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भारत-इंग्लैंड, क्रिकेट सीरीज : विराट अपने नाती-पोतों को सुनाएंगे चूकने की कहानी!

भारतीय खेलों का इतिहास चूकने की कहानी से भरा हुआ है, 2018 क्रिकेट में चूकने के लिए याद किया जाएगा

Updated On: Sep 03, 2018 09:58 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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भारत-इंग्लैंड, क्रिकेट सीरीज : विराट अपने नाती-पोतों को सुनाएंगे चूकने की कहानी!

58 साल बीत गए हैं. आज भी हम 1960 के ओलिंपिक्स की कहानी सुनते हैं कि कैसे मिल्खा सिंह बस, जरा सा चूक गए. वरना मेडल आ जाता. 38 साल हो गए. हम बताते हैं कि 1984 के लॉस एंजिलिस में पीटी उषा मेडल के कितना करीब थीं. बस, जरा....सा रह गईं. 18 साल हो गए. हम बताते हैं कि सिडनी ओलिंपिक्स में भारतीय हॉकी टीम सेमीफाइनल के कितना करीब थी. बस, एक मिनट 46 सेकेंड तक गोल नहीं खाना था.

इन कहानियों में एक क्रिकेट की कहानी भी है. 21 साल पहले की कहानी. वेस्ट इंडीज में जीत के लिए सिर्फ 120 रन की दरकार थी. भारतीय टीम 81 रन पर ढेर हो गई. यहां भी, बस जरा से अंतर से हम इतिहास रचने से चूक गए.

2018 है भारतीय क्रिकेट में चूकने की कहानी का साल

2018 की कहानी भी सुनाई जाएगी. सिर्फ हम-आप ही नहीं, कुछ समय में विराट एंड कंपनी को भी समझ आएगा कि उन्होंने क्या गंवाया है. उनके पास दुनिया फतह करने का मौका था. उनके पास तेज गेंदबाजों का ऐसा जखीरा था, जिसकी बदौलत वो दुनिया जीत सकते थे. वो जीत सकते थे दक्षिण अफ्रीका... वे जीत सकते थे इंग्लैंड. इससे ज्यादा और किसी को वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए और क्या चाहिए!

क्रिकेट महज रैंकिंग में नंबर वन का गेम नहीं हो सकता. यहां नंबर वन के लिए क्लाइव लॉयड की वेस्ट इंडीज या कुछ समय तक ऑस्ट्रेलियाई टीम जैसा खेली, वैसा खेलना पड़ेगा. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के लिए भी दुनिया फतह करने वाली बात पर अगर-मगर, किंतु-परंतु जुड़ते हैं. विराट की टीम के साथ नहीं जुड़ते. उन्हें एशिया के बाहर का चैंपियन माना जाता. लेकिन नहीं हो सका.

इतनी कमजोर इंग्लैंड टीम के खिलाफ मौका शायद फिर न मिले

इतने कमजोर टॉप ऑर्डर वाली इंग्लैंड टीम भारत को शायद ही पहले कभी मिली होगी और शायद ही आगे कभी मिलेगी. ओपनर कुछ कर नहीं रहे हैं. मिडिल ऑर्डर में जो रूट जरूर हैं, लेकिन उनके अलावा और कोई दिख ही नहीं रहा. ऐसा लग रहा है कि नंबर पांच के बाद बैटिंग शुरू हो रही है.

भारत के पास लगातार मौका था. बर्मिंघम टेस्ट महज 31 रन से हारी थी टीम इंडिया. साउथैंप्टन में शुरुआत पर नजर डालें. 86 पर इंग्लैंड के छह विकेट निकाल दिए थे. वहां से कोई चैंपियन टीम सामने वाली टीम को मौका नहीं देती. लेकिन भारत ने दिया. नतीजा यह है कि करीबी दिखने वाले टेस्ट में हार का अंतर 60 रन जैसा है, जो काफी बड़ा नजर आता है. सीरीज हमने एक टेस्ट बाकी रहते गंवा ही दी है.

England's Moeen Ali (C) celebrates with teaammates after taking the wicket of India's Ajinkya Rahane for 21 during the fourth day of the fourth Test cricket match between England and India at the Ageas Bowl in Southampton, southwest England on September 2, 2018. / AFP PHOTO / Glyn KIRK / RESTRICTED TO EDITORIAL USE. NO ASSOCIATION WITH DIRECT COMPETITOR OF SPONSOR, PARTNER, OR SUPPLIER OF THE ECB

आखिर क्या है वजह? अब तक हम बता रहे थे कि इंग्लैंड में गेंद बहुत स्विंग होती है. वो तो अपनी धरती पर अच्छा नहीं खेल रहे. ऐसे में अगर भारतीय बल्लेबाज फेल हुए हैं, तो इतनी आलोचना क्यों! इस बयान को साउथैंप्टन से जोड़कर देखिए, जहां गेंद ज्यादा स्विंग नहीं हो रही थी. यहां की पिच एशिया पिचों के करीब थी. वहां भी भारतीय बैटिंग लाइन-अप ने मैच गंवा दिया.

आखिरी पांच बल्लेबाजों ने किया है सीरीज का फैसला

दरअसल, भारतीय टीम इंग्लैंड के निचले क्रम से हारी है. उनका टॉप ऑर्डर तो हमसे खराब ही है. इस सीरीज में भारत का बल्लेबाजी औसत 22.36 है. उमंग पाबरी के मुताबिक इंग्लैंड के नंबर सात से नंबर 11 का औसत 27.88 है. फर्क समझ लीजिए.

इसी को कुछ यूं भी समझा जा सकता है, जो आंकड़ा रजनीश गुप्ता ने दिया है. भारत के टॉप फाइव का औसत 29.22 और इंग्लैंड के टॉप फाइव का 27.68 है. भारत के आखिरी पांच का औसत 17.35 और इंग्लैंड का 27.78 है. यह इस फर्क को और साफ कर देता है. लेकिन इसका तोड़ क्या है?

सुनील गावस्कर ने मैच खत्म होने के बाद पोस्ट मैच एनालिसिस टीम मैनेजमेंट पर बात की. उन्होंने कहा कि हार्दिक पांड्या को जब तक ऑलराउंडर मानते रहेंगे, समस्या नहीं सुलझेगी. पांड्या ऑलराउंडर नहीं हैं. अश्विन भारत में तो ऑलराउंडर का रोल निभा सकते हैं, लेकिन विदेश में नहीं. गावस्कर के मुताबिक अगर आप पांच बल्लेबाजों के साथ खेलेंगे, तो इस तरह की दिक्कत आएगी ही.

टीम मैनेजमेंट की सेलेक्शन पॉलिसी भी है हार की जिम्मेदार

यहां पर मुद्दा सिर्फ पांच बल्लेबाजों का नहीं है. मुद्दा सही सेलेक्शन का भी है. अजिंक्य रहाणे पर रोहित शर्मा को दक्षिण अफ्रीका में तरजीह दी गई. जबकि हर कोई जानता है कि विदेश में रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे की कोई तुलना ही नहीं है. चेतेश्वर पुजारा के साथ इंग्लैंड में जो हुआ, वो मनोबल गिराने वाला ही है. कुलदीप यादव को उस टेस्ट में खिलाया, जहां स्पिनर्स के लिए कुछ नहीं था. जहां स्पिनर्स को मदद मिलनी थी, वहां वो प्लेइंग इलेवन क्या, पूरे स्क्वॉड का हिस्सा नहीं थे.

Cricket - England v India - First International T20 - Emirates Old Trafford, Manchester, Britain - July 3, 2018 India's Kuldeep Yadav applauds the fans Action Images via Reuters/Ed Sykes - RC12BA352720

कुलदीप यादव.,

इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय ओपनर्स अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे. इसमें कोई शक नहीं कि मिडिल ऑर्डर में विराट के अलावा कोई कंसिस्टेंट नहीं है. लेकिन इसके लिए उन खिलाड़ियों के साथ कप्तान विराट और कोच रवि शास्त्री भी जिम्मेदार हैं, जो उन खिलाड़ियों को भरोसा नहीं दे पाए हैं. 38 टेस्ट के बाद विराट ने इस बार कोई टीम लगातार दो टेस्ट मैचों में खिलाई. इससे समझ आता है कि किस तरह का बदलाव विराट पसंद करते हैं. एक तरह से अकेले वही हैं, जिसकी टीम में जगह पक्की है.

ये सब अभी शायद समझ नहीं आए. समझ आएगा, जब सिर पर बाल कम हो गए होंगे. बालों का रंग काले से बदलकर सफेद हो गया होगा. मुंह से अच्छे या बुरे, किसी भी तरह के काम के लिए गाली निकलनी कम हो गई होगी. तब जब शायद अपने लॉन में बैठकर खाली समय में सोचेंगे, तब समझ आएगा कि 2018 में क्या पाया जा सकता था, जो गंवा दिया.

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