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खेलों में सट्टेबाजी: अगर धृतराष्ट्र बनकर फैसला लिया तो भारतीय खेलों का 'चीरहरण' हो जाएगा!

खेलों में सट्टेबाजी को लीगल करने से होने वाले नुकसान की भरपाई करना मुमकिन नहीं होगा

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Jul 07, 2018 12:42 PM IST

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खेलों में सट्टेबाजी: अगर धृतराष्ट्र बनकर फैसला लिया तो भारतीय खेलों का 'चीरहरण' हो जाएगा!

पहली बात, देश के लॉ कमीशन के चेयरमैन बलबीर चौहान ने सरकार को दी अपनी रिपोर्ट में खेलों में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश नहीं की है.देश के कुछ प्रमुख अखबारों ने इस बाबत उनकी रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि लॉ कमीशन इसके हक में है.

लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में महज इतना कहा है कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें खेलों में सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने के बारे में सोच रहे हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए! वैसे भाषा काफी कन्फ्यूज करने वाली है लेकिन सीधे शब्दों में कमीशन की बात को समझें तो उसने अपनी रिपोर्ट में खेलों में सट्टेबाजी को लीगल करने के किसी भी सोच पर आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे के जरूरी इसेतमाल का अंकुश लगाने की सलाह दी है.  महाभारत के दिनों में सट्टेबाजी, द्रोपदी पर दांव और उसके चीरहरण का भी जिक्र है.

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2013 में आईपीएल के फिक्सिंग कांड की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई  2016 के अपने फैसले में कहा था कि यह संसद को तय करना है कि देश में खेलों में सट्टेबाजी को मान्यता मिलनी चाहिए या नहीं.

उसके बाद सरकार ने लॉ कमीशन को इस बारे में अपनी रिपोर्ट देने को कहा था.

दूसरी बात, अगर सरकार ऐसी किसी सिफारिश पर विचार भी कर रही है तो यह देश उसके लिए कतई तैयार नहीं है.

क्यों आत्मघाती होगा यह फैसला!

भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट और बाकी खेलों के खिलाड़ियों के बीच कमाई के लिहाज से हिंद महासागर जैसा विशाल अंतर है, सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने से भ्रष्टाचार में इजाफे से कोई नहीं रोक सकता.

जो भी टैक्स से होने वाली अरबों की कमाई का हवाला देकर खेलों में सट्टेबाजी को मान्यता की वकालत कर रहे हैं या सोचते हैं कि इससे खेलों से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, उन्हें इटली के टेनिस स्टार और इस बार के फ्रेंच ओपन के फाइनलिस्ट मार्को चेचिनाटो की कहानी गूगल पर सर्च कर जरुर पढ़नी चाहिए.

टेनिस की यह कहानी जरूर जान लें

मार्को पर 2015 में मैच फिक्सिंग के आरोप लगे. जांच में दावा किया गया कि उसने अपने बचपन के दोस्त रिकॉर्डो अकार्डी के साथ मिल कर मोरक्को के चैलेंजर टूर्नामेंट में अपने एक मैच बेच दिया.

Marco Cecchinato

जांच में दावा किया गया कि मार्को को पैसा चाहिए था. इसलिए उसने उस टूर्नामेंट में रैंक में 338वें खिलाड़ी कमाल मेजरजॉक के खिलाफ सेमीफाइनल हारने का फैसला किया.

इटली में सट्टेबाजी को मान्यता प्राप्त है और उसमें होने वाली जालसाजियों के पकड़ने के लिए जांच संस्था भी है. उसी की जांच में सामने आया कि सेमीफाइनल में मेजरजॉक की जीत पर सिर्फ दो ही व्यक्ति इटली में सट्टा लगा रहे थे बाकी सभी मार्कों के पक्ष में पैसा लगा कर बैठे थे. वह दो व्यक्ति अकार्डी और उसके पिता थे.

क्या हो सकता है अंजाम

यह सही है कि भारत में क्रिकेट में काफी पैसा है लेकिन इसके बावजूद मैच फिक्सिंग हुई और खिलाड़ियों की गिरफ्तारियां हुईं.

अब कल्पना कीजिए हॉकी, कुश्ती, फुटबॉल या बॉक्सिंग जैसे खेलों के बारे में.

मान लीजिए कि भारत में सट्टेबाजी को मान्यता मिल जाती है तो बुकियों के लिए गरीब खिलाड़ियों को मेडल भूल कर सुनहरे भविष्य के मद्देनजर पैसा कमाने को तैयार कर लेना कोई मुश्किल बात नहीं होगी. डोपिंग इन हालात को सबसे बड़ा उदाहरण है.

हर साल कई टॉप खिलाड़ी डोपिंग में फंस रहे हैं. कड़ी सजा के बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. ऐसा क्यों हो रहा है! इसकी तह में जाना जरुरी है.बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल और खिलाड़ियों के बेहतर भविष्य के सपने के बीच सीधा संबंध है.

सभी को अंदाजा है कि एक अंतरराष्ट्रीय, ओलंपिक या एशियाई खेलों को पदक उनके लिए खजाना खोल सकता है और सरकारी अर्जुन अवॉर्ड मिलता है वह अलग.

राष्ट्रीय स्तर पर पदक नौकरी दिलाने में मददगार होता है. इसलिए खिलाड़ी डोपिंग को वहां तक पहुंचने का जरिया बना रहे हैं. इसलिए यह दावा करना गलत होगा कि कई खिलाड़ी मोटी रकम से इनकार कर पाएंगे.

इसलिए सट्टेबाजी को अमलीजामा पहनाने की कोई भी सोच पहले से ही पंगु भारतीय खेलों को तबाह करने की तरफ पहला और आखिरी कदम होगा.

धृतराष्ट्र के उस दौर में द्रोपदी का चीरहरण होकर भी नहीं हुआ था लेकिन सट्टेबाजी को मान्यता भारतीय खेलों को तबाह कर देगी.

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