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विराट कोहली बनाम साउथ अफ्रीका मुकाबले के इंतजार में है सेंचुरियन

पहले टेस्ट की दोनों पारियों में प्रदर्शन करने में नाकाम रहे विराट कोहली पर दूसरे टेस्ट में साउथ अफ्रीका की रणनीति के खिलाफ खेलने का दबाव होगा

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Jan 12, 2018 11:56 AM IST

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विराट कोहली बनाम साउथ अफ्रीका मुकाबले के इंतजार में है सेंचुरियन

केपटाउन टेस्ट मैच की दोनों पारियों में जब भारतीय कप्तान विराट कोहली बल्लेबाजी करने आए तो स्टेडियम में अलग किस्म को शोर था. स्टेडियम में मौजूद भारतीय मूल के दर्शकों की आवाज में इसलिए जोश था क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा था कि कोहली अपने बल्ले से उन्हें निराश नहीं करेंगे. दक्षिणी अफ्रीकी दर्शक शोर से अपनी टीम को यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि यही बल्लेबाज है जिसकी विकेट भारतीयों की कमर तोड़ देगी.

यही हुआ भी. इसलिए शनिवार से सेंचुरियन में शुरू होने जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में भी यह सिलसिला थमने नहीं जा रहा. सेंचुरियन में टीम से ज्यादा कप्तान विराट कोहली दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों के निशाने पर रहेंगे. दूसरे टेस्ट मैच को कोहली बनाम साउथ अफ्रीका कहने में कोई हर्ज नहीं है.

यह सही है कि पिछले दो साल के दौरान कोहली ने टीम के लिए बिना रुके रन बनाए हैं और उसकी सफलता में उनके स्कोर की अहम भूमिका रही है. लेकिन इस दौरान उन्हें कभी ऐसे हालात में बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला. यहां अपने लिए अनुकूल व बेहतरीन पिचों पर गेंदबाज शर्तें तय करता है और मामूली सी गलती स्लिप या विकेट के पीछे विकेट के रूप में बदल जाती है.

South African bowler Vernon Philander (L) celebrates the dismissal of Indian batsman Virat Kohli (R) during the fourth day of the first Test cricket match between South Africa and India at Newlands cricket ground on January 8, 2018 in Cape Town, South Africa.  / AFP PHOTO / MARCO LONGARI

केपटाउन टेस्ट मैच की पहली पारी में मोर्ने मोर्कल ने 2018 की अपनी पहली गेंद विराट को डाली थी. ऑफ स्टंप के बाहर करीब छठी स्टंप पर उछाल के साथ बल्ले को चूम पर विकेटकीपर के दस्तानों में गई बॉल को समझने के लिए विराट को यकीनन बार-बार वीडियो रिप्ले देखना पड़ा होगा.

दूसरी पारी में एक ओवर आउटस्विंगर खिलाने के बाद वर्नन फिलेंडर से एक ही अंदर आती हुई गेंद विराट को डाली और वह विकेट ठीक सामने थे. एक ऐसा बल्लेबाज जो पिछले दो साल में लगातार बेहतरीन क्रिकेट खेल रहा हो और पूरी दुनिया के पूर्व दिग्गज उसे उम्दा बता रहे हो, उसे अगर कोई गेंदबाज योजना बना कर जब चाहे तब आउट करता है, तो समझ लेना चाहिए कि बाकी के खेल में कैरियर की बड़ी चुनौती आगे भी उसका इंतजार कर रही है.

केपटाउन में मेजबान गेंदबाजों या फील्डर्स ने भारतीय बल्लेबाजों के सामने अपनी जुबां नहीं खोली बल्कि गेंद को ही बोलने दिया. इसके विरपीत कोहली ने कप्तान फाफ ड्यू प्लेसी को आउट होने के बाद आक्रामक विदाई दी, उसे दक्षिण अफ्रीकी शायद ही भूले हों.

यह भी जरूरी नहीं है कि वे भी विराट को उसी के अंदाज में जवाब दें. लेकिन उन्हें अंदाजा है कि भारतीय कप्तान के सस्ते में सिमट जाने के बाद उनके लिए बाकी बल्लेबाजी पर हावी हो जाना आसान होगा. इसके लिए वे जोहनिसबर्ग टेस्ट में तीसरे टेस्ट का इंतजार नहीं करने वाले.

Indian bowler Umesh Yadav (2R) celebrates with captain Virat Kohli (C) and his team mates, the dismissal of Australian captain Steve Smith during the fourth day of the second Test match between India and Australia at The M. Chinnaswamy Stadium in Bangalore on March 7, 2017.  / AFP PHOTO / Manjunath KIRAN / ----IMAGE RESTRICTED TO EDITORIAL USE - STRICTLY NO COMMERCIAL USE----- / GETTYOUT

सेंचुरियन पिच में भी अच्छा उछाल है और कोहली को ऑफ स्टंप के बाहर लगातार होने वाली गेंदबाजी से खुद को बचाए रखने से ज्यादा यहां पर मिडिल व ऑफ स्टंप पर बल्ले की पहुंच से पहले गिर कर उछाल के साथ छाती या गर्दन की ऊंचाई तक आने वाली बॉलिंग का सामना चुनौती होगा.

ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि विराट अपनी विकेट बचाने, टीम के लिए रन बनाने या फिर खुद को एक आक्रामक लाइन की गेंदबाजी से बचाने में किस कदर सफल रहते हैं! वैसे कोहली के साथ अच्छी बात यह है कि वह हमेशा उम्दा किस्म के हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं.

सेंचुरियन हमेशा दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों के लिए अपने रिकॉर्ड सुधारने वाली पिच रही है. कागिसो रबाडा ने इस पिच पर सिर्फ दो मैचों में गेंदबाजी की है और उनके 18 विकेट हैं. उनके शिकार में 90 फीसदी नंबर  पांच तक के बल्लेबाज शामिल हैं.

फिलेंडर के लिए भी यह मैदान कमाल का रहा है. पांच मैचों में उनके 22 विकेट हैं. जबकि मोर्कल ने सात मैचों में सेंचुरियन में 28 बल्लेबाजों के निपटाया है. जाहिर है कि इन तीनों के पास कोहली के लिए टीम के अलावा अपनी रणनीति भी रहेगी. विराट मुश्किल पिचों पर क्वालिटी गेंदबाजी के सामने इस पूरी सीरीज में सौ रन पार कर पाएंगे  या नहीं, सेंचुरियन में इसका अंदाजा हो जाएगा.

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