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आईपीएल ऑक्शन 2018: गुमनामी के अंधेरे में खोने वाले आईपीएल स्टार

आईपीएल में ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं जो एक सीजन में शादार खेल दिखाकर सुर्खियों में आए और फिर खो गए

Manoj Chaturvedi Updated On: Jan 25, 2018 10:28 AM IST

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आईपीएल ऑक्शन 2018: गुमनामी के अंधेरे में खोने वाले आईपीएल स्टार

इंडियन प्रीमियर लीग ने तमाम स्टार बनाए हैं और उन्हें मालामल भी किया है. पर कई बार ऐसा भी हुआ है कि कोई खिलाड़ी एक-दो सीजन में सुर्खियों में रहने की वजह से सभी के बीच चर्चा का विषय रहता है और देखते ही देखते वह नजरों से ओझल हो जाता है. इस तरह के खिलाड़ियों में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने वाले पेस गेंदबाज कामरान खान, किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेलने वाले पाल वलथाटी, मुंबई इंडियंस के लिए सुर्खियां बटोरने वाले सौरभ तिवारी, पवन नेगी और केसी करियप्पा को खासतौर पर रखा जा सकता है. इस लीग के बारे में यह कहना सही है कि यह हीरो तो बनाती है पर हीरो से जीरो बनाने में भी देर नहीं करती है.

शेन वॉर्न का टोरनेडो कामरान

कामरान खान की हम बात करें तो यह गेंदबाज 140 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करता था. शेन वॉर्न की टीम ने 2009 के सत्र में 12 लाख रुपए में जब कामरान को खरीदा था, तो लगा था कि इस खिलाड़ी की दुनिया ही बदल गई है. तमाम मौकों पर प्लेटफॉर्म पर सोने वाले इस गेंदबाज को दूसरा सत्र दक्षिण अफ्रीका में होने पर पंच तारा होटल में ठहराया गया, तो उसे वहां नींद ही नहीं आई थी क्योंकि वह ऐसी सुविधाओं के अभ्यस्त ही नहीं थे. वॉर्न ने इस खिलाड़ी को ऐसा मांजा कि लगने लगा कि वह जरूर टीम इंडिया का स्टार गेंदबाज बनेगा. उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए नौ मैच खेलकर नौ विकेट लिए.

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शेन वॉर्न ने इस खिलाड़ी को टारनेडो का नाम दिया. पर संदिग्ध एक्शन की शिकायत होने के बाद यह गेंदबाज एकदम से गायब हो गया. आईपीएल से बाहर होने के बाद आजमगढ़ के इस क्रिकेटर ने वापसी के लिए अपनी गेंदबाजी पर बहुत मेहनत की. पिछले साल वह दिल्ली डेयर डेविल्स के शिविर में नजर भी आए पर ऐन वक्त पर दुर्घटना का शिकार होने के कारण खेल नहीं सके. सही मायनों में वह गुमनामी के अंधेरे से अब तक निकल नहीं सके हैं.

विस्फोटक अंदाज वाले वलथाटी

मुंबई के इस बल्लेबाज को किंग्स इलेवन ने नई पहचान दी. वह 2002 के अंडर-19 विश्व कप में भाग लेने वाली भारतीय टीम में इरफान पठान और पार्थिव पटेल के साथ शामिल रहे पॉल वलथाटी विस्फोटक अंदाज वाले हैं. वह पहली ही गेंद से आक्रामक रुख अपनाने में विश्वास करते हैं. लेकिन इस विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में एक गेंद आंख में लगने से उनके करियर पर विराम लग गया. 2006 में वनडे टीम में शामिल भी हुए पर कुछ खास नहीं कर सके. वह 2009 में राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल में खेले. पर वह दो साल में ना तो ज्यादा मौके पा सके और ना ही प्रभावित कर सके. लेकिन 2011 में किंग्स इलेवन पंजाब टीम में जाने से उनकी किस्मत ही बदल गई. इस साल वह 14 मैचों में 35.61 के औसत से 463 रन बनाने में सफल रहे. इस साल महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई वाली चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ प्रदर्शन को हमेशा याद रखा जाएगा. चेन्नई ने किंग्स इलेवन के सामने 189 रन का लक्ष्य रखा. यह माना जा रहा था कि किंग्स के लिए लक्ष्य तक पहुंचना संभव नहीं है. लेकिन वलथाटी ने 63 गेंद में नाबाद 120 रन की पारी से पांच गेंदें बाकी रहते अपनी टीम को छह विकेट से जीत दिला दी. वलथाटी 2012 और 2013 में भी आईपीएल में खेले पर वह सुर्खियां बटोरने में सफल नहीं रहे और क्रिकेटप्रेमियों ने इस क्रिकेटर को एकदम से भुला दिया.

रांची के दूसरे हीरो

रांची की क्रिकेट को महेंद्र सिंह धोनी की वजह से जाना जाता है. धोनी के पदचिन्हों पर चलते हुए सौरभ तिवारी ने भी एक दौर में क्रिकेट प्रेमियों को प्रभावित किया. वह हार्ड हिटर अंदाज की वजह से आईपीएल की मुंबई इंडियंस टीम में खेलने पर सभी के चहेते बन गए. वह आईपीएल के तीसरे संस्करण में 16 मैचों में 29.92 औसत से 419 रन बनाने में सफल रहे. इसमें उनके तीन अर्धशतक शामिल थे. लंबे वालों वाले सौरभ तिवारी के विकेट पर पहुंचते ही क्रिकेट प्रेमी उनसे चौकों-छक्कों की उम्मीद लगाने लगते थे. यह वह दौर था, जब माना जा रहा था कि रांची को धोनी के बाद एक और सुपरस्टार मिल गया है. लेकिन 2010 के शानदार प्रदर्शन की वजह से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर ने उन्हें 2011 में 16 लाख डॉलर में ले लिया. लेकिन यह बदलाव उन्हें रास नहीं आया क्योंकि वहां उन्हें सचिन तेंदुलकर जैसी सलाह देने वाला कोई नहीं था. वह 2011 में 16 मैचों में 187 और 2012 में भी कुछ खास नहीं कर पाने के बाद टीमें बदलते रहे. पर क्रिकेटप्रेमियों की नजरे गिरने के कारण एकदम से भुला दिए गए.

Mumbai: Mumbai Indians' player Saurabh Tiwari during a practice session for the Indian Premier League-3 in Mumbai on Wednesday PTI Photo by Shashank Parade(PTI3_24_2010_000136B)

पहाड़ से गिरने वाले नेगी

दिल्ली के लेफ्ट ऑर्म स्पिनर पवन नेगी के शुरुआती करियर में सबकुछ ठीक चल रहा था. वह गेंदबाजी के अलावा ताबड़ तोड़ अंदाज में बल्लेबाजी भी करने की वजह से 2012 में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम में शामिल हुए. उन्हें दो सालों में सिर्फ नौ मैच खेलने को मिले और वह सात ही विकेट हासिल कर सके. बल्ले से रन नहीं निकलने पर टीम के लिए उनकी अहमियत खत्म हो गई. पर 2014 में चेन्नई सुपरकिंग्स ने उन्हें ले लिया. पर यहां भी दो साल खेलकर वह सुर्खियां नहीं बटोर सके. लेकिन 2016 में डेयरडेविल्स ने उन्हें 8.5 करोड़ रुपए में खरीदकर चर्चा में लाने के साथ स्टार बना दिया. लेकिन आठ मैचों में 57 रन बनाने और एक विकेट लेने से टीम द्वारा उन्हें डंप कर दिया गया. अगले साल दिल्ली डेयर डेविल्स ने छोड़ दिया. पर 2017 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर ने उन्हें एक करोड़ रुपए में खरीद लिया. कीमत घटने के बाद वह आईपीएल में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 12 मैचों में 16 विकेट लेकर अपनी थोड़ी अहमियत बनाने में सफल हुए हैं पर चमक को एकदम से खो चुके हैं.

करियप्पा को भी लगा जोर का झटका

कर्नाटक का यह राउंड ऑर्म एक्शन वाला यह गेंदबाज 2015 में उस समय सुर्खियों में आ गया, जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 2.4 करोड़ रुपए में खरीद लिया. वह चर्चा का विषय इसलिए बने कि लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि शाहरुख की टीम ने उनमें ऐसा क्या देखा कि इतनी रकम लगा दी. पर उन्हें सिर्फ एक मैच ही खेलने को मिला. अगले साल वह जमीन पर आ गए और किंग्स इलेवन ने उन्हें 80 लाख रुपए में खरीदा. पर वह किंग्स इलेवन के लिए दो साल में नौ मैच में सात विकेट लेकर हीरो से जीरो बन चुके हैं.

 

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