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आज का दिन, 17 मार्च, 1996 विश्व कप फाइनल : श्रीलंका का सपना हुआ था सच

अरविंद डी सिल्वा ने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली

Sachin Shankar Updated On: Mar 17, 2018 09:50 AM IST

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आज का दिन, 17 मार्च, 1996 विश्व कप फाइनल : श्रीलंका का सपना हुआ था सच

गद्दाफी स्टेडियम, लाहौर, 17 मार्च 1996. जिस क्षण अर्जुन रणतुंगा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विजयी रन के लिए बल्ला घुमाया, उनके मन में आया, “लोग कहते हैं कि जन्मभूमि का कर्ज उतारना पड़ता है और मुझे लगता है कि हमने इस जीत के साथ वह कर दिया. अब मैं खुशी-खुशी मर सकूंगा.“ श्रीलंका ने पहली बार विश्व कप का खिताब हासिल किया. भारत और पाकिस्तान के बाद श्रीलंका खिताब जीतने वाला तीसरा एशियाई देश बना. कप्तान अर्जुन रणतुंगा के नेतृत्व में श्रीलंका पहला ऐसा आयोजक देश बना जिसने विश्व कप खिताब जीता हो.

दो मैचों में बिना खेले जीत गया था श्रीलंका

1996 क्रिकेट विश्व कप का आयोजन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से किया था. इस विश्व कप में 12 देशों ने हिस्सा लिया था. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और केन्‍या ने पहली बार विश्व कप में भाग लिया. टीमों को छह-छह के दो ग्रुपों में बांटा गया था. इसी विश्व कप से तीसरे अंपायर की भी भूमिका शुरू हुई. इस विश्व कप में श्रीलंका में होने वाले मैचों को लेकर विवाद भी हुआ था. मालूम हो कि विश्व कप के कुछ दिन पहले तमिल विद्रोहियों के हमले में 90 लोग मारे गए थे.

This photo dated March 18 1996 shows Sri lankan cricket captain Arjuna Ranatunga being garlanded and welcome when they returned home with the Cricket World Cup by beating Australia in the finals.  AFP PHOTO /Sena Vidanagama/aj / AFP PHOTO / SENA VIDANAGAMA

तमिल विद्रोहियों की वजह से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में जाकर मैच खेलने से इनकार कर दिया. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इन दोनों मैच का विजेता श्रीलंका को घोषित कर दिया था. श्रीलंका को इसका लाभ मिला और ग्रुप में उसकी टीम शीर्ष स्थान पर रही. इसके अलावा भारत और श्रीलंका के बीच कोलकाता के ईडन गार्डेंस में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में दर्शकों के हुड़दंग के कारण आईसीसी ने श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया था. भारत और श्रीलंका का मैच काफी नाटकीय रहा. एक लाख से ज्यादा संख्या में मौजूद दर्शक भारत की तय मानी जा रही हार पचा नहीं पाए और हुडदंग पर उतर आए. श्रीलंका के 252 रनों के जवाब में भारत ने 120 रन पर अपने आठ विकेट गंवा दिए थे.

ऑस्ट्रेलिया की मजबूत चुनौती थी श्रीलंका के सामने

फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में श्रीलंका से हुआ. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए मार्क टेलर के 74 रनों की मदद से 241 रन बनाए, लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुकसान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया. लेकिन इतने एकतरफा फाइनल की किसी ने कल्पना नहीं की थी. किसी भी विश्व कप फाइनल में एक खिलाड़ी ने इतना दमखम नहीं दिखाया था, जैसा कि इस फाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दिखाया. उन्होंने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली.

arjun ranatunga

श्रीलंकाई क्रिकेट के इतिहास के पन्ने पलटते ही आप जान जाएंगे कि विश्व कप में जीत किसी तुरत फुरत रणनीति कामयाबी नहीं बल्कि सूझबूझ की एक निरंतर प्रकिया का नतीजा है. अर्जुन रणतुंगा ने जीत के बाद कहा था कि हम लिफ्ट से सीधे 15वीं मंजिल तक नहीं पहुंचे. सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़े और नतीजा सबके सामने हैं. 1996 में श्रीलंकाई टीम के अभियान का सुंदर अंत हुआ. साथ ही यह अहसास करा गया कि श्रीलंका क्रिकेट को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता.

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