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भारत-श्रीलंका पहला वनडे: ताश के पत्तों के महल की मानिंद ढही भारत की बल्लेबाजी

सात विकेट से धर्मशाला वनडे जीतकर श्रीलंका ने बनाई 1-0 की बढ़त, लकमल की बेहतरीन गेंदबाजी, काम नहीं आया धोनी का अर्द्धशतक

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey Updated On: Dec 10, 2017 06:59 PM IST

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भारत-श्रीलंका पहला वनडे: ताश के पत्तों के महल की मानिंद ढही भारत की बल्लेबाजी

भारतीय सेलेक्टर्स ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए जब टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को आराम देने का फैसला किया था तब उनके दिमाग में दूर-दूर तक यह बात नहीं होगी कि विराट की गैरमौजूदगी में श्रीलंका जैसे कमजोर टीम भारतीय बल्लोबाजी घुटनों पर ला देगी.

रविवार को जब श्रीलंका के कप्तान तिसारा परेरा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया तो पहली बार भारत की कप्तानी कर रहे रोहित शर्मा को भी यह अंदाजा नहीं होगा कि वह खुद को मिले इस मौके को हमेशा के लिए भूलना चाहेंगे.

भारतीय बल्लेबाज हुए ढेर

लगातार 12 वनडे मुकाबले हार चुकी श्रीलंका की टीम के गेंदबाजों ने धर्मशाला के मैदान पर स्विंग और सीम कंडीशंस का ऐसा फायदा उठाया कि भारत एक वक्त पर वनडे इतिहास में अपने न्यूनतम स्कोर 54 से भी कम पर आउट होने कगार पर पहुंच गई थी लेकिन धोनी ने अपने अनुभव की बदौलत भारत की इज्जत को बचा लिया.

टेस्ट सीरीज में भी भारत के लिए मुसीबत बने श्रीलंका के तेज गेंदबाज सुरंगा लकमल ने वनडे सीरीज के पहले ही मुकाबले में, मुफीद विकेट और कंडीशंस मिलने पर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ कर रख दी. टेस्ट सीरीज में एक भी गेंद ना डालने वाले मैथ्यूज ने धवन को चलता करके भारत के विकेटों के पतझड़ की शुरूआत की और उसके बाद लकमल ने पहले रोहित शर्मा फिर दिनेश कार्तिक और फिर मनीष पांडे को आउट करके भारत को बैकफुट पर धकेल दिया. अपनी कप्तानी के पहले मुकाबले में रोहित शर्मा 13 गेदों पर महज दो रन ही बना सके. कोहली की गैरमौजूदगी में श्रेयस अय्यर को इंटरनेशनल क्रिकेट में पांव रखने का मौका मिला लेकिन वह भी इस मौके को भुनाने में नाकाम रहे और अपने स्कोर को डबल डिजिट में नहीं ले जा सके.

धोनी ने संभाला मोर्चा

जब टीम इंडिया के महज 16 रन पर चार विकेट गिर चुके थे तब क्रीज पर पहुंचे पूर्व कप्तान एमएस धोनी. धोनी ने एक छोर से विकेट पर टिक कर पहले श्रीलंका के मुख्य गेंदबाजों के ओवर खत्म होने का इंतजार किय़ा लेकिन दूसरे छोर से विकेटों का पतझड़ जारी था.

टीम इंडिया के नए स्टार हार्दिक पांड्या और भुवनेश्वर कुमार भी धोनी का साथ छोड़ गए. 29 रन पर भारत के सात विकेट गिर चुके थे. इसके बाद धोनी ने पहले कुलदीप यादव, फिर जसप्रीत बुमराह और फिर चहल के साथ मिलकर भारत के स्कोर को 100 रन के पार पहुंचाया.

87 गेदों पर 65 रन बनाकर धोनी भारत के आखिरी विकेट के तौर पर आउट हुए. इस मैच में धोनी ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 16000 रन भी पूरे किए और ऐसा कारनामा करने वाले वह श्रीलंका के कुमार संगकारा के बाद दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाज बने.

112 रन के मामूली से स्कोर को डिफेंड करने उतरी भारतीय टीम की शुरूआत भी अच्छी रही. जसप्रीत बुमराह ने श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज गुणातिलके को जल्दी पैवेलियन वापस भेजा वहीं भुवी ने तिरिमाने को खाते खोलने से पहले ही बोल्ड करके भारत की उम्मीदें बरकरार रखीं.

बुमराह की नो बॉल पड़ी भारी

भारत के लिहाज से से मैच का टर्निंग पॉइंट उस वक्त आया जब बुमराह की गेंद पर उपुल तरंगा का विकेट गिरा लेकिन वह नो बॉल निकली. तरंगा  उसके बाद 49 रन बनाकर आउट हुए. लेकिन तब तक वह मैच को भारत की पकड़ से दूर ले जा चुके थे.

सीरीज का अगला मुकाबला बुधवार को मोहाली में खेला जाएगा. इस मैच से पहले तो भारत इस सीरीज में क्लीन स्वीप करने का ख्वाब देख रहा था लेकिन अब सीरीज बचाने का सवाल आ खड़ा हुआ है. साथ ही सवाल यह भी है कि कागज पर इतनी मजबूत दिखने वाली भारतीय बल्लेबाजी विपरात हालात में ताश के पत्तों की तरह कैसे बिखर गई.

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