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चोटिल खिलाड़ियों की चिंता छोड़िए, आईपीएल की तो कुछ टीमें भी बहुत बीमार हैं

आईपीएल में दस साल तक रहने वाली टीमों में से कई का दावा है कि उनपर बहुत कर्जा है

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Apr 11, 2018 01:56 PM IST

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चोटिल खिलाड़ियों की चिंता छोड़िए, आईपीएल की तो कुछ टीमें भी बहुत बीमार हैं

मार्केटिंग की दुनिया में सपने दिखाने, उनके सच होने की गारंटी देने और संभावित नाकामी के बावजूद चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ यकीनन कामयाबी दिखाने का एक कारगर जरिया है, पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन. 2007 में आईपीएल का खाका तैयार हुआ तो टीमों के मालिकों के सामने पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन पर राजकपूर की फिल्मों के सुनहरे सपने सरीखे सीन उतार दिए गए.

योजना के मुताबिक तीन-चार साल में ही आईपीएल की टीमों के लिए नलके का पानी महंगी स्कॉच में बदल जाने वाला था. दस साल बाद भी आईपीएल की टीमों की तड़क-भड़क और पैसा खर्च करने के जज्बे को देखने के बाद लगता नहीं कि भारतीय क्रिकेट के राजकपूर ललित मोदी की पावर पॉइंट प्रजेंटेशन में कोई खोट था. लेकिन करोड़ों-अरबों बातें और इंसानी खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया में क्या सब कुछ सही है, इस पर थोड़ा शक है और इसकी जब भी जांच होगी, नतीजे हैरान करने वाले होंगे.

हर्षा भोगले ने उठाए हैं कई सवाल

नामी कमेंटेटेर हर्षा भोगले ने अपने एक कॉलम में संकेत दिया है कि इस बार के आईपीएल में कई महंगे खिलाड़ियों के चोटिल हो जाने का खामियाजा उन्हें करोड़ों देकर खरीदने वाली टीमों को भुगतना पड़ रहा है. भोगले का कॉलम ऐसी चिंताओं से भरा है.

केदार यादव, मिचेल सेंटनर, जेसन बेहरनड्रॉफ, नाथन कॉल्टर नाइल, मिचेल स्टार्क, कगिसो रबाडा और पैट कमिंस जैसे करोड़ों की बोली के बाद खरीदे गए खिलाड़ी चोट के कारण 2018 के आईपीएल से बाहर हो चुके हैं. करार के अनुसार चोट लगने की स्थिति में टीमों को खिलाड़ियों को कुछ हद तक पैसा देना ही पड़ेगा.

HarshaBhogle

इस सारी बहस में सबसे अहम बात समझने की जरूरत है. किसी टीम का इतनी मोटी-मोटी रकम दे कर खिलाड़ियों को खरीदने का मतलब है कि यकीनन उसकी वित्तीय हालत काफी मजबूत होगी. अगर खजाना भरा है तो लगता नहीं कि टीम को किसी खिलाड़ी के चोटिल होने से ज्यादा फर्क पड़ेगा. लेकिन क्या कई टीमों के खजाने में वाकई इतना पैसा है कि वे किसी भी नुकसान को झेल सकती हैं!

टीमों पर है कर्जा 

जाहिर है कि यहां तर्क दिया जा सकता है कि दस साल बाद भी आईपीएल में बने रहने पर कोई भी टीम नुकसान में कैसे रह सकती है! खिलाड़ियों का नीलामी और टीमों के खर्च देखकर यह तर्क सही भी साबित होता है. लेकिन फर्स्ट पोस्ट हिंदी ने पिछले दस साल के खाते खंगालने के बाद पाया कि आधे से ज्यादा आईपीएल की टीमों ने 2017-2018 में घोषित किया है कि उन पर कर्जा है. यहां नुकसान या लाभ ही बात दूर की बात है, कई टीमों का दावा है कि उन पर कर्जा है.

यह दावा काफी हैरान कर देने वाला है क्योंकि यहां सवाल उठना लाजिमी है कि एक ऐसी टीम जो कह रही है कि उस पर 58 करोड़ का कर्जा है वह किसी युवा खिलाड़ी के लिए करीब पांच करोड़ का दांव क्यों और कैसे लगा रही है! इसलिए अगर कोई जानकार आईपीएल की टीमों का वित्तीय सेहत को लेकर चिंता जाहिर करता है तो उसे खुद से कई सवाल करने चाहिए.

वैसे 2013 के स्पॉट फिक्सिंग केस के दौरान मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस टी एस ठाकुर ने एक टीम के मालिक से सीधा सा सवाल किया था कि क्या उन्होंने 450 करोड़ रुपये से ज्यादा में टीम में उनके क्रिकेट के प्रति जुनून के कारण खरीदी है या यह निवेश है! मालिक ने सेकंड में जवाब दिया कि माईलॉर्डशिप यह निवेश है.

अब दस साल बाद भी कई टीमों को इस निवेश के कोई फल न मिलने के भी उनकी चीयरलीडर्स मुस्कुराती हुई अब भी हर चौके-छक्के पर डांस कर रही हैं तो किसी को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं. हां, चाहे तो वह खुद से सवाल कर सकता है कि आखिर यह सब हो कैसे रहा है!

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