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भारत बनाम साउथ अफ्रीका, पहला टेस्ट: क्या इतिहास बदल पाएगी टीम इंडिया!

भारत ने अबतक साउथ अफ्रीका में एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीती है, कप्तान कोहली की अग्निपरीक्षा का वक्त शुरू हो चुका है

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey Updated On: Jan 04, 2018 03:41 PM IST

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भारत बनाम साउथ अफ्रीका, पहला टेस्ट: क्या इतिहास बदल पाएगी टीम इंडिया!

साल 2018 में टीम इंडिया की सबसे पहली चुनौती साउथ के शहर केपटाउन में शुरू होने वाली है. तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली शुक्रवार को जब केपटाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर टॉस करने उतरेंगे तो उनके सामने इस देश में टीम इंडिया के उस रिकॉर्ड को बदलने की चुनौती होगी जो बताता है कि भारत अबतक यहां से कभी सीरीज जीत कर नहीं लौटा है.

टेस्ट मैचों में टीम इंडिया नंबर वन की हैसियत से साउथ अफ्रीका पहुंची है. भारतीय टीम ने लगातार नौ टेस्ट सीरीज में जीत हासिल की है. लेकिन साउथ अफ्रीका की धरती पर यह रिकॉर्ड उसके कितना काम आएगा यह देखने वाली बात होगी क्योंकि यहां हालात बिलकुल अलहदा है. भारत ने अपने नौ टेस्ट सीरीज में से छह तो अपने घर पर ही जीती हैं जबकि दो सीरीज श्रीलंका में और एक वेस्टइंडीज में.

आंकड़े हैं भारत के खिलाफ

बात अगर साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया के अबतक के प्रदर्शन की करें तो आंकड़े बेहद डराने वाले हैं. भारत ने अब तक साउथ अफ्रीका में कुल छह सीरीज खेलीं हैं जिनमें से पांच में उसे हार का सामना करना पड़ा है जबकि एक सीरीज साल 2011 में ड्रॉ रही थी.

साल 1992 से लेकर अब तक भारत ने साउथ अफ्रीका में कुल 17 टेस्ट खेले हैं जिनमें से उस महज दो टेस्ट मैचों में ही जीत हासिल हुई है. साल 2005-06 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में और 2010-11 में एमएस धोनी की कप्तानी में भारत को एक-एक टेस्ट जीत हासिल हुई थी.

हालांकि भारत के पिछले दो दौरों की बात करें तो हालात उतने बदतर नजर नहीं आते हैं. साल 2010-11 की सीरीज ड्रॉ रही थी जबकि साल 2013-14 की सीरीज टीम इंडिया ने कड़ी टक्कर के बाद हारी थी. बात अगर इस मैदान की करें तो इस मैदान पर भारतीय टीम कभी भी जीत हासिल नही कर सकी है. भारत ने अब तक यहां कुल चार टेस्ट खेले हैं जिनमें से दो में उसे हार के मुंह देखना पड़ा है जबकि दो टेस्ट ड्रॉ रहे हैं.

भारत की बल्लेबाजी और साउथ अफ्रीका की गेंदबाजी के बीच है मुकाबला

मशहूर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के मुताबिक अगर टीम इंडिया पहले दिन साउथ अफ्रीका को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब रहती है तो फिर उसका मनोबल आसमान पर पहुंच सकता है और इस सीरीज की की तस्वीर बदल सकती है. जाहिर है सचिन का इशारा साउथ अफ्रीका की उन कंडीशंस की ओर है जिनका मनोवैज्ञानितक दबाव टीम इंडिया के ऊपर है.  केपटाउन की हरी विकेट पर अगर भारतीय बल्लेबाज अफ्रीकी पेस बैटरी का सामना करने में कामयाब रहते हैं तो फिर इस सीरीज का नतीजा कुछ ही हो सकता है.

भारत की सबसे बड़ी उम्मीद चेतेश्वर पुजारा, कप्तान विराट कोहली और सलामी बल्लेबाज मुरली विजय से होंगी. पुजारा यह तीसरा साउथ अफ्रीकी दौरा है और अगर वह एक छोर से खूंटा गाढ़कर खेलने में कामयाब रहते हैं तो फिर उनके इर्द-गिर्द भारतीय बल्लेबाज एक बड़े स्कोर की ओर बढ़ सकते हैं.

अजिंक्य रहाणे इस सीरीज से पहले खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं लेकिन इस बड़े मौके पर टीम इंडिया को उनसे फॉर्म में वापस आने की उम्मीद होगी.

वहीं दूसरी ओर भारतीय पेस बैटरी भी इस वक्त बहुत ज्यादा चर्चा में है. माना जा रहा है कि मौजूदा पेस अटैक टीम इंडिया का सबसे काबिल पेस अटैक है. यानी अगर केपटाउन में परिस्थितियां मुफीद रही तो ग्रीन टॉप विकेट पर शमी, भुवनेश्वर और इशांत जैसे भारतीय गेंदबाज भी कमाल दिखा सकते हैं.

बहरहाल क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में कप्तानी मिलने के बाद विराट कोहली ने पिछले एक साल में घरेलू धरती पर तो कामयाबी के झंडे गाढ़ दिए लेकिन उनकी असली परीक्षा का वक्त शुरू हो चुका है.

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