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पांड्या विवाद पर बोले पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान, कहा- भारतीय टीम का जरूरी हिस्सा हैं वह

क्लार्क ने कहा कि पांड्या केवल अपनी बल्लेबाजी से मैच जिता सकते हैं

Updated On: Jan 20, 2019 02:59 PM IST

Bhasha

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पांड्या विवाद पर बोले पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान, कहा- भारतीय टीम का जरूरी हिस्सा हैं वह

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क को पूरा भरोसा है कि इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप में हार्दिक पांड्या अपनी अहम भूमिका निभाएंगे. एक टीवी शो में महिलाओं पर विवादित बयान देने के कारण निलंबित चल रहे पांड्या पर क्लार्क ने अपनी राय रखते हुए कहा कि पांड्या जैसे खिलाड़ी टीम में संतुलन बनाने के लिए बेहद जरूरी है. पीटीआई से बात करते हुए क्लार्क ने कहा कि पांड्या केवल अपनी बल्लेबाजी से मैच जिता सकते हैं और विश्वास है कि वह विश्व कप टीम का हिस्सा होंगे.

Virat Kohli is named the @GilletteAU Player of the Match for his terrific ton in the run chase

वहीं कप्तान विराट कोहली के लिए क्लार्क का मानना है कि कोहली वनडे क्रिकेट में कोहली सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं. क्लार्क ने पीटीआई से कि भारत के लिए उन्होंने जो कुछ हासिल किया उसको देखने के बाद मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है. कोहली ने अब तक 219 वनडे में 10 हजार 385 रन बनाए हैं, जिसमें 39 शतक शामिल हैं. उनका औसत 59 से भी अधिक है.पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान क्लार्क ने कहा कि कोहली ने जुनून का कोई जवाब नहीं हैं. उन्होंने कहा कि आपको अपने देश के लिए जीत दर्ज करने के विराट के जुनून का सम्मान करना होगा. हां उसमें आक्रामकता है लेकिन कोई भी उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठा सकता. वह वनडे में सर्वश्रेष्ठ है.कोहली जहां लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं वहीं पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की वर्तमान लय को लेकर क्रिकेट जगत की राय भिन्न है.

धोनी अब वनडे में पहले की तरह आक्रामक शैली से नहीं खेलते हैं, लेकिन क्लार्क का मानना है कि इस 37 वर्षीय पूर्व भारतीय कप्तान को अपना खेल खेलने के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए. क्लार्क ने कहा कि धोनी जानते हैं कि किस परिस्थिति में किस तरह से खेलना है. उन्होंने 300 से अधिक वनडे खेले हैं, इसलिए वह जानते हैं कि अपनी भूमिका कैसे निभानी है. लेकिन अगर तीसरे वनडे में लक्ष्य 230 के बजाय 330 होता तो क्या धोनी प्रभावशाली होते? इस सवाल के जवाब में क्लार्क ने कहा कि मुझे लगता है कि वह फिर अलग तरह से बल्लेबाजी करते. लक्ष्य 230 रन का था और उनकी रणनीति इसी के अनुकूल थी और अगर लक्ष्य बड़ा होता तो उनकी रणनीति भिन्न होती.

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