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जोहानसबर्ग में ‘बॉस’ फिर गलतियां ना करे, टीम हित में आंखें और मुंह खोले ‘स्टाफ’

विराट कोहली की टीम वहां मैच जीतने या बचाने से ज्यादा सीरीज में 0-3 से संभावित हार के मानसिक दबाव से साथ खेलने उतरेगी.

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Jan 22, 2018 12:53 PM IST

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जोहानसबर्ग में ‘बॉस’ फिर गलतियां ना करे, टीम हित में आंखें और मुंह खोले ‘स्टाफ’

तीसरा टेस्ट 24 जनवरी से शुरू होना है और जोहानसबर्ग के खबर है कि वहां पिच पर हरी घास को मेजबान टीम की जरूरत के रूप में प्राथमिकता मिलेगी. जाहिर है कि विराट कोहली की टीम वहां मैच जीतने या बचाने से ज्यादा सीरीज में 0-3 से संभावित हार के मानसिक दबाव से साथ खेलने उतरेगी.

पहले दो टेस्ट मैचों में भारतीय कप्तान ने कुछ हैरान कर देने वाले फैसले किए हैं. इसके लिए उनकी काफी आलोचना हो चुकी है. वैसे हकीकत यह है कि मैदान से बाहर बड़े फैसले अकेला कप्तान नहीं लेता. हेड कोच, सहायक कोच, बल्लेबाजी कोच, फील्डिंग कोच और टीम प्रबंधन के बाकी सहयोगियों की भी हां उसमें रहती है.

लेकिन सवाल उठता है कि क्या विराट कोहली वाकई में बाकी लोगों की बात सुन रहे हैं? या ‘कप्तान ही बॉस होता है’ घोषित कर चुके हेड कोच रवि शास्त्री और अन्य लोग टीम के हित में ऐसे फैसलों में पूरी तरह शामिल हैं? या फिर ये सारे लोग सिर्फ किसी वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी की तरह बॉस की हां में हां मिला रहे हैं?

कप्तान अनिल कुंबले जैसे दिग्गज के खिलाफ लड़ने के बाद शास्त्री के साथ खड़ा दिख रहा था. ऐसे में लगता नहीं कि कप्तान के फैसलों पर वह हस्तक्षेप कर रहे होंगे. शायद इसलिए एशिया से बाहर टीम में बेहतरीन रिकॉर्ड होने के बावजूद अजिंक्य राहणे सिर्फ नेट्स में ही बल्लेबाजी कर रहे हैं.

Cricket - India v New Zealand - Second Test cricket match - Eden Gardens, Kolkata, India - 03/10/2016. India's Bhuvneshwar Kumar celebrates taking the wicket of New Zealand's Jeetan Patel. REUTERS/Rupak De Chowdhuri - SR1ECA30TDX1M

पहले टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका के टॉप बल्लेबाजों को आउट करने वाले भुवनेश्वर कुमार सेंचुरियन के ड्रेसिंग रूम में क्यों थे, इस पर कप्तान बात नहीं करना चाहते क्योंकि वह बता चुके हैं कि वह बेहतरीन 11 खिलाड़ियों के साथ ही सेंचुरियन में खेलने उतरे थे. इन 11 में रोहित शर्मा भी थे, जो रहाणे की कीमत पर दो टेस्ट मैच खेले और नाकाम रहे. तीसरे में उन्हें फिर से मौका दिए जाने का कोई कारण नहीं हैं. साफ है कि रहाणे को प्लेइंग 11 में जगह देना कप्तान की मजबूरी है.

पहले श्रीलंका के खिलाफ खराब फॉर्म के कारण रहाणे को मौका नहीं दिया गया. उस सीरीज में स्टार शिखर धवन को पहले मैच के बाद ही बिठा दिया गया. रोहित अपनी पिचों पर सामने वाली टीमों के खिलाफ रनों के पहाड़ बना रहे थे. लेकिन पहले दो टेस्ट में मेजबान तेज गेंदबाजों ने उनके पत्ते खोल दिए. जोहानसबर्ग में बाहर बैठने की बारी अब इस स्टार की है.

साथ ही जिस तरह से हार्दिक पांड्या ने शर्मनाक ढंग ने रन आउट होकर अपना विकेट गंवाया, कप्तान और कोच को इस मुद्दे पर कड़ा संदेश देने के लिए कोई फैसला करना चाहिए. कुल मिला कर देखा जाए तो हालात बहुत जटिल हैं जो बताते हैं कि खराब फैसले लेने के परिणाम टीम को भुगतने पड़े हैं.

यहां टीम सेलेक्शन का मामला ही नहीं है. ऐसा लगता है कि कप्तान के फैसले पर कोई सवाल करने वाला नहीं है. या यह भी कह सकते हैं कि आपसी संबंधों के चलते और किसी विवाद में न पड़ने की सोच के कारण शास्त्री और बाकी कोचों की पलटन अपने बॉस के सामने आंखे और मुंह बंद किए हुए हैं. शायद उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि ऐसा करने से टीम हर मोर्च पर बुरी तरह पिटेगी या उसके रुतबे की धज्जियां उड़ेंगी.

Cricket - India v Australia - Second Test cricket match - M Chinnaswamy Stadium, Bengaluru, India - 05/03/17. India's captain Virat Kohli reacts after a dropped catch. REUTERS/Danish Siddiqui - RC1518DFFE10

मैदान के अंदर भी कप्तान काफी कन्फ्यूज लग रहे हैं. सेंचुरियन में जिस तरफ बल्लेबाजों ने अपना कोई शॉट खेला, कप्तान ने कहीं और से फील्डर को हटा कर वहां लगा दिया. कई मौकों पर एक ही ओवर में तीन-चार बार भी फील्डिंग में बदलाव हुआ. यह सिलसिला पूरे मैच में नहीं थमा.

विराट को दोनों मैचों के वीडियो फिर से देख कर सवाल करना चाहिए कि आखिरी उनके बल्लेबाज कैच वहीं क्यों थमा रहे हैं जहां पर विशेष तौर पर फील्डर लगाया गया था! शांत लेकिन चालाक फाफ ड्यू प्लेसी से वह सीख सकते हैं. इसके लिए उन्हें खुद के आउट होने के वीडियो को अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड करना चाहिए.

केपटाउन और सेंचुरियन टेस्ट मैच की नतीजे के लिहाज से दूसरी पारी में जब भारतीय कप्तान बल्लेबाजी करने आए तो ड्यू प्लेसी ने मिडविकेट पूरा खाली कर दिया ताकि विराट मिडिल स्टंप की बॉल को अक्रास-द-लाइन खेल कर वहां खेलने की कोशिश करें. ड्यू प्लेसी  की साजिश काम कर गई और दोनों ही पारियों में विराट ने बॉल को मिस किया और एलबीडब्ल्यू हुए.

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