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भारत-साउथ अफ्रीका दूसरा टेस्ट: क्या मैच शुरू होने से पहले ही हार गए थे विराट!

सेंचुरियन टेस्ट में विराट कोहली के पास जीत के लिए कोई प्लान बी नहीं था, कोहली और टीम के बाकी थिंक टैंक रहे फ्लॉप

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Jan 17, 2018 06:08 PM IST

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भारत-साउथ अफ्रीका दूसरा टेस्ट: क्या मैच शुरू होने से पहले ही हार गए थे विराट!

सेंचुरियन में टॉस की वो तस्वीर याद कीजिए. फाफ ड्यू प्लेसी और विराट कोहली के बयानों पर ध्यान दीजिए. टॉस जीतने के बाद ड्यू प्लेसी ने कहा था कि उन्हें थोड़ा तेज पिच की उम्मीद थी. लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता. सेंचुरियन की पिच जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, थोड़ी तेज होती है. इसलिए अफ्रीकी टीम ने पहले बैटिंग का फैसला किया है. विराट का चेहरा लटका हुआ था. उन्होंने कहा कि दो दिन पहले जैसी पिच थी, उससे ये बिल्कुल अलग है. इससे विराट की निराशा साफ नजर आ रही थी. उनके कहने का मतलब था कि पिच उससे अलग है, जिसके लिए उन्होंने तैयारी की. ..और उसके बाद टॉस भी हार गए!

अब जरा गौर कीजिए. पहला टेस्ट केपटाउन में हुआ था. वहां पिच पूरी तरह तेज गेंदबाजों के लिए मददगार थी. तब यह माना जा रहा था कि ऐसी पिच पर तो भारत का हारना तय है. अलग बात है कि भारतीय गेंदबाजों ने कमाल किया और टीम को मैच में बनाए रखा. गेंदबाज जिताने की कोशिश कर रहे थे और बल्लेबाज हराने पर आमादा थे. बल्लेबाज अपने इरादे में कामयाब हुए.

India's captain Virat Kohli (C) with the wicket taking bowlers Mohammed Shami (2L) Bhuvneshwar Kumar (L) and Umesh Yadav walks to the dressing room during the fourth day of the first Test between India and Sri Lanka at the Eden Gardens cricket stadium in Kolkata on November 19, 2017. / AFP PHOTO / Dibyangshu SARKAR / ----IMAGE RESTRICTED TO EDITORIAL USE - STRICTLY NO COMMERCIAL USE----- / GETTYOUT

वहां से टीम सेंचुरियन आई. सेंचुरियन की ख्याति भी तेज पिच के लिए है. साउथ अफ्रीका की तरफ से आए सारे बयान संकेत दे रहे थे कि पिच बड़ी तेज होगी. दो दिन पहले तक घास से भरी पिच थी. अलग बात है कि इसमें हरी घास कम, सूखी ज्यादा थी. लेकिन मैच की सुबह पिच पूरी तरह भूरी नजर आ रही थी. ठीक वैसी, जैसी भारत में होती है. भले ही विराट एंड कंपनी अलग तरह की पिच के लिए तैयार हो रहे थे, लेकिन इसे देखकर भी उन्हें खुशी होनी चाहिए थी. आखिर आप पूरी जिंदगी जिस तरह की पिच पर खेलते हैं, वैसी पिच मिलना अच्छी ही बात है ना! लेकिन हुआ उलटा.

ऐसा लगा, जैसे टीम इंडिया के पास कोई प्लान बी नहीं है. रवि शास्त्री, विराट कोहली और बाकी थिंक टैंक ने सिर्फ एक तरह के हालात के लिए तैयारी की थी. उन्हें ऐसी कोई उम्मीद ही नहीं थी कि पिच ऐसी भी हो सकती है. जाहिर है, मैच की सुबह विराट सहित टीम ने पिच देखी होगी. लेकिन शायद तब तक टीम का फैसला कर लिया गया था. ..और सब जानते हैं कि किस तरह की टीम का फैसला लिया गया

विराट ने दिखाया कि वो एक ‘सेटल’ टीम नहीं चाहते हैं. उनकी कप्तानी में कभी एक टीम दो टेस्ट नहीं खेली है. जो बदलाव उन्होंने सेंचुरियन के लिए किए, उसमें पिछले टेस्ट के हीरो भुवनेश्वर कुमार को बाहर कर दिया और इशांत शर्मा को ले आए. शायद ही इस तरह के मौके ज्यादा देखे गए होंगे, जब किसी ने एक टेस्ट में बेहतरीन प्रदर्शन किया हो और उसे अगले मैच में मौका नहीं मिला हो. एक बार फिर उन्होंने रोहित शर्मा को अजिंक्य रहाणे पर तरजीह दी. भारत जैसी पिच होने के नाते अश्विन के साथ एक और स्पिनर के बारे में सोचा जा सकता था, वो विराट ने नहीं किया.

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उसके बाद जब कप्तान किसी को बचाने के लिए फैसले लेने लगे, तो समझा जा सकता है कि कुछ तो गड़बड़ है. सेंचुरियन में चौथी शाम विकेट गिरने के बाद विराट ने पार्थिव पटेल को भेजा. रोहित शर्मा को बचाने के लिए. आमतौर पर शाम के वक्त अगर कोई विकेट गिरता है, तो बड़े बल्लेबाज के बजाय नाइट वॉचमैन को भेजा जाता है. लेकिन विराट ने बल्लेबाजी क्रम में रोहित से सिर्फ एक नंबर नीचे आने वाले पार्थिव पटेल को भेजा. इससे दो संकेत मिलते हैं. पहला, वो रोहित को बचाना चाहते हैं. दूसरा, पार्थिव को किसी हालत में बचाना नहीं चाहते. किसी भी कप्तान के लिए मैच के बीच इस तरह के संकेत देना अच्छा नहीं है.

विराट की पहचान आखिरी सांस तक लड़ने वाले खिलाड़ी की रही है. उन्होंने पहली पारी में अपनी बल्लेबाजी से ऐसे संकेत भी दिए. बल्लेबाजी के दौरान या फील्डिंग में वो लगातार आक्रामक दिखाई दिए. लेकिन यहां सवाल सिर्फ उनका नहीं है. यहां टीम का है, जिसमें विराट ने निराशा के साथ शुरुआत की, जो किसी हारे हुए कप्तान की निशानी है.

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