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कोलकाता-धर्मशाला की जिल्लत भूल जाइए, भविष्य सुनहरा और सुरक्षित है टीम इंडिया का

एफटीपी के तय कार्यक्रम के अनुसार 2019 से 2023 के बीच भारत ज्यादातर मैच भारत में ही खेलने हैं

Updated On: Dec 11, 2017 12:08 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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कोलकाता-धर्मशाला की जिल्लत भूल जाइए, भविष्य सुनहरा और सुरक्षित है टीम इंडिया का

बर्फ से ढके धौलाधार पर्वतों की गोद में बसे धर्मशाला में रविवार को अच्छी ठंड थी. हिमाचल प्रदेश क्रिकेट स्टेडियम के मैदान की पिच पर हल्की घास साफ देखी जा सकती थी. यह जानते हुए भी कि ठंड के मौसम में हरी घास वाली पिच पर खेलना भारतीय क्रिकेट के लिए हानिकारक रहता है, फिर भी स्टार क्रिकेटरों को घास दिखा दी गई.

महेंद्र सिंह धोनी के 65 रनों को छोड़ दिया जाए तो टीम इंडिया का स्कोर कार्ड पढ़ने में किसी का मोबाइल नंबर जैसा दिखता है. कोलकाता टेस्ट में भी यही हुआ. हरी पिच पर पहली पारी में 172 पर पूरी टीम बाहर बैठी थी.

जैसा कि कॉमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने कहा कि दिल्ली की पिच उन्हें रिंग रोड जैसी दिखाई दे रही है, टीम इंडिया ने उस पर बेधड़क रन बनाए. नागपुर में 610 रन बनाने के बाद टीम को बल्लेबाजी की जरूरत ही नहीं पड़ी.

अगले पांच सालों में ज्यादातर मैच घर पर ही खेलेगी भारतीय टीम

जाहिर है, धर्मशाला में टीम के स्कोर को देखने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह टीम अच्छी पिचों, यानी तेज गेंदबाजों के लिए उपयुक्त साउथ अफ्रीका या इंग्लैंड की पिचों पर खेलने में सक्षम हैं. सवाल जायज है. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगले 2019-2020 से पांच सालों में टीम इंडिया को विदेश में ज्यादा नहीं खेलना है.

विदेश में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या साउथ अफ्रीका ही नहीं आते. इसमें श्रीलंका, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे शामिल हैं. साफ है कि पाकिस्तान को कोई चांस नहीं दिखाई देता. बोर्ड ने जो 2019-2020 से अगले पांच साल का कैलेंडर तैयार किया किया है, उसमें उसे घर पर 19 टेस्ट और 38 वनडे खेलने हैं. विदेशी जमीं पर 18 टेस्ट और 29 वनडे खेलने का कार्यक्रम है.

Visakhapatnam: School children supporting the Indian cricket team during the 1st day of the 2nd Test cricket match against England in Visakhapatnam on Thursday. PTI Photo by Ashok Bhaumik(PTI11_17_2016_000021B)

रोचक यह देखना होगा कि 18 टेस्ट और 29 वनडे में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या साउथ अफ्रीका में कितना खेलती है. खासकर टेस्ट मैच.

धर्मशाला में भारत और श्रीलंका के बीच 156वां वनडे मैच था. किसी और टीम ने कभी एक दूसरे के साथ इतने मैच नहीं खेले हैं. यह एक रिकॉर्ड है और श्रीलंका से खेलना भारतीय क्रिकेटरों के लिए हमेशा अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने का मौका रहता है.

साफ है कि कमाई और आईसीसी व एशियन क्रिकेट काउंसिल में स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिहाज से ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या साउथ अफ्रीका की बजाय श्रीलंका व बांग्लादेश जैसी टीमों को ही प्राथमिकता देना मजबूरी है.

टीवी प्रसारण से पैसा कमाने के लिए कराई जाती हैं घरेलू सीरीज

अगले साल भारतीय टीम को ज्यादतर विदेश में ही सीरीज खेलनी हैं और इसका असर बोर्ड के खजाने पर पड़ने जा रहा है. घर पर मैच होने से टीवी प्रसारण से मिलने वाले पैसे में और इजाफा होता है. जिस तरह के बोर्ड के हालात हैं, उससे तय है कि भारत में ज्यादा क्रिकेट खेले बिना उसके खाते गड़बड़ा सकते हैं.

यही कारण है कि पांच साल के नए कैंलेंडर में ज्यादातर क्रिकेट भारत में ही खेलने का फैसला किया गया है. अरबों रुपये देकर मैचों का प्रसारण करने वाली कंपनी सीधे इसमें पार्टी है. उसका पूरा कारोबार इस बात पर टिका है कि किसी टेस्ट मैच में कितने घंटे का खेल हुआ और उसे कितने मिनट के विज्ञापन दिखाने का मौका मिला.

वनडे उसके लिए चिंता नहीं है क्योंकि वह काफी पैसे देकर जाता है. ऐसे में बोर्ड भविष्य में कोलकाता जैसी पिचों पर खेलने का जोखिम कभी नहीं लेगा. वनडे में ज्यादा दिक्कत नहीं हैं क्योंकि वे कमाई कर देते हैं. साफ है कि 2018 के बाद से भारत में पुरानी तरह की क्रिकेट देखने को मिलेगी, जिसमें सिर्फ शतक पर शतक होंगे. कोलकाता या घर्मशाला जैसा संकट नहीं दिखेगा. कुल मिला कर 2019-2020 के बाद से हमारे जंगल में सिर्फ हम ही शेर होंगे और शिकार खुद चल कर आएंगे.

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