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तीन साल में कैसे त्‍योहार से जंग के मैदान में बदल गया आईपीएल

आईपीएल 11 सीजन का थीम सॉन्‍ग बीसीसीआई और स्टार इंडिया ने मिलकर बनाया है. जिसमें साउथ अफ्रीका के फिल्म मेकर डैन मेस, म्यूजिक डायरेक्टर राजीव भल्ला की मदद ली है

Kiran Singh Updated On: Mar 13, 2018 03:04 PM IST

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तीन साल में कैसे त्‍योहार से जंग के मैदान में बदल गया आईपीएल

तीन साल आईपीएल का थीम सॉन्‍ग थ ये इंडिया का त्‍योहार है और 2018 में थीम साॅन्‍ग है बेस्‍ट वर्सेज बेस्‍ट, यानी जंग का मैदान. आईपीएल में कई विदेशी खिलाड़ी भी खेलते है, जिनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिनकी कई खिलाि‍डि़यों से खटपट चलती रहती है और आईपीएल में एक टीम, एक दोस्‍त होकर एक साथ खेलते हैं.  2015 से 2018 तक आईपीएल के थीम साॅन्‍ग में काफी बदलाव आ गया ह‍ै, जहां पहले दूरियों को कम करने की बात कहींं जाती थी, वहींं अब बात जंग पर अा गई है.

आईपीएल 11 का काउंट शुरू हो चुका है  और आईपीएल ने अपना थीम सॉन्ग लॉन्‍च कर रिलीज कर दिया है, जिसकी पहली लाइन है 'ये खेल है शेर जवानों का'. इस गाने का सुनने में भले ही आपको मोहम्‍मद रफी का गाना ये देश है वीर जवानों का के बीच ज्यादा फर्क नजर ना आए, लेकिन एक दो दिन में ही आपको आईपीएल का थीम सॉन्ग अखरने लगेगा. आईपीएल जिसे हमारे देश में हकीकत में क्रिकेट का एक त्योहार माना जाता है, उस त्योहार में जंग की बात कुछ जमी नहीं.  इस थीम सॉन्ग में आपको खेल कम और किसी जंग पर जाने का अहसास अधिक होगा.

आईपीएल 11 सीजन का थीम सॉन्‍ग  बीसीसीआई और स्टार इंडिया ने मिलकर बनाया है. जिसमें साउथ अफ्रीका के फिल्म मेकर डैन मेस, म्यूजिक डायरेक्टर राजीव भल्ला की मदद ली है. इस गाने को पांच भाषाओं में सिद्धार्थ बसुर ने गाया है.

2016 थीम सॉन्‍‍ग भी इससे बेहतर था, जहांं हर कोने से खिलाड़ी निकल आ रहे हैं और बात उनके खेल पर हो रही है. इसके ग्राफिक्‍स में भी कुछ नयापन देखने को मिला कि कैसे धोनी को हेलीकॉप्‍टर की तरह दिखाया गया.

 

2015 सीजन में इंडिया का त्योहार

आईपीएल के 2015 सीजन में थीम सॉन्ग था ये है इंडिया का त्यौहार, जिसमें विदेशी खिलाड़ी भी भारतीय रंग में नजर आ रहे थे. खिलाड़ियों के साथ कमेंटेटर्स और प्रशंसक सब एक साथ नजर आए. आईपीएल के इसी थीम सॉन्ग ने आईपीएल और खेल की भावना को बखूबी समझा है शायद. जिसमें दूरियों को छोड़ने की बात कही गई. वैसे भी खेल तो दूरियां कम कर ही देता है, अगर खेल में दूरियों को कम करने की ताकत नहीं होती तो शायद प्योंगचांग में हुए विंटर ओलिंपिक में साउथ और नॉर्थ कोरिया एक टीम में रूप में नहीं खेलते. क्रिकेट में आॅस्ट्रेलियाई खिलाड़ी फिलिप ह्यज की मौत पर शायद पूरी दुनिया नहीं रोती और न ही सचिन तेंदुलकर के संन्यास लेने में हमारी विपक्षी टीमों को दुख होता. रही बात त्योहार की तो सभी संस्कृति में एक ही मान्यता है कि त्योहार में दुश्मनी को भुला देना.

2016 का प्रोमो भी आपको जरूर अच्‍छा लगेगा, जिसमें सलीम सुलेमान ने नफरत के शोर की बजाय जीत के शोर पर फोकस किया है.

 

2017 प्रशंसको को समर्पित

2017 में आईपीएल का दसवां सीजन खेला गया, जिसके प्रोमो में प्रशंसको काे समर्पित किया गया था, लेकिन 2018 का सीजन अब एक नए ही रंग में दिखा.

 

2014 में थीम सॉन्‍ग था कम ऑन बुलावा आया है

 

2013 में फराह खान में बताया था मस्‍ती करने का तरीका

 

हमारे लिए खेल का मतलब क्या

हम धीरे धीरे स्पोर्ट्स के मैप पर दिखने लगे हैं, दुनिया के दिग्गजों के सामने खड़े होने लगे हैं और उनसे आगे भी निकल रहे हैं. इन प्रोमो को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि हम स्पोर्ट्स के मैप पर अपना दायरा बढ़ाने के लिए हम जंग का सहारा ले रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर खेल जंग  है तो फिर खेल भावना क्‍या है.

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