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भारत-ऑस्ट्रेलिया, पहला टेस्ट: क्या हम बेहतर हैं, इसलिए हारे?

विराट बोले - टर्न हमारे गेंदबाजों ने ज्यादा कराया, विकेट उन्हें ज्यादा मिले

Updated On: Feb 25, 2017 04:40 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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भारत-ऑस्ट्रेलिया, पहला टेस्ट: क्या हम बेहतर हैं, इसलिए हारे?

मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली से प्रेस कांफ्रेंस में एक सवाल पूछा गया. सवाल स्पिनर्स के बारे में था. जाहिर है, तीन दिन पहले अगर स्पिनर्स की तुलना करनी होती, तो आर. अश्विन, जयंत यादव और रवींद्र जडेजा के सामने नैथन लायन और स्टीव ओ’कीफ कहीं नहीं टिकते. लेकिन तीन दिन ने सब कुछ बदल दिया.

विराट इसी मुद्दे पर जवाब दे रहे थे. उनके चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी. उन्होंने कहा, ‘टर्न हमारे स्पिनर्स ने ज्यादा कराया. विकेट उन्हें ज्यादा मिले.’ विराट के इस कमेंट में दोनों टीमों के स्पिनर्स की कामयाबी और नाकामी की दास्तां छुपी है.

आर. अश्विन ने मैच में 182 रन देकर सात विकेट लिए. जयंत यादव ने 101 रन देकर दो कामयाबी पाई. तीसरे स्पिनर रवींद्र जडेजा को 139 रन देकर पांच विकेट मिले. यानी तीनों स्पिनर्स ने 422 रन दिए और 14 विकेट लिए. दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया के लिए ओ’कीफ ने 70 रन देकर 12 विकेट लिए. नैथन लायन ने 74 रन देकर पांच विकेट लिए. दोनों ने 144 रन दिए और 17 विकेट लिए. ये दोनों टीमों के स्पिनर्स के बीच का फर्क था.

इस रिकॉर्ड से लगता जरूर है कि भारतीय स्पिनर्स के मुकाबले मेहमान बेहतर हैं. लेकिन असली कहानी विराट कोहली के कमेंट में छिपी हुई है. भारतीय स्पिनर्स ज्यादा टर्न करा रहे थे. ज्यादा टर्न का मतलब है कि ज्यादातर गेंदें बल्लेबाजों को छकाते हुए जा रही थीं.

दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियन स्पिनर कम टर्न करा रहे थे. यानी भारतीयों को खेलने पर मजबूर कर रहे थे. इसमें भारतीय बल्लेबाज फंसते चले गए. ये तो हम सब समझ ही गए होंगे कि वर्तमान भारतीय टीम उस परंपरा से नहीं आती, जहां हम मान लिया करते थे कि भारतीय बल्लेबाज हैं तो स्पिनर को अच्छा खेलेंगे ही. ऐसे में ये दोनों वजहें रहीं, जो गेंदबाजी का फर्क बनीं.

हम इस तरह की बातें अक्सर तेज गेंदबाजों के बारे में देखते रहे हैं. जहां पिच में उछाल या स्विंग होता है, वहां कई बार जो सबसे अच्छा गेंदबाज दिख रहा हो, उसे विकेट नहीं मिलता. वजह यही होती है कि गेंद बल्लेबाज को छकाती है. उसके बल्ले का किनारा नहीं लेती. उसे खेलने पर मजबूर नहीं करती.

यही बात स्पिन में पुणे जैसी विकेट के लिए कही जा सकती है. पिच भारतीयों के लिए बनाई गई थी. लेकिन इसे कैसे इस्तेमाल करना है, इसे ऑस्ट्रेलियन ने ज्यादा अच्छी तरह सीखा.  हमारे पास अब भी विपक्षी से बेहतर स्पिनर्स हैं. लेकिन अच्छा होना और अच्छा प्रदर्शन करना दो अलग बातें हैं.

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