गिनाने के बाद अंत में एक नाम और  जोड़ दिया - " ... और सोलकर! ". शून्य बनाने के बाद उनके कप्तान नवाब पटौदी ने भी कहा कि घबराओ नहीं, अगली पारी में तुम शतक बनाओगे. वैसा ही हुआ.

जब दूसरी पारी में विश्वनाथ ने 137 रन बनाए, तो क्रिकेट प्रेमियों में खुशी के साथ आशंका भी पैदा हो गई. इसकी वजह यह थी कि इसके पहले जिस भी भारतीय खिलाड़ी ने पहले टेस्ट में शतक बनाया, वह फिर कभी शतक नहीं बना पाया. लाला अमरनाथ, दीपक शोधन, अब्बास अली बेग,  हनुमंत सिंह जैसे कई नाम इस फेहरिस्त में थे. सौभाग्य से विश्वनाथ ने यह सिलसिला तोड़ा और एक लंबे और कामयाब करियर में क्रिकेट प्रेमियों को कई यादगार पलों का तोहफा दिया.

ऐसा खिलाड़ी, जिसे विपक्षी टीम भी करती थी प्यार

विश्वनाथ की बात जब क्रिकेट प्रेमी जब करते हैं तो दो बातें निश्चित रूप से कही जाती हैं. वे खूबसूरत, आकर्षक और लयात्मक क्रिकेट की सबसे ऊंची कसौटी थे और वे निहायत शरीफ आदमी हैं. जैसा कि रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि वे क्रिकेट के सबसे ज्यादा प्रिय व्यक्तित्व हैं. इन्हीं दो गुणों की वजह से वे प्रतिस्पर्धी टीमों में भी लोकप्रिय थे. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मैदान पर सामने वाली टीम के खिलाड़ियों के प्रति जरा भी नरमी दिखाने के लिए नहीं जाने जाते. ग्रेग चैपल से तो यह उम्मीद करना व्यर्थ ही माना जाना चाहिए. लेकिन इन्हीं ग्रेग चैपल ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच में विश्वनाथ के शतक बनाने पर उन्हें गोद में उठा लिया था.

Former Indian cricketer Sunil Gavaskar (L) congratulates former teammate Gundappa Vishwanath after presenting the Castrol Lifetime Achivement award in Mumbai on September 17, 2009. The awards are presented anually to Indian cricketers for their achivements in tests and one day internationals. AFP PHOTO/ Indranil MUKHERJEE / AFP PHOTO / INDRANIL MUKHERJEE

सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ.

अंग्रेज कप्तान टोनी ग्रेग ने भी एक बार ऐसा ही किया था, जब उनके खिलाफ विश्वनाथ ने शतक बनाया था. ग्रेग कुछ ज्यादा लंबे, लगभग छह फुट सात इंच के थे. विश्वनाथ कुछ ज्यादा ही छोटे, करीब पांच फुट तीन इंच के हैं. ग्रेग ने इस घटना का वर्णन करते हुए दोनों की लंबाई में इस फर्क की बात करने के साथ विश्वनाथ के एक बहुत अच्छे इंसान होने पर भी जोर दिया.

विश्वनाथ के लिए हार-जीत से बड़ी थी खेल भावना

उनकी शराफत का एक बड़ा प्रमाण तो वह चर्चित घटना है, जब भारत-इंग्लैंड के बीच स्वर्ण जयंती टेस्ट मैच में भारत की कप्तानी करते हुए उन्होंने बॉब टेलर को बल्लेबाजी करने वापस बुला लिया था. जबकि अंपायर द्वारा आउट दिए जाने पर टेलर पैवेलियन वापस जा रहे थे. उनकी इस दरियादिली से भारत मैच हार गया था. लेकिन यह साबित हो गया था कि इस शानदार इंसान के लिए हार जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण खेल भावना थी.

ऐसा अनुभव है कि आमतौर पर बहुत सुंदर और लयात्मक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी बहुत मुश्किल परिस्थितियों  में या बहुत अच्छी गेंदबाजी के खिलाफ बहुत कारगर नहीं होते. भारत में दो खिलाड़ी इसके अपवाद दिखाई देते हैं. विश्वनाथ और वीवीएस लक्ष्मण. विश्वनाथ ने कई पारियां बहुत कठिन हालात में और बहुत अच्छी गेंदबाजी के खिलाफ खेली हैं. बल्कि कई लोग उन्हें मुश्किल हालात में अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ भारतीय बल्लेबाज मानते हैं. वो बेहतरीन तेज गेंदबाजी और स्पिन के खिलाफ एक जैसे प्रभावशाली थे.

विश्वनाथ के नाम के साथ स्क्वायर कट इस कदर जुड़ा है और उस पर इतना ज़्यादा लिखा-बोला गया है कि कुछ नया कहना मुश्किल है. यह बात सही है कि स्क्वायर कट के अलावा उनके जैसे स्क्वायर ड्राइव, कवर ड्राइव और लेट कट खेलने वाला खिलाड़ी शायद ही कोई मिले. कवर से लेकर थर्डमैन तक तो उनका प्रिय क्षेत्र था. लेकिन वे इस इलाके तक या ऑफ साइड में सीमित खिलाड़ी नहीं थे. वे विकेट के चारों तरफ एक सी महारत के साथ खेलने वाले संपूर्ण खिलाड़ी थे, जिनके पास सभी शॉट थे.

चयनकर्ता के तौर पर भी अहम योगदान 

विश्वनाथ के एक पहलू की बात करना भी जरूरी है, जिस पर बहुत कम चर्चा होती है. भारत में, बल्कि सारी दुनिया में ही चयनकर्ताओं का रवैया अक्सर आलोचना का सबब बनता है. अक्सर यह आलोचना सही भी होती है. मोहिंदर अमरनाथ ने एक बार चयनकर्ताओं को ‘बंच ऑफ़ जोकर्स’ कहा था और बहुत गलत नहीं कहा था. हमने जितना देखा है, उसमें शायद बतौर चयनकर्ता विश्वनाथ का दौर सबसे अच्छा था.

उनके चयन में दूरदृष्टि, निष्पक्षता और बुनियादी ईमानदारी दिखती थी. सौरव गांगुली के नेतृत्व में जो मजबूत टीम बनी थी उसकी नींव बतौर चयनकर्ता विश्वनाथ के कार्यकाल में पड़ी थी. वे खिलाड़ियों की भावनाओं और आत्मसम्मान का खयाल रखने वाले चयनकर्ता थे. ऐसा बताया जाता है कि वे अगर किसी खिलाड़ी को हटाते थे, तो उससे बात करके उसे परिस्थिति समझाने की कोशिश करते थे. कम से कम तब तक भारतीय क्रिकेट में यह नई बात थी.

इस छोटे कद के बड़े खिलाड़ी और इंसान को बहुत लंबा जीवन मिले. भगवान ऐसे लोग कभी कभार ही तो बनाता है!

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