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भारत-ऑस्ट्रेलिया, दूसरा टेस्ट: एक और अच्छा सेशन... और मैच ऑस्ट्रेलिया के नाम

भारत ने सब कुछ नहीं गंवाया है, लेकिन वापसी बेहद मुश्किल

Prem Panicker Updated On: Mar 04, 2017 06:08 PM IST

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भारत-ऑस्ट्रेलिया, दूसरा टेस्ट: एक और अच्छा सेशन... और मैच ऑस्ट्रेलिया के नाम

कहा जाता है कि क्रिकेट दिमाग का खेल है. भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन ये बात साबित भी हुई. सीरीज में 1-0 की बढ़त लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया यकीनन उत्साहित है. उसने ऐसे गेंदबाजी की, जैसे वो मेजबान हों. जैसे वो फेवरिट हों. स्टार्क को तीन-तीन ओवर के छोटे-छोटे स्पैल में इस्तेमाल किया गया. उनकी गेंदबाजी में रफ्तार थी. सटीकता थी.

हेजलवुड सधे हुए और अंकुश लगाने वाले साबित हुए. स्टीव ओ’कीफ ने ने रन रोकने वाले स्पिनर का रोल बहुत अच्छी तरह अदा किया. जब उन्होंने पवेलियन छोर से गेंदबाजी की, तो उन्हें टर्न और बाउंस मिला.

नैथन लायन ने ऑस्ट्रेलिया के कुल 71.2 ओवर्स में से 22.2 ओवर गेंदबाजी की. उनकी गेंदबाजी शानदार थी. पहली गेंद से वो परफेक्ट लेंथ से गेंदबाजी कर रहे थे. उन्होंने गेंद को फुल लेंथ पर रखा. लाइन हमेशा ऑफ स्टंप या उसके आसपास रही. उनकी गेंदों में बाउंस था. गेंद कमर की ऊंचाई तक उठी. उन्हें टर्न मिला.

लायन ने लेग साइड पर दो नजदीकी फील्डर रखकर गेंदबाजी की. इससे उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों के लिए पैड्स से यानी ऑन साइड पर खेलने का विकल्प खत्म किया. उनकी लाइन-लेंथ बहुत अच्छी थी. उनकी गेंदबाजी सटीक थी. उन्होंने बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा. लायन ने 50 रन देकर आठ विकेट लिए, जो उनके करियर की बेस्ट बॉलिंग है. इस मैदान पर किसी भी गेंदबाज की ये बेस्ट बॉलिंग है. इसके वो हकदार थे. उन्होंने हर गेंद पर बल्लेबाज को परेशानी में डाला.

दूसरी तरफ, भारतीय टीम अपने रंग में नहीं थी. उनकी पारी में भरोसे की कमी थी. अपनी क्षमताओं पर भरोसा नहीं था. स्पिन को कैसे खेलना है, इसे लेकर आश्वस्ति का भाव नहीं था. ये बातें पुजारा, अश्विन और इशांत शर्मा के आउट होने से साबित होती हैं, जो लेग ट्रैप में फंसकर आउट हुए. कोहली एक बार फिर लाइन का अंदाजा लगाने में चूक गए. उन्होंने कोई शॉट नहीं खेला. वो लेग ट्रैप से बचना चाहते थे.

रहाणे और बेकरार जैसे दिखे. पिच पर वो आगे बढ़े और पूरी तरह गेंद ने उन्हें छका दिया. जब ये सब चल रहा था तब एक दोस्त और साथी क्रिकेट लेखक ने मुझे मेल किया. उन्होंने लिखा, ‘ज्यादा समय पहले की बात नहीं है कि हमारे पास विपक्षी स्पिनर्स के सामने सहवाग, गंभीर, द्रविड़, सचिन, सौरव और वीवीएस होते थे. अब ये हैं.’

एक तरह से देखा जाए, तो उस टीम के लिए ये आलोचना थोड़ी ज्यादा लगती है, जिसने अब तक सब कुछ जीता ही था. लेकिन ये बात सही है कि स्पिन को खेलने में वो भरोसा इस टीम में नहीं है. इसी की बात मेरे दोस्त ने मेल पर की थी. इस मामले में उन्हें न्यूजीलैंड, इंग्लैंड या बांग्लादेश ने लंबे घरेलू सीजन में चुनौती नहीं दी थी. लेकिन अब उनके सामने स्तरीय स्पिनर हैं. ऐसे स्पिनर, जो सटीक हैं. जिनका पूरा नियंत्रण है. ऐसे स्पिनर्स के सामने उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कैसे डील किया जाए.

इस बीच केएल राहुल को श्रेय दिया जाना चाहिए. पुणे में वही थे, जिन्होंने अपना विकेट एक तरह से फेंक दिया था. उसके बाद पूरी टीम ढह गई थी. उस समय कहा गया था कि उन्हें अपने विकेट की परवाह नहीं है. राहुल ने सबक सीखा है. यहां उन्होंने पूरी तन्मयता दिखाई. एक तरफ जब विकेट गिर रहे थे, वो दूसरे छोर पर डटे रहे. आखिर उन्होंने स्लॉग खेला. वो तब, जब नंबर दस बल्लेबाज के साथ खेल रहे थे. वो शतक से सिर्फ दस रन पीछे रह गए.

जब अपनी बारी आई, ऑस्ट्रेलियन ओपनर्स वॉर्नर और रेनशॉ ने मिशन का पहला पार्ट पूरा किया. उन्होंने दिन के बचे हुए 16 ओवर खेले. रन बनाने का मौका आया, तो बनाए. वे अब भी क्रीज में हैं. मैच की दूसरी सुबह वे अपना काम आगे बढ़ाएंगे. इसके लिए दोष अजिंक्य रहाणे का भी है, जो स्लिप में थे. उन्होंने डाइव किया था, दोनों हाथों में गेंद आई. वॉर्नर का कैच था. वो तब नौ रन पर थे. उन्होंने मौका गंवा दिया.

मैच से एक दिन पहले स्टीव स्मिथ ने कहा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी हासिल करने से एक या दो सेशन दूर है. अभी पहला दिन ही खत्म हुआ है. इसलिए पूरे भरोसे से कुछ कहना ठीक नहीं. लेकिन आपको इतना तो कहना ही पड़ेगा कि तीनों सेशन ऑस्ट्रेलिया के नाम रहे हैं. भारत के पास अब भी मैच में आने का मौका है. लेकिन अब मेजबान टीम को ही वापसी की कोशिश करनी पड़ेगी. एक और अच्छा सेशन  इस मैच को ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में तय कर देगा.

 

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