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दूध बेचने वाले का बेटा पंकज यादव खेलेगा वर्ल्ड कप

नक्सल प्रभावित जिले से आने वाले पंकज अपनी कमाई से पिता को गाय गिफ्ट करना चाहते हैं

Updated On: Dec 05, 2017 01:14 PM IST

Brajesh Roy

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दूध बेचने वाले का बेटा पंकज यादव खेलेगा वर्ल्ड कप

कीचड़ में ही कमल खिलता है और प्रतिभा हो तो गरीबी में पल कर भी कोई बड़ा खिलाड़ी बन सकता है. झारखंड की क्रिकेट नर्सरी बहुत ही समृद्ध है. क्रिकेट के मैदान पर अपनी प्रतिभा के बल पर महेंद्र सिंह धोनी ने जो मुकाम हासिल किया वो आज किसी से छुपा नहीं हैं.

धोनी के बाद राज्य के बच्चे और युवाओं में क्रिकेट खेल के प्रति गज़ब का जुनून उभर कर सामने आया है. इसकी एक छोटी से बानगी है युवा क्रिकेटर पंकज यादव. पंकज यादव भी धोनी की तरह ही एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं जिनका चयन अंडर-19 वर्ल्ड कप क्रिकेट टीम के लिए किया गया है. आप और हम अगले साल जनवरी में फिरकी युवा गेंदबाज पंकज यादव की गेंदबाजी का कमाल देखेंगे. आपको बता दें कि पंकज यादव साधारण दूध बेचने वाले एक ग्वाले के बेटे हैं.

दूध बेचकर बेटे को बना दिया वर्ल्ड क्लास का क्रिकेटर

धोनी के पिता चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी थे और प्लंबर का काम करते थे. पंकज यादव के पिता ग्वाले हैं और घर-घर जाकर दूध बेच कर अपने परिवार का बड़ी मुश्किल से पालन कर रहे हैं. अपने बेटे के चयन की खबर मिलने के बाद गरीब पिता चंद्रदेव यादव का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है. पिता चंद्रदेव यादव आज कहते नहीं थक रहे हैं, “मैं नहीं जानता था कि एक गरीब के घर ऐसा होनहार क्रिकेटर जन्म लेगा. कल तक स्कूल से भाग कर क्रिकेट ग्राउंड में अक्सर पहुंचने की खबर मिलने पर मैं अपने बेटे पंकज को मार-पीट भी किया करता था. लेकिन बेटे के जुनून ने और क्रिकेट के प्रति उसकी लगन ने आज हमे पहचान दिला दी है.”

pankaj yadav ranchi cricketer

पंकज की मां मंजुदेवी और दोनों बहन प्रियंका, प्रतिभा की खुशियां उनके चेहरे पर साफ दिखाई पड़ती हैं. पूरा परिवार उस दिन की प्रतीक्षा में है कि जब मैदान पर अपनी उंगलियों का जादू दिखाते हुए पंकज विकेट चटकाएंगे. परिवार के लोग रांची में बैठ टीवी स्क्रीन पर अपने लाल की मैच का भरपूर आनंद उठाएंगे.

शेर्न वार्न की तरह बॉलिंग तो धोनी की तरह कूल

अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए चयनित होने पर पंकज बेहद खुश हैं. अपनी मां, अपने पिता और अपने कोच युक्ति नाथ झा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए युवा क्रिकेटर की आंखे बार-बार नम हो जाती हैं. पंकज ने कहा, “एक गरीब ग्वाले का बेटा हूं, जुनून का पक्का हूं और क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है. मैं वर्ल्ड कप में अपना बेस्ट दूंगा. अपने कोच झा सर और मां बाबूजी के साथ पूरे देश का नाम रौशन करूंगा.” स्लिम फिगर वाले युवा क्रिकेटर पंकज यादव ने अपने आदर्श के तौर पर विख्यात औस्ट्रेलियन बॉलर शेन वार्न का नाम लिया. पंकज ने कहा, “मै शेन वार्न की बॉलिंग से बेहद प्रभावित हूं और उन्हे ही अपना आदर्श मानता हूं. लेकिन मेरे ओवरऑल हीरो धोनी भइया हैं. मै उनकी तरह ही क्रिकेट को पढ़ना और खेलना चाहता हूं.”

क्रिकेट की कमाई से बहनों की शादी और बाबूजी को गाय

अपने परिवार की गरीबी को भली भांति समझते हुए पंकज यह भी कहते हैं कि मेरे ऊपर ही बड़ी बहन प्रियंका और छोटी बहन प्रतिभा के ब्याह की जिम्मेवारी है. बाबूजी ने बहुत गरीबी देखी है मैं उन्हे और परेशान नहीं होने दूंगा. क्रिकेट में रुपया कमाऊंगा तो बाबूजी को एक बढ़िया दूध वाली गाय गिफ्ट में दूंगा और बहनो की शादी कराऊंगा. गौरतलब है कि पंकज के पिता चंद्रदेव यादव झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित जिले पलामू के पांकी गांव से आते हैं.

पिता के साथ पंकज यादव

कोच के साथ पंकज यादव

माओवादी नक्सलियों के आतंक से डरे सहमे चंद्रदेव यादव अपने परिवार के साथ आज से लगभग 20 साल पहले रांची के कांके में आ बसे थे. किराए के मकान में रहकर और घर-घर जाकर दूध दुह कर किसी तरह चंद्रदेव यादव ने रांची में जीवन यापन करना शुरू किया था. आध्यात्मिक प्रवृति के बेहद सीधे और सरल इंसान चंद्रदेव यादव को कांके ब्लॉक चौक के लोगो ने दिल में बसा लिया. लोगो से सहयोग और अपनी आमदनी जोड़ते हुए पंकज के पिता ने फिर तीन कमरो का अपना एक घर यहीं पर बना लिया. आज चंद्रदेव यादव के पास खुद की तीन गाय अपनी है. युवा क्रिकेटर पंकज ने हमेशा अपने बाबूजी की मेहनत और गरीबी को बहुत करीब से देखा, महसूस किया है. यही वजह है कि पंकज के मन में अपने बाबूजी और परिवार के लिए अनुकरणीय भाव हैं.

रातो रात अपने गांव का स्टार

जी हां, यह बिलकुल सही है कि रांची कांके ब्लॉक चौक के निकट शिव टोली गांव में युवा क्रिकेटर रातो रात स्टार बन गया. जैसे ही अंडर-19 वर्ल्ड कप क्रिकेट टीम के लिए पंकज के चुने जाने की खबर आयी मिलने जुलने वालों का तांता घर पर लग गया. अपनी हैसियत और वर्तमान माली हालत की परवाह न करते हुए पिता चंद्रदेव यादव भी लोगों को खूब मिठाई खिला रहे हैं. माँ मंजु देवी सबको चाय जरूर पिला रही हैं. गांव में साथ रह रहे पड़ोसी भी खुश हैं कि उनके गांव को अब लोग पंकज यादव के कारण जानने लगे हैं.

pankaj yadav father

14 जनवरी 2018 है बेहद खास

पंकज अपने घर से एक-दो दिन में बंगलुरु के लिए निकल जाएंगे. जहां 8 से 22 दिसंबर तक ट्रेनिंग कैंप में रहेंगे. अगले साल की 14 जनवरी उनके लिए बेहद खास है. लेग स्पिनर गुगली बॉलर पंकज रोमांचित होकर कहते हैं, “14 जनवरी को पहला मैच ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के साथ होना है. प्लेईंग 11 में मुझे मौका मिला तो मैं अपने चयन को साबित कर दिखाऊंगा. मेरे कोच झा सर और झारखंड सहित पूरे देश की उम्मीद पर मुझे खरा उतरना ही होगा.” चलिये धोनी के शहर रांची के इस युवा क्रिकेटर पंकज यादव को आप और हम सब शुभकामनायें दें कि देश के लिए खेले और खूब खेले.

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