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भरोसा रखिए, ट्रेंट ब्रिज में रुतबे की खातिर जोहानसबर्ग जैसा खेलने में काबिल है टीम इंडिया

साउथ अफ्रीका के दौरे पर पहले दो टेस्ट हारने के बावजूद टीम इंडिया ने तीसरे टेस्ट में जीत हासिल की, टीम को उसी मानसिक सोच के साथ नॉटिंघम में उतरना होगा

Updated On: Aug 17, 2018 11:24 AM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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भरोसा रखिए, ट्रेंट ब्रिज में रुतबे की खातिर जोहानसबर्ग जैसा खेलने में काबिल है टीम इंडिया
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अभी बीती जनवरी की ही बात है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ सभी ने टीम इंडिया को केपटाउन और सेंचुरियन में सद्दाम हुसैन की रिपब्लिकन गार्ड आर्मी की तरह हथियार डालते देखा था. उसके बाद लेवल लगा दिया गया कि विराट कोहली की टीम सिर्फ सपाट पिचों पर ही चमत्कार दिखाती है.

यह सही है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में टीम इंडिया सिर्फ एक बार ही 300 रन के स्कोर को पार कर पाई. लेकिन उसने जोहानसबर्ग में तेज गेंदबाजों की मुरीद बेहद मुश्किल पिच पर 187 और 247 रन के  औसत स्कोर के बावजूद तीसरा मैच जीता.

टीम की क्षमता और हाल ही में उसकी पलटवार करने के जज्बे को देखते हुए उसे सिरे से नकार देना गलत होगा. सभी देख चुके हैं कि इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने बर्मिंघम और लॉर्ड्स टेस्ट में भारतीय बल्लेबाजों को क्या हाल किया. साफ दिखा कि विकेटकीपर और स्लिप के फील्डरों को छोड़कर मैदान पर किसी दूसरे फील्डर की जरूरत ही नहीं हैं.

यकीनन नंबर वन टेस्ट टीम का तमगा लिए भारतीय टीम की हालत लड़ाई में आत्मसमर्पण किए हुए सैनिकों की तरह थी. लेकिऩ ऐसा भी नहीं था कि उसके पास मेजबान टीम को नुकसान पहुंचाने और खुद को बुरे हालात में निकालने का मौका नहीं था. दोनों मैचों में कुछ सत्र ऐसे भी थे जिसमें इंग्लैंड ने भी हथियार डालने के संकेत दिए.

Cricket - India Nets - Trent Bridge, Nottingham, Britain - August 16, 2018   India's Virat Kohli, head coach Ravi Shastri and team mates during a minutes silence in memory of former India player Ajit Wadekar during nets   Action Images via Reuters/Paul Childs - RC18E9928B30

बर्मिंघम में भारतीय गेंदबाजों नें पहली पारी इंग्लैंड का स्कोर 300 पहुंचने से पहले सारे दस विकेट हासिल कर लिए थे. दूसरी पारी में एक समय इंग्लैंड का स्कोर 85 पर पांच विकेट था. लेकिन वे 20 साल के युवा बल्लेबाज सैम करन का विकेट सही समय पर लेने में नाकाम रहे. उसके बाद बल्लेबाजों ने दगा दे दिया.

लॉर्ड्स की पहली पारी में भी इंग्लैंड के 89 पर चार विकेट गिर गए थे. लेकिन टीम इंडिया इस स्थिति को भुनाने में नाकाम रही. मैदान से बाहर अदालती लड़ाई लड़ रहे बेन स्टोक्स की जगह खेलने आए क्रिस वोक्स और जेम्स बेयरस्टो सातवें विकेट के लिए 189 रन की पारी खेल गए. वोक्स 137 पर नाबाद लौटे.

शर्मसार करने वाला यह रहा कि टीम इंडिया दोनों पारियों में इंग्लैंड की पहली पारी के 396 के करीब ही नहीं पहुंच सकी. लेकिन क्रिकेट बॉलीवुड की तरह हैं. यहां जरूरी नहीं कि लगातार सारी फिल्में फ्लॉप हो जाएं. गेंदबाज जबरदस्त फॉर्म में हैं. बस बल्लेबाजों को उनकी मेहनत की इज्जत रखनी है.

लड़खड़ाने के बाद संभल जाती है इंग्लैंड की टीम

पहले दो टेस्टों में इंग्लैंड की टीम भी कई मौकों पर लड़खड़ाई है. फर्क सिर्फ इतना है कि वह संभलने में कामयाब रही और भारतीय नाकाम रहे. फिर भी मान लेना कि हमेशा ऐसा ही होता रहेगा. यह सही नहीं है.

पहले दो टेस्ट मैचों में टीम को अपनी दिक्कतें साफ दिखी हैं. हर बार स्लिप की ओर या विकेटकीपर के दस्तानों में जाने वाली यह परेशानी साफ दिख रही है. ऐसे में उम्मीद करना जायज है कि सुधार के लिए मेहनत जरूर हुई होगी.

इंग्लैंड के दौरे पर रवाना होने से पहले टीम इंडिया टेस्ट क्रिकेट की बेहतरीन यूनिट थी. कुछ सदस्यों को छोड़ कर सभी के पास टेस्ट मैच खेलने का काफी मजबूत अनुभव है.

जाहिर है कि बल्लेबाजों को यह ठान कर ट्रेंट ब्रिज की पिच पर उतरना होगा कि उन्हें अपनी विकेट सस्ते में नहीं देनी है और स्लिप या विकेट के पीछे तो कतई ही नहीं.

Cricket - England v India - Second Test - Lord’s, London, Britain - August 12, 2018   England's Ollie Pope celebrates with team mates after taking a catch to win the test   Action Images via Reuters/Paul Childs - RC1288160CB0

नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में पिचों का स्क्वायर तेज गेंदबाजों का गुलाम जरूर है. लेकिन वह स्पिनरों को भी उनकी मेहनत का बराबर का इनाम देता आया है. इंग्लैंड इस मैदान पर आखिरी टेस्ट मैच पिछले साल जुलाई में साउथ अफ्रीका से खेली थी और इसमें दोनों ओर के स्पिनर केशव महाराज और मोईन अली तेज गेंदबाजों से दस विकेट छीन लेने में सफल हुए थे.

वैसे इसी दौरे पर भारत ने इस मैदान पर वनडे मैच खेला और जीता है. उस मैच में कुलदीप यादव ने 10-0-25-6 का स्पैल डाला था. साफ है कि इस समय टीम इंडिया का जो स्तर है, उसे नॉटिंघम में पलटवार का जज्बा दिखाना ही होगा. अगर ऐसा न हुआ तो पूरी टीम को फिर वही ताना झेलना पड़ेगा कि, ये सारे तो घर के ही कागजी शेर हैं.

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