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आज का दिन, 8 मार्च: आज ही के दिन हो गया था तय, संन्यास लेने वाले हैं द्रविड़

बीसीसीआई ने कहा था कि राहुल द्रविड़ नौ मार्च को प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं, इस बात से ही अंदाजा लग गया था कि खराब फॉर्म से जूझने वाले द्रविड़ संन्यास ले रहे हैं

Updated On: Mar 08, 2018 04:40 PM IST

FP Staff

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आज का दिन, 8 मार्च: आज ही के दिन हो गया था तय, संन्यास लेने वाले हैं द्रविड़

भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ अनुशासन, सादगी और भरोसे का दूसरा नाम रहे हैं. पहले एक खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर और अब कोच के तौर पर. अपने आखिरी सीरीज में राहुल को फॉर्म के कारण बेहद संघर्ष करना पड़ा. इसके बाद 2012 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया.

उस साल  में आज ही के दिन यानी 8 मार्च को दुनिया भर के क्रिकेट फैंस को इस बात का विश्वास हो चुका था कि राहुल टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले हैं. आठ मार्च 2012 को पूरा देश होली का त्यौहार मना रहा था. तभी बीसीसीआई की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी की गई. प्रेस रिलीज में कह गया कि नौ मार्च को नेशनल बोर्ड प्रेसीडेंट श्रीनिवासन की मौजूदगी में राहुल द्रविड़ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं. इस बात से ही यह अंदाजा लग गया था कि राहुल द्रविड़ संन्यास लेने वाले हैं, और हुआ भी यही.

निराशाजनक रहा था  2011-12 का ऑस्ट्रेलिया दौरा 

ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटने के बाद द्रविड़ ने संन्यास लेने के संकेत दिए थे. द्रविड़ का ऑस्ट्रेलिया दौरा बेहद खराब रहा था. इसमें उन्होंने 8 पारियों में 24 .25 की खराब औसत से सिर्फ 194 रन बनाए थे. सबसे ज्यादा निराश करने वाली बात यह रही थी कि 8 में से 6 बार द्रविड़ क्लीन बोल्ड हो गए थे.

RahulDravidTestDefense_AFP

द्रविड़ ने संन्यास लेते वक्त कहा, यह संन्‍यास लेने का सही समय था. उन्‍होंने यह भी सफाई दी कि यह फैसला मुश्किल था, लेकिन उन्‍होंने किसी एक सीरीज को ध्‍यान में रख कर यह निर्णय नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि अब युवाओं को मौके की जरूरत है, उनकी बारी है कि वे आएं और इतिहास बनाएं.

द्रविड़ ने 164 टेस्ट मैचों के अपने शानदार करियर में 52.31 का औसत निकाला और 36 शतक के साथ 63 अर्धशतक बनाए. इसके अलावा उन्होंने 210 कैच लपक कर वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था. पूर्व भारतीय कप्तान द्रविड़ का वनडे करियर 2008 में लगभग समाप्त हो गया था.

दोनों तरह की क्रिकेट में 10000 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज होने के अलावा द्रविड़ को हमेशा एक टीम खिलाड़ी के रूप में याद किया जाता है जो टीम की जरूरत के हिसाब से किसी भी क्रम में खेले लेते थे और जरूरत पड़ने कोई भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार रहते थे.

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