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क्या विराट कोहली वनडे के ब्रैडमैन हैं?

वनडे में विराट वो कर रहे हैं, जो किसी ने नहीं किया

Updated On: Jan 16, 2017 02:31 PM IST

Vedam Jaishankar

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क्या विराट कोहली वनडे के ब्रैडमैन हैं?

क्या विराट कोहली वनडे क्रिकेट के डॉन ब्रैडमैन हैं? इंग्लैंड को ऐसा ही सोचना चाहिए. वनडे टीम की कप्तानी संभालने वाले विराट कोहली ने 27वां वनडे शतक लगाते हुए बड़ी आसानी से 351 रन जैसा लक्ष्य पाया. सिर्फ 169वीं पारी में 27वां शतक था. इसकी वाकई इतिहास में किसी से तुलना नहीं की जा सकती.

इंग्लैंड टीम जरूर यह सोच रही होगी कि इस फॉरमेट में उनके लिए सुरक्षित स्कोर क्या है. उन्होंने टेस्ट में 400 से ऊपर का स्कोर बनाया. लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने इसे मजाक बनाकर रख दिया. अब उन्होंने सात विकेट पर 350 का वनडे स्कोर बनाया. इसे भी दो लोगों ने किनारे लगा दिया. एक ने अपनी सीमाओं को बढ़ाते हुए और दूसरे ने ऐसे, जैसा पार्क में टहलने निकला हो.

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सबसे पहले, कोहली की पॉजिटिव सोच पर बात करना जरूरी है. इस पर भी कि मैच के किस-किस मोड़ से वो खेल को बदलने की क्षमता रखत हैं. टेस्ट में उन्होंने रविचंद्रन अश्विन, जयंत यादव और रवींद्र जडेजा को चुनौती के सामने कद बड़ा करने का हौसला दिया. खुद भी वो ऐसी बैटिंग करने में कामयाब रहे, जिसने इंग्लैंड टीम की धज्जियां उड़ा दीं.

Pune: India's Virat Kohli in action during the first India-England ODI match at MCA stadium in Pune on Sunday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad  (PTI1_15_2017_000214B)

पुणे में उन्होंने छोटे कद के केदार जाधव को शुरुआती मुश्किल हालात से उबरने में मदद की. जाधव ने बेहतरीन शतक जमाया. उनके सामने जो काम था, वो लगभग नामुमकिन लग रहा था. भारतीय टीम टॉप के चार बल्लेबाजों को खो चुकी थी. शिखर धवन, केएल राहुल, युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी आउट हो चुके थे. ये सब ऐसे खिलाड़ी हैं, जो किसी गेंदबाजी का मजाक बना सकते हैं और जरूरी रन रेट पा सकते हैं. एक समय स्कोर चार विकेट पर 63 था और मुकाबले में इंग्लैंड हर तरह से हावी था.

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औसत दर्जे के खिलाड़ी इसे हारा हुआ मान लेते और या तो अगले वनडे की बैटिंग प्रैक्टिस की तरह मैच को लेते या हथियार डाल देते. लेकिन भारत के साहसी कप्तान विराट ऐसा नहीं करते हैं.

उनमें भरोसा कूट-कूट कर भरा है. उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा था कि 350 रन बन जाएंगे. इससे भी अहम कि उन्होंने अनुभवहीन जाधव में भी भरोसा भरा. इन दोनों ने जो किया, उसे इंग्लैंड लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा. इस जीत ने मेहमान टीम के मनोबल पर गहरा असर डाला होगा. देखना रोचक होगा कि इंग्लैंड टीम इससे कैसे उबर पाती है.

बल्ले से कोहली का विध्वंस उनके लिए वनडे का 27वां शतक लेकर आया. यह सिर्फ 169वीं पारी में था. इस शतक को भी सही नजरिए से देखना चाहिए. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 27 शतकों के लिए 254 पारियां खेली थीं. इतने ही वनडे शतकों के लिए रिकी पॉन्टिंग ने 308 और सनथ जयसूर्या ने 404 पारियां खेलीं.

350 रन से ज्यादा का पीछा करने में कोहली ने दो बार और शतक जमाए हैं. पुणे में उन्होंने 105 गेंदों में 122 रन बनाए हैं. इससे पहले जयपुर में विराट ने 52 गेंदों में 100 नॉट आउट रन बनाए थे. नागपुर में 66 गेंदों में 115 नॉट आउट की पारी खेली थी. दोनों पारियां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ थीं.

इंग्लैंड टीम का पूरा ध्यान विराट को रोकने या आउट करने पर था. ऐसे में जाधव ने पेस सेटर का रोल निभाया. उन्होंने 76 गेंद की पारी में 120 रन बनाए. पांचवें विकेट के लिए इन दोनों ने 146 गेंदों में 200 रन जोड़े. इस साझेदारी में रन रेट 8.16 का था.

जाधव की पारी में सिर्फ एक कमजोरी कही जा सकती है. सुपर फिट कोहली के साथ विकेटों की बीच दौड़ में वो कमजोर थे. उन्होंने अपनी बेस्ट कोशिश की. इसके बाद भी उन्हें कई बार विराट को रन लेने के लिए मना करना पड़ा. यह सही भी था क्योंकि उत्साही विराट के साथ उनका कदम ताल मिलाना आसान नहीं था.

रनिंग के अलावा बाकी हर मायने में जाधव चुनौती पर खरे उतरे. उन्होंन ताकतवर पुल किए. गेंदबाज को छकाने के लिए गेंद को उठाकर मारा. लेट कट किए. दूसरी तरफ विराट ने ऐसी बल्लेबाजी की, जैसी वही कर सकते हैं. बैकफुट पंच से एक छक्का लगाया, जो बेमिसाल था.

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