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IND vs ENG : तो क्या लॉर्ड्स टेस्ट के पोस्‍टमार्टम में निकलेगी टीम इंडिया की ये बड़ी बीमारी!

चार-पांच स्लिप, एक गली, एक पॉइंट की फील्ङिंग और वीरान ऑन-साइड को देखकर बल्लेबाज को अंदाजा हो जाना चाहिए कि उसे किस तरह की तेज गेंदबाजी का सामना करना है

Updated On: Aug 13, 2018 02:53 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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IND vs ENG : तो क्या लॉर्ड्स टेस्ट के पोस्‍टमार्टम में निकलेगी टीम इंडिया की ये बड़ी बीमारी!

बात को यूं समझने की कोशिश करते हैं. कल्पना कीजिए कि दुश्मन के खिलाफ लड़ाई शुरू हुए अभी चंद ही मिनट हुए हों और पहली पंक्ति में फ्रंट को बचाने की मुहिम की अगुआई करने वाले कमांडर शहीद हो जाएं. इंग्लैंड के दौरे पर विराट कोहली की टीम के साथ यही हो रहा है. लॉर्ड्स टेस्ट मैच में रुतबे पर कालिख पोतने वाली हार के बाद विराट कोहली की टीम का कई तरह से पोस्‍टमार्टम होगा. लेकिन सबसे अहम कमजोरी को समझना जरूरी है.

इंग्लैंड का मौसम और क्रिकेट हवा में स्विंग का हमेशा ही मजा लेते आए हैं. ऐसी परिस्थितियों में सबसे अहम जिम्मेदारी टीम के ओपनरों पर होती है कि वे अपने क्रिकेट करियर का सारा हुनर झोंक कर देर तक हवा में हिलने और जबरदस्त स्विंग की आदी ड्यूक बॉल का 15-20 ओवर तक सामना करें. स्विंग के असर को कम करने के लिए ओपनरों के लिए जरूरी होता है कि वे अपने मजबूत डिफेंस और लंबी पारी से गेंद की चमक को खत्म और उसकी शेप को प्रभावित करें.

LONDON: India's Murali Vijay is bowled by England's James Anderson during the second day of the second test match between England and India at Lord's cricket ground in London, Friday, Aug. 10, 2018. AP/PTI(AP8_10_2018_000112B)

पहले दो मैचों में भारतीय टीम ने तीन ओपनर आजमा लिए हैं. बर्मिंघम टेस्ट मैच की पहली पारी को छोड़ कर बाकी की तीन पारियों में टीम इंडिया के ओपनर महज 25-30 बॉल खेलने में भी नाकाम रहे हैं. सिर्फ यही नहीं, बर्मिंघम की उस पहली पारी के बाद ओपनरों की जोड़ी बाकी की तीन पारियों में 10 ओवर पूरे होने से पहले ही ड्रेसिंग रूम में बैठी थी.

क्या कोई टीम इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में मैच जीतने की कल्पना कर सकती है जिसके ओपनर बॉलरों के हाथों कठपुतलियों की तरह खेल रहे हों और नंबर तीन, चार और पांच के बल्लेबाजों को 10-15 ओवर के भीतर ही क्रीज पर आना पड़ रहा हो! अगले मैचों में क्या होगा, यह कोई नहीं बता सकता. लेकिन अब तक के खेल से साफ है कि टीम इंडिया के ओपनरों के सुनियोजित एनकाउंटर के बाद टॉप बल्लेबाजी के स्विंग बॉलिंग के सामने बेहद कमजोर तकनीक के पत्ते खुल गए हैं.

Cricket - England v India - Second Test - Lord’s, London, Britain - August 10, 2018 England's James Anderson celebrates the wicket of India's Ishant Sharma Action Images via Reuters/Paul Childs - RC12638E4170

चार-पांच स्लिप, एक गली, एक पॉइंट की फील्ङिंग और वीरान ऑन-साइड को देख कर किसी भी बल्लेबाज को अंदाजा हो जाना चाहिए कि उसे किस तरह की तेज गेंदबाजी का सामना करना है और उसे क्या तकनीक अपनानी है ताकि बॉल उसके बल्ले के किनारे का चुंबन किसी भी हालत में ना ले सके. असल में यह फील्ड सेटिंग टीम इंडिया को इंग्लैंड रवाना होने से पहले ही देख लेनी चाहिए थी. सवाल य़ह भी है कि इंग्लैंड दौरे से कुछ महीने पहले से क्रिकेटरों को नेट पर सिर्फ ड्यूक बॉल के सामने ही खेलने की सलाह क्या मददगार नहीं हो सकती थी?

परेशान कर देने वाला पहलू यह है कि इंग्लैंड में टीम इंडिया का खराब रिकॉर्ड सभी को मालूम है लेकिन फिर भी बेहद खराब प्लानिंग से साथ उतरना गैरपेशेवर रवैया है.

2011 से लेकर लॉर्डस टेस्ट मैच तक भारत ने इंग्लैंड में 11 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें से वह 9 हारा है. इनमें 2011 के लॉर्डस टेस्ट मैच की पहली पारी में 18.2 ओवर में टीम का पहला विकेट 63 रन पर गिरा था. उसके बाद जो आठ मैच टीम हारी है उसमें 11 पारियों में इंग्लैंड के गेंदबाज ओपनरों की जोड़ी को पहले 5 ओवर के भीतर तोड़ने में सफल रहे.

Cricket - England v India - Second Test - Lord’s, London, Britain - August 12, 2018 India's Virat Kohli reacts before receiving treatment from medical staff for a back injury Action Images via Reuters/Paul Childs - RC14B1BA2B20

क्रिकेट के लिहाज से देखा जाए तो इन सभी हारे मैचों में नंबर तीन या चार को जल्दी क्रीज पर आकर ओपनर की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और उनका खेल बुरी तरह प्रभावित हुआ. बात सिर्फ पिछले आठ साल की ही नहीं है. टीम इंडिया अभी तक इंग्लैंड में 59 टेस्ट मैच खेली है और उनमें सिर्फ 6 जीते और 32 हारे हैं, जबकि 21 ड्रॉ रहे. विराट की टीम को 18 अगस्त से नॉटिंघम में तीसरा टेस्ट मैच खेलना है. जाहिर है कि मौजूदा परिणामों के बाद टीम के सदस्यों की मनोस्थिति वैसी नहीं रहेगी जैसी हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरते वक्त थी.

टीम से साथ इस समय एक हेड कोच है, एक बैटिंग कोच, एक फील्डिंग कोच, एक बॉलिंग कोच और एक ट्रेनर हैं. कोचों की इस पलटन में टीम इंडिया की हालत देखने का बाद लग रहा है कि उसे तुरंत ही स्विंग कोच की जरूरत है जो उसके बल्लेबाजों को बता सके की हवा में सांप की चाल की तरह आने वाली गेंद का सामना कैसे करना चाहिए!

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