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पाकिस्तान में क्रिकेट की वापसी के लिए आगे की राह हो गई है आसान

गद्दाफी स्टेडियम में इतनी संख्या में आकर लोगों ने खिलाड़ियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं और ये बता दिया है कि आतंक कभी जीत नहीं सकता है

Neeraj Jha Updated On: Sep 14, 2017 07:32 PM IST

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पाकिस्तान में क्रिकेट की वापसी के लिए आगे की राह हो गई है आसान

पाकिस्तान को देखने के दो नजरिए हैं. एक वो जो हम हमेशा सीमा के इस पार से देखते है और दूसरा नजरिया है जब आप पाकिस्तान जाकर आम लोगों के बीच बातें करते हैं. दोनों नजरिए में जमीन आसमान का फर्क है. भारत और पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों के आम आदमियों में कोई ज्यादा फर्क नहीं दिखता है. ना पहनावे का, ना बातचीत का, ना खान पान का और ना ही मेहमानवाजी का. सबसे बड़ी बात ये है कि क्रिकेट को हमारे मुल्क में भी धर्म का दर्जा मिला हुआ है और पाकिस्तान में भी इसे पाक समझा जाता है. क्रिकेट को लेकर वहां भी लोग उतने ही जानकार है जितना कि भारत में. और शायद यही वजह है कि इतने साल क्रिकेट नहीं होने के बावजूद उनके  खेल को लेकर जुनून अभी भी बना हुआ है.

क्रिकेट की वापसी

पाकिस्तान में लम्बे समय से क्रिकेट नहीं हो पा रहा था. जिस घटना को कुछ आतंकी संगठनों ने 2009 में अंजाम  दिया था वो एक ग्रहण बनकर पिछले सात आठ साल से पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर साये की तरह मंडरा रहा था. पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात में अपने सारे मैच खेलने पड़ रहे थे.

2015 में एक बार ज़िम्बाब्वे को आमंत्रित कर यहां क्रिकेट कराने का प्रयास किया गया लेकिन उसका कोई ज्यादा फायदा मिला नहीं.

इस बार जब पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को 180 रनों से मात दी, उसके बाद से ही पाकिस्तान में क्रिकेट को वापस लाने की सरगर्मी बढ़ गई. ये बहुत बड़ी जीत थी क्योंकि पाकिस्तान में इतने सालों से क्रिकेट नहीं होने के बावजूद खिलाड़ियों की प्रतिभा में कोई कमी नहीं आई. कई सारे नए खिलाड़ी निकलकर आ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा रहे है,  चाहे वो खुद कप्तान सरफ़राज़ अहमद हो या बाबर आज़म हो, या फिर इमाद वसीम.world x1 vs sarfaraz xi

चैंपियंस ट्रॉफी के बाद आईसीसी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ मिलकर यहां क्रिकेट कराने का जिम्मा लिया.  कई मुल्कों के खिलाड़ियों को एक टीम में लाकर वर्ल्ड इलेवन की टीम तैयार की गई. कप्तानी का जिम्मा साउथ अफ्रीका के कप्तान फाफ डूप्लेसी के हाथों में सौपा गया. इस टीम में सात मुल्कों के खिलाड़ी शिरकत कर रहे हैं लेकिन बीसीसीआई ने भारत की तरफ से इस टीम में अपना कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा. आईसीसी के डायरेक्टर ने सिक्योरिटी का पूरा जायजा लेने के बाद  वर्ल्ड सीरीज के तीन मैचों को हरी झंडी दे दी और चार दिन के अंदर तीन मैचों की श्रृंखला रखी गई.

पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज वक़ार यूनुस मानते हैं की वर्ल्ड सीरीज ने सारे दरवाजे खोल दिए हैं. लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में दिन में भी इतनी संख्या में आकर लोगों ने खिलाड़ियों के हौसले बुलंद कर दिए है और ये बता दिया है कि आतंक कभी जीत नहीं सकता है. उन्होंने बताया कि इस बार पीएसएल फाइनल के लाहौर में होने से माहौल बदला था.

वहीं वसीम अकरम ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने शुरुआती दौर में पाकिस्तान के क्रिकेट ग्राउंड्स पर रहकर ही पुराने क्रिकेटर्स से बहुत कुछ सीखा है और अच्छी बात ये है कि अब नई पीढ़ी को भी आगे ऐसा मौका मिलता रहेगा.

फैंस का जज्बा

लाहौर में क्रिकेट होने की खबर के बाद से ही क्रिकेट के चाहने वालों में इसको लेकर सरगर्मी बढ़ गई. लाहौर के हर चौक चौराहे पर आपको इसकी झलक मिल जाएगी. हर तरफ क्रिकेट के पोस्टर्स और बैनर्स आम हैं. इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद लोगों में इस मैच को देखने के लिए होड़ लगी हुई है. पहले मैच में लगभग 20,000 लोग ऐसे खिलाड़ियों को देखने के लिए स्टेडियम में उतर आए, जिन्होंने शायद इस से पहले इन खिलाड़ियों को केवल टीवी स्क्रीन पर ही देखा था. हर अखबार और टीवी चैनल्स ने बुलेटिन में क्रिकेट के लिए पर्याप्त जगह बनाई थी. टिकटों की कीमतें काफी ऊपर रखी गई थी, अधिकतम 8,000 रुपए. लेकिन फैंस पर इसका भी कोई असर नहीं पड़ा. हर दिन मैच में स्टेडियम खचाखच भड़ा रहा.

फैंस तो फैंस, स्पोंसर्स ने भी इस खेल से जुड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ा. लोकल उबर कंपनी ने घोषणा की कि वह दर्शकों को 111 रुपए के फ्लैट दर पर स्टेडियम में ले जाएगा.

जबरदस्त सुरक्षा

विश्व इलेवन खिलाड़ियों को जारी श्रृंखला के लिए हेड -ऑफ-स्टेट जैसी सुरक्षा प्रदान की गई है. हालांकि गद्दाफी स्टेडियम ने मैचों के लिए क्रिकेट के प्रेमियों को बहुत कड़े सुरक्षा संबंधी कठोरता से गुजरना पड़ा. पीसीबी के चीफ नजम सेठी मानते है कि  'अभी हम कोई भी जोखिम नहीं उठा सकते, हमें पता है कि विश्व XI मैचों के लिए लागू की गई सुरक्षा योजना लोगों के लिए असुविधा पैदा कर रही है. लेकिन जैसे जैसे क्रिकेट मुल्क में बढ़ेगा स्थितियां सामान्य  जाएंगी. लेकिन टीमों या हमारे खिलाड़ियों की सुरक्षा अहम् है और उससे कोई समझौता नहीं होगा.worl xi

लाहौर का नामी गिरामी होटल पर्ल कॉन्टिनेंटल जहां दोनों टीम और टीवी कर्मी दल रुके हुए हैं, उसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है. गौरतलब है कि आईसीसी ने अगले तीन वर्षों में पाकिस्तान में क्रिकेट के लिए सुरक्षा पर 1.1 मिलियन डॉलर का निवेश किया है.

खुल गए सारे दरवाजे

क्रिकेट की इस शुरुआत ने पाकिस्तान क्रिकेट के आगे के कई दरवाजे खोल एक साथ खोल दिए है. इस सीरीज के बाद पाकिस्तान श्रीलंका के बीच एक टी20 खेला जाएगा, हालांकि पीसीबी को अभी भी उम्मीद है कि शायद श्रीलंका बोर्ड दो टी20 के लिए राज़ी हो जाए. उसके बाद वेस्टइंडीज की टीम भी पाकिस्तान में तीन मैच की टी20 सीरीज खेलने को तैयार हो गई है. पीएसएल 2018 के आठ मैच भी लाहौर और कराची में खेले जाएंगे. आईसीसी ने भी भरोसा जताया  है कि वो दूसरी बड़ी टीमों को पाकिस्तान में खेलने के लिए बात करेगी.

पाकिस्तान में खेली जा रही इस सीरीज में कोई भी टीम हारे या जीते लेकिन क्रिकेट का यहां होना ही अपने आप में सबसे बड़ी जीत है. मानो या न मानो, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पाकिस्तान में वापस आ गया है. इस सीरीज ने एक बात तो तय कर दी है कि आतंकवादी कभी नहीं जीत सकते और क्रिकेट को पाकिस्तान से ज्यादा दिन दूर नहीं रखा जा सकता है. क्रिकेट का हर मुल्क और क्रिकेट के तमाम फैंस भी यही चाहते हैं कि पाकिस्तान में क्रिकेट होते रहना चाहिए.

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