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IPL 2018: हजारों करोड़ में मीडिया राइट्स तो खरीद लिए लेकिन मुनाफा कमाने में छूट रहे हैं स्टार इंडिया के पसीने

16,437.5 करोड़ रुपए में पांच साल के लिए आईपीएल के मीडिया राइट्स खरीदने वाले स्टार इंडिया के लिए विज्ञापन के टारगेट को पूरा करना हो रहा है मुश्किल

Updated On: Mar 15, 2018 12:23 AM IST

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey

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IPL 2018: हजारों करोड़ में मीडिया राइट्स तो खरीद लिए लेकिन मुनाफा कमाने में छूट रहे हैं स्टार इंडिया के पसीने

बीसीसीआई की सोने का अंडा देने वाली मुर्गी यानी आईपीएल के 10 कामयाब सालों के बाद जब फिर से इसके मीडिया राइट्स की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी तो हर किसी को अंदाजा था कि इस बार यह राइट्स काफी महंगे बिकेंगे. लेकिन किसी को यह अंदाजा नही रहा होगा कि यह राइट्स पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे. पिछले साल सितंबर में हुई नीलामी में स्टार इंडिया ने बाकी सभी प्रतियोगियों की पछाड़ते हुए पांच साल के लिए 16,437.5 करोड़ रुपए में आईपीएल से ग्लोबल मीडिया राइट्स खरीदकर बीसीसीआई को मालामाल कर दिया.

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स्टार इंडिया की इस रकम से अपनी तिजोरी में  हुए इजाफे के बाद अब बीसीसीआई तो बेहद खुश है लेकिन इस भारीभरकम निवेश के बाद आईपीएल से मुनाफा कमाने में स्टार इंडिया के पसीने छूट रहे हैं.

आईपीएल के 11 वें सीजन को शुरू होने में अब एक महीने से भी कम वक्त बचा है लेकिन स्टार इंडिया ने इससे जो रेवेन्यू कमाने का टारगेट रखा था उससे वह अभी काफी पीछे चल रहै है.

खबर है कि स्टार इंडिया ने आईपीएल के इस सीजन में विज्ञापनों के जरिए 2,000 करोड़ कमाने की योजना बनाई ती थी लेकिन अब तक उसे 800 करोड़ रुपए के विज्ञापन ही मिल सकते हैं. आईपीएल 11 में अब कुल 34 कंपनियां विज्ञापन देने का करार कर चुकी हैं लेकिन अब भी यह टारगेट से 1100-1200 करोड़ रुपए कम है.

क्या घाटे का सौदा साबित होगी आईपीएल!

दऱअसल स्टार इंडिया ने छह भाषाओं में आईपीएल के प्रसारण का प्लान बनाया है और उसके लिए 10 लाख रुपए प्रति 10 सकेंड के हिसाब से विज्ञापन की रेट तय की है. समाचार पत्र इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक स्टार इंडिया से जुड़े एक सूत्र का कहना है ‘ हालात वाकई चिंताजनक हैं. हम अब भी अपने टारगट से पीछे हैं. हमे प्रतिदिन के हिसाब से 40 करोड़ रुपए के रेवेन्यू का करार करना है. यानी जरूरी रनरेट बढ़ती जा रही है.’

स्टार इंडिया को उम्मीद थी की आईपीएल के प्लेटफॉर्म पर हर कंपनी अपनी विज्ञापन देना चाहेगी लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. वोडाफोन, एयरटेल, पेप्सी-को और मारुति सुजुकी के जैसी बड़ी कंपनियों के नाम अबतक आईपीएल की विज्ञापन लिस्ट से बाहर हैं.

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स्टार इंडिया एक ओर जहां अपने इस भारीभरकम निवेश की कीमत वसूलने में संघर्ष कर रहा है वहीं दूसरी और उसकी दी हुई रकम से बोर्ड ने फ्रेंचाइजीज की हिस्सदारी बढ़ा दी है. आईपीएल से जुड़ी सभी फ्रेंचाइजीज को इससे पहले के 10 सीजंस में टेलीकास्ट रेवेन्यू से 60 करोड़ रुपए हर साल मिलते थे लेकिन अब इसमें करीब पांच गुना इजाफा हो गया है. अब बीसीसीआई हर फ्रेंचाइजी को 250 करोड़ रुपए हर साल देने जा रही है.

बहरहाल बोर्ड तो मालामाल हो गया है लेकिन उसको मालामाल करने वाली आईआपीएल के राइट्स खरीदने वाले स्टार इंडिया की हालत खस्ता हो गई है. देखना होगा कि क्या आईपीएल शुरू होने तक क्या स्टार इंडिया इतने विज्ञापन जुटा पाते है जो आईपीएल को उसके लिए भी फायदे का सौदा साबित कर सकें.

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