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कोहली ने कहा, क्रिकेट मेरे खून में है और वापसी करना मेरे लिए मुश्किल नहीं होगा

भारतीय कप्तान बोले-दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम को किसी को कुछ साबित नहीं करना है

FP Staff Updated On: Dec 27, 2017 09:55 PM IST

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कोहली ने कहा, क्रिकेट मेरे खून में है और वापसी करना मेरे लिए मुश्किल नहीं होगा

उपमहाद्वीप से बाहर टेस्ट जीतना भारतीय टीम की दुखती रग रहा है, लेकिन कप्तान विराट कोहली ने साफ तौर पर कहा है कि पांच जनवरी से शुरू हो रहे दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम को किसी को कुछ साबित नहीं करना है. श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने के बाद विराट कोहली क्रिकेट से ब्रेक पर थे, इस दौरान वह शादी कर एक बार फिर टीम के साथ लौटे हैं। इस ब्रेक के बाद वापसी के सवाल पर विराट ने कहा, 'क्रिकेट मेरे खून में है और ऐसे में वापसी करना मेरे लिए मुश्किल नहीं होगा.'

कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 610 रन बनाए. उन्होंने कहा कि ब्रेक के दौरान भी वह दक्षिण अफ्रीका के कड़े दौरे के लिए तैयारियां करते रहे. कोहली ने कहा, ‘मैंने पिछले तीन सप्ताह में कुछ नहीं किया. आप कहीं न कहीं यह सोच रहे होते हो कि आगे कुछ महत्वपूर्ण होगा और इस तरह से आप उसकी तैयारियां करते रहते हो. इसलिए मानिसक तौर पर मैं अच्छी तरह से तैयार हूं.’

कोहली ने बुधवार को मुंबई में टीम की रवानगी से पहले प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘हमने विदेश दौरे और लोगों को कुछ साबित करने के तमाम मानसिक तनावों से पार पा लिया है. हमें किसी को कुछ साबित नहीं करना है और हमारा काम वहां जाकर अपना शत प्रतिशत देना है ताकि मनचाहे नतीजे मिल सकें.’

हमें यथार्थवादी होना पड़ेगा

कप्तान ने कहा कि सभी को यथार्थवादी होना चाहिए कि कई बार टीम जीतेगी और कई बार नहीं. उन्होंने कहा, ‘हमें यथार्थवादी होना पड़ेगा. वर्तमान में जीते हुए अपनी रणनीति पर अमल करना होगा. हम वहां क्रिकेट खेलने जा रहे हैं और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दक्षिण अफ्रीका में हैं, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या भारत में,’

भारत ने पिछले 25 साल में दक्षिण अफ्रीका में एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीती है जिसकी शुरुआत 1992 से हुई.  दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों पर भारत ने सिर्फ दो टेस्ट जीते हैं. सबसे अच्छा नतीजा 2010- 11 में मिला था जब भारत ने 1-1 से ड्रॉ खेला था.

मानसिक रूप से करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना

कोहली ने कहा, ‘ सफलता इस पर निर्भर करती है कि बतौर बल्लेबाज आप किस मानसिकता से खेलते हैं. भारतीय हालात में भी कठिनाई हो सकती है. क्रिकेट बल्ले और गेंद से खेला जाता है और यदि आप मानसिक रूप से वहां नहीं हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किन हालात में खेल रहे हैं. आपको चुनौतियों का मानसिक रूप से सामना करना पड़ेगा और फिर हर हालात घरेलू हालात जैसे लगेंगे. अगर आप जहां खेल रहे हैं, वहां के अनुकूल खुद को ढाल लेते हैं तो सहज महसूस करने लगेंगे. लोगों और संस्कृति को अपनाकर बेहतर लगने लगेगा.’

दक्षिण अफ्रीका की चुनौती का है इंतजार

जोहानसबर्ग में 2013- 14 के दौरे पर कोहली ने शतक जड़ा था और इसका श्रेय वह चुनौती का सामना करने के जीवट को देते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने दक्षिण अफ्रीका में एक ही बार टेस्ट क्रिकेट खेला था, लेकिन मुझे इसका इंतजार है. चेतेश्वर पुजारा ने भी वहां खेला है और अजिंक्य रहाणे ने भी. हमने अच्छा प्रदर्शन किया, क्योंकि हम चुनौती का सामना करने को लेकर रोमांचित थे.’ उन्होंने स्वीकार किया कि उपमहाद्वीप के बाहर पिछले कुछ अर्से में वे ज्यादा नहीं खेल सके हैं, लेकिन मौजूदा खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन का यकीन है.

उन्होंने कहा, ‘हर दौरा एक मौका होता है. अगर आप उन टीमों को देखें जो अतीत में दक्षिण अफ्रीका गई हैं तो आप भारतीय क्रिकेट के कुछ बड़े नामों की बात करेंगे. ऐसा नहीं है कि वह मौका नहीं था. आपको सीरीज जीतने के लिए लंबे समय में अच्छा खेलना होता है और हम यही करने जा रहे हैं.’

(एजेंसी इनपुट के साथ)

 

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