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आईपीएल 2017: क्या वॉटसन का वक्त निकल चुका है?

तीन मैच में बनाए हैं 47 रन और 90 रन देकर मिला है एक विकेट

Vedam Jaishankar Updated On: Apr 11, 2017 05:40 PM IST

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आईपीएल 2017: क्या वॉटसन का वक्त निकल चुका है?

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के सीजन में तीन मैच हो गए हैं. वे इस कड़वी सच्चाई से रूबरू हो गए हैं कि उनके मेक-शिफ्ट कप्तान शेन वॉटसन का वक्त बीत चुका है. ज्यादा समय पहले की बात नहीं है, जब वॉटसन बड़े स्टार हुआ करते थे. जितने मैन ऑफ द सीरीज और बाकी अवॉर्ड मिले हैं, वो उनकी काबिलियत को दिखाते हैं.

2012 के टी 20 वर्ल्ड कप के वो मैन ऑफ द सीरीज थे. 2008 और 2013 में वो आईपीएल के मैन ऑफ द टूर्नामेंट थे. 150 हफ्ते तक वॉटसन दुनिया के नंबर एक टी 20 खिलाड़ी रहे. ये अक्टूबर 2011 से जनवरी 2014 के बीच की बात है. दो बार वो सभी फॉर्मेट में ऑस्ट्रेलिया के प्लेयर ऑफ द ईयर रहे हैं.

इन सबके अलावा पांच साल तक वो आईपीएल में सबसे ज्यादा पैसा पाने वाले गैर भारतीय खिलाड़ी थे. लेकिन इन सब का आरसीबी और इसके प्रशंसकों के लिए ज्यादा मतलब नहीं है. वॉटसन वो जादू फिर से दिखा पाने में नाकाम रहे हैं. खासतौर पर, जब उनकी टीम को इसकी सख्त जरूरत है.

ओपनिंग करके भी फेल हुए

अमित मिश्रा को किए एक ओवर के अलावा वॉटसन का बल्ले या गेंद से प्रदर्शन भुला दिए जाने लायक ही है. किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ शायद उन्होंने सोचा था कि स्पिनर्स से पहले आने वाले पेसर्स के खिलाफ उन्हें कुछ आसान रन मिल जाएंगे. उन्होंने पारी की शुरुआत की. लेकिन किंग्स को पता था और उन्होंने अक्षर पटेल से गेंदबाजी की शुरुआत कराई.

पहले ओवर में वॉटसन के विकेट ने आरसीबी की पारी को मुश्किलों में डाल दिया. हालांकि पीठ की समस्या से उबरकर लौटे एबी डिविलियर्स ने कमाल की पारी खेली. अगर वॉटसन ने बल्ले से निराश किया, तो गेंदबाजी और भी खराब थी. उन्हें दो ओवर में 28 रन पड़े. उन्होंने शायद ही किसी बल्लेबाज को परेशान किया. ये यकीनन फिक्र की बात है.

आईपीएल या पिछले तमाम टूर्नामेंट में वॉटसन की ताकत उनकी निरंतरता रही है. बल्ले, गेंद या दोनों से उनका योगदान ही उन्हें टी 20 क्रिकेट में सबसे टीम के लिए सबसे बड़ी जरूरत बनाता रहा है.

2008 में राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने थे

इस ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर को 2008 में राजस्थान रॉयल्स का साथ मिला था. तब साथी क्रिकेटर शेन वॉर्न उन्हें लेकर आए थे. वॉटसन ने आते ही असर छोड़ा. वो ताकतवर हिटर थे और उपयोगी गेंदबाज थे. वॉटसन की फील्डिगं भी अच्छी थी. खासतौर पर डीप से उनके थ्रो गोली की रफ्तार से आते थे.

बहुत सी लीग से जुड़े हैं वॉटसन

आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियन टीम में जगह बनाई. वो आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार मजबूत होते गए. 2016 में उन्होंने खेल को विदा कहा. लेकिन टी 20 लीग से जुड़े रहे. पाकिस्तान सुपर लीग में वो इस्लामाबाद के आइकॉन प्लेयर थे. कैरिबियन प्रीमियर लीग और पिछले साल सिडनी थंडर के लिए बिग बैश में खेले. उन्हें चोटिल विराट कोहली की जगह कप्तानी मिलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी.

लेकिन सवाल यही है कि क्या वॉटसन का वक्त बीत चुका है? 36 साल के हैं वॉटसन. उनकी गेंदबाजी में अब वो धार नहीं रही, जो हुआ करती थी. सनराइजर्स के खिलाफ वॉटसन के तीन ओवर में 41 रन बने थे. दिल्ली के खिलाफ 21 रन देकर एक विकेट लिया. लेकिन यहां मिश्रा ज्यादातर समय बल्ले का गेंद से संपर्क नहीं करा पाए. किंग्स इलेवन के खिलाफ दो ओवर में 28 रन दिए. बल्लेबाजी में उनकी तीन पारियां 22, 24 और एक रन की रही हैं.

ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर की ताकत पिछले सीजन में ऐसी थी कि मुश्किल हालात में वो मैच को निकालने की क्षमता रखते थे. 2013 में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ यही किया था, जहां 61 गेंद में 101 रन बनाए थे. इसमें छह चौके और छह छक्के थे.

आरसीबी यकीनन उम्मीद कर रही होगी कि उन्होंने गलत घोड़े पर दांव नहीं लगाया है. लेकिन इसके लिए समय कम है. जितनी जल्दी वॉटसन का प्रदर्शन सुधरता है, आरसीबी के लिए उतना ही अच्छा है.

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