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अपने स्पिन गेंदबाजी कौशल को हमेशा नया आयाम देने में लगे रहते हैं अश्विन

हाल ही में अश्विन सबसे तेज 300 विकेट लेने वाले गेंदबाज बने हैं

Neeraj Jha Updated On: Dec 02, 2017 12:10 PM IST

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अपने स्पिन गेंदबाजी कौशल को हमेशा नया आयाम देने में लगे रहते हैं अश्विन

टेस्ट मैच में रविचंद्रन अश्विन का जब से आगमन हुआ है, उन्होंने रिकार्ड्स तोड़ने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा है. जाहे वो भारतीय रिकार्ड्स हो या फिर अंतरराष्ट्रीय, अश्विन सभी प्रकार के रिकॉर्ड तोड़ने में माहिर रहे है. टेस्ट में प्रयोग होने वाली लाल गेंद के साथ जो उनका एक अलग लगाव है, जिसकी वजह से वो अब तक  50, 100, 150, 200 और टेस्ट क्रिकेट में 250 विकेट लेने वाले सबसे तेज भारतीय हैं. सबसे कम मैचों में 300 का आंकड़ा पार कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद तो उन्होंने ये साबित कर दिया है की आज की तारीख में वो दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज है.

रिकॉर्ड्स तोड़ने में माहिर

ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली ने 1981 में जब 56 वे टेस्ट मैच में 300 विकेट पूरा किया था तब क्रिकेट प्रेमियों ने यही सोचा होगा की इस मुकाम को तोड़नेवाला शायद ही कोई आएगा. रिकॉर्ड तो बनते ही है टूटने के लिए लेकिन लेकिन किसी ने ये तो बिलकुल ही नहीं सोचा होगा की लिली जैसे महान तेज गेंदबाज का रिकॉर्ड एक स्पिनर तोड़ेगा. 36 साल बाद अश्विन ने सिर्फ 54 मैचों में उसी मील का पत्थर तक पहुंचकर लिली का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रिकॉर्ड बुक्स में अगर हम झांके तो विकेट के 300वां आंकड़ा पूरा करने में मुथैया मुरलीधरन को 58 टेस्ट खेलने पड़े थे जबकि रिचर्ड हैडली, मैल्कम मार्शल और डेल स्टेन ने 61 मैचों में. अगर भारतीय बोलर्स की बात करें तो अनिल कुंबले ने ये आंकड़ा 66 मैचों में पार किया था.

Nagpur: Indian bowler R Ashwin celebrates the wicket of Sri Lankan batsman Dasun Shanaka during the 2nd cricket test match played in Nagpur on Monday. PTI Photo by Shashank Parade (PTI11_27_2017_000027B)

मुरलीधरन कहते है की अश्विन वर्तमान में विश्व में सर्वश्रेष्ठ स्पिनर हैं और गेंद से उनकी उपलब्धियां उनकी महानता का प्रमाण है. भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा है की जिस तरह के फॉर्म अश्विन दिखा रहे है अगर यही चलता रहा तो वो खेल को अलविदा कहने से पहले 600 का आंकड़ा भी छू सकते हैं.

आईपीएल प्रदर्शन से मिला मौका

चेन्नई में जन्मे ऑफ स्पिन अश्विन रणजी क्रिकेट में 2006 से ही शिरकत कर रहे थे. लेकिन पहली बार लाइमलाइट में वो आए 2010 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में जहाँ उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन कर सेलेक्टर्स को प्रभावित करने में सफल रहे. और उसके बाद उसी साल चैंपियंस लीग ट्वेंटी ट्वेंटी में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 13 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर नेशनल सेलेक्टर्स को इंडिया टीम में जगह देने के लिए मजबूर कर दिया, उन्हें ज़िम्बाब्वे जाने वाली टीम में जगह मिल गई, श्री लंका के खिलाफ उन्होंने अपना पहला मैच खेला और अश्विन ने उसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

उनके इस पूरी कहानी में उस समय के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है. 2011 वर्ल्ड कप में धोनी ने आश्विन को विजयी टीम का हिस्सा बनाया. इतने कम समय में वर्ल्ड कप में खेलने का मौका मिला तो इसका श्रेय तो कप्तान धोनी को ही जाता है.

लेकिन जिस फॉर्मेट में वो सबसे काबिल माने जाते है उसमे खेलने का मौका उन्हें करीब डेढ़ साल बाद ही मिला, जब 6 नवंबर 2011 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ टीम में उनको जगह दी गई. नई दिल्ली में फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में अपना पहला प्रदर्शन करना, और इस पहले मौके का उन्होंने भरपूर फायदा उठाते हुए वेस्टइंडीज की दूसरी पारी में 47 रन देकर 6 विकेट झटक लिए और मेजबान टीम ने ये मैच पांच विकेट से जीत ली. अपने पहले टेस्ट मैच में 5 विकेट लेने वाले वो सातवें भारतीय खिलाड़ी बने.  तीन मैचों की सीरीज में कुल 22 विकेट हासिल किए और यही नहीं मुंबई में  खेली गई आखिरी मैच में अपनी पहली टेस्ट सेंचुरी भी दर्ज की और मैन ऑफ द सीरीज पुरस्कार अपने नाम कर लिया. जब आगाज ही इतना शानदार था तो अंजाम का अंदाजा लगाया जा सकता है.

परफेक्ट आल राउंडर - बैटिंग में भी है दम

वैसे वेस्टइंडीज अश्विन के लिए पसंदीदा टीम रही है. अश्विन ने अपने करियर में कुल चार शतक लगाए है और वो चारों कैरेबियाई टीम के खिलाफ ही है. 2016 में सेंट लूसिया में लगाया गया शतक कठिन हालात में आया था. अब तक 54 टेस्ट मैचों में करीब 32 के औसत से 2,000 से अधिक टेस्ट रन बनाए है और यहाँ ये बताना जरूरी है की वो बैटिंग क्रम में छठे या सातवे स्थान पर आते है. उन्हें आज के विश्व क्रिकेट में शीर्ष टेस्ट ऑलराउंडर के बीच में जाने के लिए माना जाता है और वो आईसीसी टेस्ट ऑल राउंडर रैंकिंग में वो तीसरे नंबर पर है.

Cricket - India v Australia - Fourth Test cricket match - Himachal Pradesh Cricket Association Stadium, Dharamsala, India - 28/03/17 - India's Ravichandran Ashwin, who won the International Cricket Council's (ICC) Cricketer of the Year and Test Cricketer of the year award, poses with the trophies during the award ceremony. REUTERS/Adnan Abidi - RC1C21B3A470

अश्विन ने अपने स्पिन गेंदबाजी कौशल को हमेशा नया आयाम देने में लगे रहते है. उन्हें किंग ऑफ वेराइटीज भी कहा जाता है. भले ही चाइनामैन कुलदीप यादव में गेंदबाजी की कई हुनर मौजूद हो, लेकिन भारत के टेस्ट विकेटकीपर रिद्धिमान साहा मानते है की विकेट के पीछे रविचंद्रन अश्विन की ऑफ-स्पिन वेराइटीज उनके लिए हमेशा चुनौती रहती है. 2016 में 72 टेस्ट विकेट लेने वाले अश्विन को पिछले साल आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर और आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर का खिताब मिला था.

अश्विन टीम इंडिया के लिए एक धरोहर है और टीम इंडिया और बीसीसीआई को चाहिए की इस रिकॉर्ड ब्रेकर को दुसरे फॉर्मेट में भी वाजिब मौका मिले.

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