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...अगर श्रीनिवासन की चलती तो कोहली की टीम इंडिया में एंट्री ही नहीं होती!

साल 2008 में कोहली की टीम इंडिया में एंट्री की कीमत चीफ सेलेक्टर दिलीप वेंगसरकर को अपनी कुर्सी गंवाकर चुकानी पड़ी थी

FP Staff Updated On: Oct 28, 2017 06:48 PM IST

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...अगर श्रीनिवासन की चलती तो कोहली की टीम इंडिया में एंट्री ही नहीं होती!

टीम इंडिया आज विराट कोहली की कप्तानी में कामयाबी की नई मिसाल कायम कर रही है. बतौर बल्लेबाज विराट कोहली नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं. भारतीय क्रिकेट का आज अगर कोई पोस्टर ब्वॉय है तो वह विराट कोहली ही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन विराट कोहली को टीम इंडिया में लाना ही नहीं चाहते थे और टीम में उनकी एंट्री की कीमत उस वक्त के चीफ सेलेक्टर को अपनी कुर्सी गंवाकर चुकानी पड़ी थी.

dilip vengsarkar

 

उस वक्त के चीफ सेलेक्टर रहे दिलीप वेंगसकर के हवाले से यह दावा किया गया है पत्रकार राजदीप सरदेसाई की किताब ‘डेमोक्रेसी XI’ में. समाचार पत्र डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबित उस वक्त बोर्ड के कोषाध्यक्ष रहे एन श्रीनिवासन कोहली की जगह पर तमिलनाडु के बल्लेबाज एस बद्रीनाथ को टीम इंडिया में रखवाना चाहते थे तब श्रीनिवासन तमिलनाडु क्रिकेट ऐसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे.

किताब के मुताबिक यह किस्सा साल 2008 का है. उस वक्त दिलीप वेंगसरकर चीफ सेलेक्टर थे और शरद पवार बोर्ड के अध्यक्ष थे. बतौर कोषाध्यक्ष एन श्रीनिवासन का भी बोर्ड में अच्छा खासा रुतबा था.

मार्च 2008 में टीम इंडिया को अपनी कप्तानी में अंडर 19 वर्ल्डकप जिताने के बावजूद कोहली के लिए सीनियर टीम इंडिया में एंट्री की राह मुश्किल हो रही थी. श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया का चयन होना था.

Subramnium Badrinath of the Chennai Super Kings bats on October 22, 2012 during a Champions League T20 (CLT20) match against Yorkshire at the Kingsmead stadium in Durban. AFP PHOTO / STR / AFP PHOTO / -

श्रीनिवासन, एस बद्रीनाथ को टीम इंडिया में देखना चाहते थे और कुछ सेलेक्टर्स भी उसके पक्ष में थे. लेकिन बतौर चीफ सेलेक्टर वेंगसरकर ने इस पर वीटो कर दिया और कोहली को टीम इंडिया के लिए चुन लिया गया.

वेंगसरकर का कहना है कि ‘जब श्रीनिवासन के यह बात पता चली तो वह गुस्से में आ गए और उन्होंने मेरी शिकायत शरद पवार से की. इसके अगले ही दिन मुझे चीफ सेलेक्टर के पद से हटा दिया गया. लेकिन सौभाग्यवश वह मेरे फैसले को नहीं बदल सके और कोहली की टीम इंडिया में एंट्री हो गई.’

कोहली अपने करियर के शुरूआती दिनों में कोई खास कमाल नहीं दिखा सके थे लेकिन इसके बावजूद सेलेक्टर्स का भरोसा उनपर कायम रहा. वेंगसरकर का यह भी दावा है साल 2009 में साउथ अफ्रीका में खेली गई आईपीएल के दौरान कोहली पर यह भी इल्जाम लगाए जाते थे कि वह खेल से ज्यादा अपनी हेयर स्टाइल और टैटुओं पर ध्यान देते थे. किताब में दावा किया गया है कि कोहली को समर्थन करने वालों में युवराज सिंह सबसे आगे थे.

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