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खराब फॉर्म के बाद भी धोनी क्यों हैं विराट कोहली की मजबूरी?

इस साल अब तक खेले गए वनडे मैचों में धोनी ने सिर्फ एक छक्का लगाया है

Updated On: Oct 20, 2018 05:18 PM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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खराब फॉर्म के बाद भी धोनी क्यों हैं विराट कोहली की मजबूरी?
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ऋषभ पंत वनडे करियर की शुरुआत करने जा रहे हैं. महेन्द्र सिंह धोनी भी टीम में खेलेंगे. मतलब ‘गेमचेंजर’ अब धोनी की जगह पंत होंगे. दरअसल क्रिकेट कहने को टीम-गेम जरूर है, लेकिन ‘इंडिविजुवल’ यानी व्यक्तिगत प्रदर्शन बड़ी आसानी से दिख जाता है. टीम की जीत और हार दोनों सूरत में व्यक्तिगत प्रदर्शन अलग से नजर आता है. हॉकी या फुटबॉल के खेल में ऐसा नहीं है, क्योंकि वहां खेल की समझ रखने वाले लोग ही व्यक्तिगत प्रदर्शन को जान और समझ सकते हैं. जबकि क्रिकेट में तो एक छोटा सा बच्चा भी बता देता है किसने कितने रन बनाए. किसने कितने विकेट लिए. किसकी वजह से टीम जीती या किसकी वजह से टीम हारी. इसी प्रदर्शन के आधार पर टीम में किसी खिलाड़ी की जगह बनती है.

कई बार ऐसा भी होता है कि टीम तो जीत रही होती है, लेकिन किसी खास खिलाड़ी का प्रदर्शन लगातार खराब रहता है. ऐसे में तुरंत हो हल्ला नहीं होता. लेकिन अगर उस खिलाड़ी का प्रदर्शन दो-चार मैच के बाद भी ना सुधरे तो आवाजें उठने लगती हैं. भारतीय क्रिकेट में फिलहाल ये आवाजें पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को लेकर उठ रही हैं. धोनी का बल्ला लगातार खामोश है. 2018 में उनका औसत और स्ट्राइक रेट दोनों काफी गिरा है. मैच फिनिशर की उनकी छवि काफी धूमिल हुई है. वो क्रीज पर संघर्ष करते दिख रहे हैं. बावजूद इसके विराट कोहली उन्हें टीम में बनाए हुए हैं. क्रिकेट फैंस के मन में ये सवाल उठना लाजमी है कि आखिर धोनी को टीम में बनाए रखने के पीछे विराट कोहली की मजबूरी क्या है? अगर धोनी रन नहीं बना पा रहे हैं तो विराट कोहली उन्हें बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाते? इस सवाल का जवाब हमने खोजने की कोशिश की है.

Kohli Dhoni

पहले जान लेते हैं धोनी का हालिया प्रदर्शन

हाल के दिनों में धोनी की बल्लेबाजी में काफी गिरावट आई है. उनकी आक्रामकता गायब हो चुकी है. बतौर बल्लेबाज उनके ‘रिफलेक्सेस’ कमजोर हुए हैं. ये बात चौंकाती है कि इस साल अब तक खेले गए वनडे मैचों में उन्होंने सिर्फ 1 छक्का लगाया है. स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ वो काफी ‘स्ट्रगल’ कर रहे हैं. जिस ताकतवर बल्लेबाजी के चलते उनका विश्व क्रिकेट में रूतबा था वो अंदाज नदारद है. धोनी अब सिंगल लेकर स्ट्राइक अगले बल्लेबाज को देने में यकीन करते हैं. हाल के कई मैंचों में उन्होंने फिनिशर का वो रोल नहीं निभाया है जो उनकी सबसे बड़ी पहचान थी. इस साल अब तक खेले गए 15 मैचों में उनके सवा दो सौ रन बताते हैं कि उनकी औसत और स्ट्राइक रेट पहले से करीब आधी हो गई है. धोनी की उम्र भी 37 साल पार कर चुकी है.

कीपिंग, कंप्यूटर और कौटिल्य की कहानी

दरअसल ये तीन वजहें हैं जो धोनी को बचाए हुए हैं. इसे विस्तार से समझिए. तभी आप जान पाएंगे कि धोनी ने आउट ऑफ फॉर्म रहकर भी अपनी उपयोगिता कैसे साबित की है. अव्वल तो ये बात माननी होगी कि 37 साल की उम्र में भी धोनी की विकेटकीपिंग का कोई मुकाबला ही नहीं है.

Cricket - India v Bangladesh - World Twenty20 cricket tournament - Bengaluru, India, 23/03/2016. India's captain and wicketkeeper Mahendra Singh Dhoni (L) runs out Bangladesh's Mustafizur Rahman. REUTERS/Danish Siddiqui - RTSBY2R

वो पहले से कहीं ज्यादा फिट हैं. वो पलक झपकते ही बल्लेबाज की गिल्लियां बिखेर देते हैं. धोनी की दूसरी उपयोगिता है. उनका कंप्यूटर वाला दिमाग. एक जमाने में कार्टूनिस्ट प्राण के लोकप्रिय कैरेक्टर चाचा चौधरी के लिए कहा जाता था कि उनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है. क्रिकेट के खेल में ये बात धोनी के लिए कही जा सकती है. खास तौर पर डीआरएस के मामले में विराट कोहली को धोनी से काफी मदद मिलती है. वो विकेट के पीछे से सबकुछ पढ़ लेते हैं. तीसरी बड़ी उपयोगिता है धोनी की चालाकी. उन्हें क्रिकेट का कौटिल्य कहना गलत नहीं है. वो मुश्किल से मुश्किल वक्त में सोचते रहते हैं. ‘फील्डिंग प्लेसमेंट’ और ‘बॉलिंग चेंज’ को लेकर वो विराट कोहली को अक्सर कुछ ना कुछ बताते रहते हैं. कई बार ऐसा हुआ है जब उन्होंने किसी गेंदबाज से एक ओवर और फेंकने के लिए विराट को तैयार किया और उस गेंदबाज ने टीम को कामयाबी दिलाई. स्पिनर्स के खिलाफ कीपिंग करते समय वो विकेट के पीछे से लगातार बड़ी काम की बातें बताते रहते हैं. ऐसे में विराट कोहली पर कप्तानी का बोझ कम होता है. विराट कोहली बाकयदा एक इंटरव्यू में ये बात कह भी चुके हैं कि उन्होंने दुनिया भर में धोनी जैसा ‘क्रिकेटिंग ब्रेन’ बहुत कम लोगों में देखा है. जाहिर है धोनी बल्ले से भले फ्लॉप हों, लेकिन अपनी इन्हीं खूबियों के चलते उन्हें अपने कप्तान का भरोसा हासिल है. अभी आगे भी रहेगा.

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