S M L

नौ ओवर, 44 रन... सीरीज से सेवा समाप्त... यह है कुलदीप यादव की कहानी

कुलदीप यादव की जगह टीम में हनुमा विहारी को जगह दी गई है

Updated On: Aug 23, 2018 03:53 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

0
नौ ओवर, 44 रन... सीरीज से सेवा समाप्त... यह है कुलदीप यादव की कहानी

तीन टेस्ट में 1-2 से पीछे होने के बाद भारतीय चयनकर्ताओं ने आखिरी दो टेस्ट मैचों के लिए टीम चुनी है. दो बदलाव किए हैं. पहला, मुरली विजय की जगह पृथ्वी शॉ और दूसरा कुलदीप यादव की जगह हनुमा विहारी. क्या इन दोनों बदलावों की जरूरत थी? मुरली विजय दो टेस्ट की चार पारी खेले थे. कुल 26 रन बनाए. इसमें अगर 20 रन की एक पारी निकाल दें, तो तीन पारियों में उनके कुल जमा छह रन थे.

विजय की इस नाकामी के बाद अच्छा है कि एक युवा खिलाड़ी को टीम के ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा. ऐसा लगता नहीं कि कम से कम चौथे टेस्ट में पृथ्वी शॉ को मौका मिलने वाला है. लेकिन उन्हें सीनियर टीम के साथ रहने से काफी कुछ सीखने को मिलेगा.

दूसरी तरफ कुलदीप यादव हैं. ध्यान होगा कि कुलदीप यादव को लेकर पहले विवाद हो चुका है. यह तब की बात है, जब अनिल कुंबले कोच थे. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची टेस्ट में कुंबले चाहते थे कि कुलदीप यादव टीम का हिस्सा बनें. लेकिन कप्तान नहीं चाहते थे. उसके बाद कोहली चोट की वजह से बाहर हुए, तो कुलदीप यादव को टीम में लिया गया. इस पूरे मामले की पूरी सच्चाई तो कुंबले या कोहली ही जानते होंगे. लेकिन उसके कुछ समय बाद कुंबले कोच नहीं रहे. कुलदीप यादव जरूर टीम का हिस्सा बने रहे.

India's Kuldeep Yadav (2nd R) celebrates with teammates after taking the wicket of England's Jonny Bairstow during the One Day International (ODI) cricket match between England and India at Trent Bridge in Nottingham central England on July 12, 2018. / AFP PHOTO / Anthony DEVLIN / RESTRICTED TO EDITORIAL USE. NO ASSOCIATION WITH DIRECT COMPETITOR OF SPONSOR, PARTNER, OR SUPPLIER OF THE ECB

इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट में कोहली की इस बात को लेकर आलोचना हुई कि कुलदीप यादव को टीम में क्यों शामिल नहीं किया गया. उस टेस्ट में स्पिनर्स के लिए मदद थी. दूसरे टेस्ट में उन्हें लिया गया. हालांकि तब स्पिनर की जरूरत नहीं थी. दूसरे टेस्ट में पिच और माहौल तेज गेंदबाजों के लिए मददगार था. कुलदीप को सिर्फ नौ ओवर गेंदबाजी करने का मौका मिला. वो कतई सहज नहीं दिखाई दिए. इन नौ ओवर में 44 रन दिए. इसी के साथ उनका खेल खत्म हो गया. उन्हें तीसरे टेस्ट की टीम से बाहर किया गया और उसके बाद अब वो 18 सदस्यीय टीम का हिस्सा भी नहीं हैं.

यह सही है कि कुलदीप यादव को ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ टीम में लिया गया है. अगर टीम मैनेजमेंट ने तय कर लिया हो कि आगे उन्हें मौका नहीं दिया जाएगा, तब भारत ए के लिए खेलना यकीनन बेहतर विकल्प है. शायद टीम मैनेजमेंट से बात करके ही चयनकर्ताओं ने फैसला किया होगा.

पिछले दिनों दिलीप दोशी ने एक इंटरव्यू मे कहा था कि कुलदीप यादव अभी गेंदबाज के तौर पर मैच्योर नहीं हैं, वो ‘रॉ’ यानी कच्चे हैं. यह बात हर वो शख्स मानेगा, जिसने इंग्लैंड में टेस्ट के दौरान उन्हें बॉलिंग करते देखा होगा. ओवर में एक बेहद कमजोर बॉल तो वो कर ही रहे थे. लेकिन ध्यान रखिए कि जब माहौल किसी भी तरह से आपके लिए मददगार न हो, तो युवा गेंदबाज के लिए गेंदबाजी आसान नहीं होती. ..और अगर गेंदबाज के साथ कप्तान का भरोसा न हो, तब तो हालात और मुश्किल हो जाते हैं. कुलदीप के साथ कुछ ऐसी ही होता दिखाई दे रहा है.

इंग्लैंड में पहली बार किसी स्पिनर ने टी20 मैच में 5 विकेट हासिल किए.

हालांकि कुलदीप यादव ने तीन टेस्ट खेले हैं. लेकिन इंग्लैंड में खेले एक टेस्ट का तो खेलना या न खेलना एक जैसा है. बाकी बचे दो टेस्ट में उन्होंने नौ विकेट लिए हैं. औसत खराब नहीं है. दो बार पारी में चार विकेट ले चुके हैं. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि चंद महीनों में जीवन के 24 साल पूरे करने वाले कुलदीप यादव को वक्त और भरोसा दोनों की जरूरत है. वो टीम में नहीं हैं. उम्मीद है कि इस तरह वापस भेजे जाने से भरोसा नहीं टूटेगा, बल्कि वो वापसी की कोशिश में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे. वैसे भी ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ मुकाबले वाइजैग यानी अपने घर में हैं. यहां के हालात मे बेहतर प्रदर्शन के साथ वो टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीतने की कोशिश करेंगे.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi