S M L

भारत-श्रीलंका तीसरा टेस्ट: शुक्र मनाइए कि ये श्रीलंकाई टीम है, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड नहीं...

भारत के खिलाफ अगर इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की टीम होती तो दिल्ली का ड्रामा बन चुका होता, जो पहले भी बनता रहा है

Updated On: Dec 04, 2017 04:02 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

0
भारत-श्रीलंका तीसरा टेस्ट: शुक्र मनाइए कि ये श्रीलंकाई टीम है, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड नहीं...

लाहिरू गमगे अपने घुटनों पर बैठे हुए थे. सिर नीचे था. उल्टी कर रहे थे. दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पूरी दिल्ली की तरह धुंधलका छाया था. सवाल उठे. क्या वाकई दिल्ली इस लायक नहीं कि यहां पर क्रिकेट हो सके? दोपहर में इंडिया गेट के आसपास पीएम 2.5 का स्तर 337 था, जो सामान्य से करीब छह गुना ज्यादा है. पीएम 10 का स्तर 541 था. वो भी करीब छह गुना ही है. मैच रुका. लंच के बाद करीब 17 मिनट तक खेल नहीं हुआ.

सवाल उठे. सवाल उठते ही सोशल मीडिया पर जवाब मिलने शुरू हो गए. किसी ने इसे श्रीलंकाई टीम का ‘गिमिक’ बता दिया और ऑस्कर देने की सिफारिश कर दी. किसी ने बताया कि हनुमान तो श्रीलंका को राख कर आए थे. ऐसे में उन्हें धुएं से क्या दिक्कत होनी चाहिए. यानी कुल मिलाकर ट्रॉल्स को लगता है कि ये धुआं क्या चीज है.

क्या वाकई श्रीलंकाई टीम इतनी कमाल की एक्टिंग जानती है कि गमगे उल्टियां करने लगे! क्या वाकई उल्टियां करना एक्टिंग का हिस्सा होता है? हो सकता है कि हो. लेकिन यहां पर ‘हो सकता है’.. यानी ये तीन शब्द अहम हैं. जो वाकई तय है, वो ये कि प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है. सांस लेने में दिक्कत हो रही है. ऐसे में खेलना आसान नहीं.

पिछले साल भी प्रदूषण की वजह से रद्द हुए मैच 

दिल्ली में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब क्रिकेट मैच पर प्रदूषण का असर पड़ा हो. पिछले साल नवंबर में दो रणजी मैच रद्द कर दिए गए थे. तब भी वजह प्रदूषण थी. बंगाल और गुजरात को फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में खेलना था. हैदराबाद और त्रिपुरा का मैच करनैल सिंह स्टेडियम में होना था. तब मनोज तिवारी और प्रज्ञान ओझा की तस्वीरें हर जगह पब्लिश हुई थीं, जो मास्क पहने मैदान पर खड़े थे.

श्रीलंका के खिलाड़ी यहां एक दिन भी नहीं खेल पा रहे हैं, जबकि ये (केंद्र सरकार और राज्य सरकार) वर्षों से हमारी जिंदगी के साथ खेल रहे हैं

श्रीलंका के खिलाड़ी यहां एक दिन भी नहीं खेल पा रहे हैं, जबकि ये (केंद्र सरकार और राज्य सरकार) वर्षों से हमारी जिंदगी के साथ खेल रहे हैं

जितने लोग सोशल मीडिया पर हैं, वो यह तय मान लें कि ऐसा नजारा अगर 80 या 90 के दशक में होता, तो दिन का खेल रद्द कर दिया जाता. तब कोई नहीं कह रहा होता कि ये ड्रामा है. खासतौर पर अगर सामने इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम होती. तब दिल्ली का ड्रामा बन चुका होता, जो पहले भी बनता रहा है. ‘इनफेमस डेल्ही स्मॉग’ हमेशा से इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की हेडलाइन बनती रही हैं. इस मैच में रेफरी डेविड बून अगर खिलाड़ी के तौर पर उस समय आते, तो शायद मैदान से बाहर जाने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में होते.

ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया नहीं, श्रीलंकाई टीम सामने है. वो अभी इस हालत में नहीं है कि खेलने से इनकार कर सके. हालांकि यह जरूर पूछा गया है कि आखिर दिल्ली को टेस्ट मैच के लिए इस समय क्यों चुना गया. लेकिन सवाल यह है कि दिल्ली में आखिर मैच कब कराया जाए? जो क्रिकेट का सीजन होता है, उस समय पिछले कई साल से प्रदूषण का स्तर ‘वेरी पुअर’ से नीचे आता नहीं दिखता.

फीफा भी दे चुका है चेतावनी

यहां तक कि जब क्रिकेट में गहमागहमी चल रही थी, उसी समय फीफा अंडर 17 वर्ल्ड कप के टूर्नामेंट डायरेक्टर जेवियर सेपी ने ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि दिवाली से लेकर फरवरी तक दिल्ली में खेल इवेंट नहीं होने चाहिए. उन्होंने लिखा है कि हमें समझना चाहिए कि एथलीट का स्वास्थ्य प्राथमिकता है.

सिर्फ एथलीट ही नहीं, यहां के लोगों का स्वास्थ्य भी प्राथमिकता होना चाहिए, जो ट्रॉलर्स को समझ नहीं आएगा. अलग-अलग वजहों से नरेंद्र मोदी या अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने वालों के लिए समझना जरूरी है कि आखिर में उन्हीं को इस धुंध का असर सबसे ज्यादा झेलना होगा, क्योंकि वो दिल्ली में रहते हैं.

17 के मिनट के इस व्यवधान को इंटरनेशनल कवरेज मिलनी भी शुरू हो गई है. ब्रिटेन में इसे सबसे पहले कवरेज मिली. संडे एक्सप्रेस ने बड़ी स्टोरी के साथ बताया कि हुआ क्या है और दिल्ली में प्रदूषण की वजह से क्या दिक्कत हो रही है.

इस पूरे मामले में विराट कोहली का उतावलापन समझने लायक है. वो मैच जीतना चाहते हैं. किसी भी हालत में. बीसीसीआई का उतावलापन भी समझने लायक है. वो हर हालत में मैच पूरा करना चाहते हैं. यही बात टेलीविजन ब्रॉडकास्टर के लिए भी कही जा सकती है. लेकिन ट्रॉलर्स का उतावलापन दिलचस्प है, जो एक क्रिकेट मैच में किसी बेचारी टीम का मजाक उड़ाने के लिए उतरे हैं. ध्यान रखिए, ये प्रदूषण आपकी जिंदगी का मजाक बना रहा है. ...और इस प्रदूषण के सामने खड़े होने के लिए वर्चुअल मीडिया पर ट्रॉलर्स भी नहीं हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi