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क्रिकेट बॉल हाथ में आई और वह गरीब मजदूर गांव के सबसे बड़े घर का मालिक हो गया!

मुनाफ की कहानी साबित करती है कि खेल किसी को भी बड़ा बना सकता है

Updated On: Nov 11, 2018 01:23 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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क्रिकेट बॉल हाथ में आई और वह गरीब मजदूर गांव के सबसे बड़े घर का मालिक हो गया!

असल में यह कहानी खालिस फिल्मी है. गांव के घर से हीरो टाइलों की फैक्ट्री में काम करने निकलता है. रास्ते में वह लंदन में रहने वाले गांव के रईस की आलिशान कोठी को रोज निहारता है. महज कल्पना करता है कि वह घर अंदर से कैसा दिखता होगा! फिल्म की रीलें तेजी से चलती हैं और एक दिन वह गरीब हीरो गांव का वह सबसे बड़ा घर खरीद लेता है.

यह कहानी प्रेरित करने वाली है और इस फिल्मी गाथा को क्रिकेट ने सच्ची घटना साबित किया है. मुनाफ पटेल की जिंदगी में ऐसे न जाने कितने ही सीन हैं जो फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगते हैं. मुनाफ ने अब और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेलने का फैसला किया है लेकिन यह नाम गांव-देहात के उन युवाओं के लिए दिलों-दिमाग में भरोसा भरने का काम हमेशा करता रहेगा जो कुछ करना चाहते हैं, बनना चाहते हैं.

इखर गांव में बसता है मुनाफ का दिल 

कुछ साल पहले इस लेखक को मुंबई-वडोदरा हाई-वे पर बसे मुनाफ के गांव इखर जाने का मौका मिला. करीब 10 हजार आबादी वाले मुस्लिम बहुल इखर के कई हिस्सों में अब भी पक्की सड़क नहीं थी और जो सड़के थी भी, उन पर बड़े-बड़े खड्डे हावी थे. लेकिन मुनाफ का वह आलीशान घर सबसे अलग और आकर्षित करने वाला था. गांव में मुनाफ यारों के यार हैं. टेस्ट क्रिकेटर बनने के बाद भी गांव वाला मुनाफ बदला नहीं. बचपन के दोस्तों पर भरोसा इतना कि 25000 स्केवयर फुट प्लॉट पर बने उस आलीशान घर को नया रूप देने की जिम्मेदारी मुनाफ ने अपने दोस्त सिराज भाई को सौंप रखी थी.

munaf

बताते हैं कि सिराजभाई और मुनाफ बचपन से जब भी इस घर के बाहर से गुजरते थे तो निहारते ही रहते थे. लेकिन कभी सपने में भी नहीं सोचा कि एक दिन मुनाफ ने लंदन के फारुख भाई से वह घर खरीद लेगा. भारतीय टीम से फुरसत मिलती तो मुनाफ गांव में वहीं पहुंच जाते टेनिस बॉल से खेलने, यहां से उसकी जिंदगी ने करवट लेनी शुरू की थी.

अलीशान घर में बनेंगे नेट और पिच

इखर के इस अनुभव के कुछ दिन बाद उनके गांव की यात्रा के बारे में बताया गया तो विनम्र मुनाफ ने कहा कि उन्हें सिराज भाई से पता लगा. फिर कहा, सर आप बातइए, कैसा लगा आपको मेरा घर! फिर मुनाफ बताते हैं कि साथ लगे एक बड़े प्लॉट को खरीदने के बारे में भी बात हो रही है. सवाल किया गया कि इतने बड़े घर का वह क्या करेंगे. मुनाफ का जवाब था कि वह अपने घर में पिचें और नेट बनाएंगे.

2011 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे बेहद ही क्लीन व स्मूथ एक्शन वाले पेसर मुनाफ ने 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ मोहाली में स्टारों भरी टीम में धमाकेदार टेस्ट डेब्यू किया था. मुनाफ ने उस मैच में 97 रन देकर सात विकेट लिए जो कि उस समय पहला टेस्ट खेल रहे किसी भी भारतीय का श्रेष्ठ प्रदर्श था.

India's bowling coach Venkatesh Prasad (R) speaks with Munaf Patel during a practice session in the southern Indian city of Chennai December 10, 2008. India will play their first test cricket match against England on Thursday in Chennai. REUTERS/Punit Paranjpe (INDIA) - GM1E4CA18WI01

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मुनाफ ने कहा कि क्रिकेट के बाद की जिंदगी के बारे में सोचना उनके लिए थोड़ा मुश्किल भरा होगा लेकिन उन्हें किसी तरह का कोई शिकवा नहीं है क्योंकि जितने भी क्रिकेटरों ने उनके साथ खेले हैं, वे रिटायर हो चुके हैं. सिर्फ धोनी ही बचे हैं. हां, अगर बाकी साथी अब भी खेल रहे होते और उन्हें रिटायरमेंट लेनी पड़ती तो शायद थोड़ा दुख होता. मुनाफ जिस सादगी से भारतीय क्रिकेट में आए थे, उसी सादगी के साथ अलविदा कह कर गए हैं. किसी फिल्म के मुख्य किरदार की तरह उनके लिए भी हैपी एंडिग रही है.

मुनाफ की कहानी साबित करती है कि खेल किसी को भी बड़ा बना सकता है. अगर वह क्रिकेटर हो तो करोड़पति भी. हर सपने को पूरा कर सकता है. इखर में मुनाफ का घर भविष्य की ऐसी न जाने कितनी पटकथाओं की नींव की तरह है जो दिखाता है कि कुछ भी असंभव नहीं.

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