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भारत-ऑस्ट्रेलिया, तीसरा टेस्ट: इस ड्रीम स्क्रिप्ट का श्रेय पुजारा को जाता है

तीसरे टेस्ट का चौथा दिन भारत के लिए 'ड्रीम स्क्रिप्ट' लेकर आया

Prem Panicker Updated On: Mar 19, 2017 06:29 PM IST

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भारत-ऑस्ट्रेलिया, तीसरा टेस्ट: इस ड्रीम स्क्रिप्ट का श्रेय पुजारा को जाता है

अगर भारत को फिल्म से जुड़ी पसंदीदा स्क्रिप्ट मिलती, तो कुछ इस तरह शुरू होती. भारत ने दिन शुरू किया, तो 91 रन पीछे थे. सिर्फ चार विकेट सुरक्षित थे. उसने 243 रन और बनाए. सिर्फ तीन विकेट खोए. इस स्कोर में एक बल्लेबाज का शानदार दोहरा शतक शामिल है. एक और बल्लेबाज का शतक शामिल है. एक और बल्लेबाज का जोरदार अर्ध शतक शामिल है.

इस प्रक्रिया में साफ हुआ कि अगर किसी ट्रैक पर मेहमान टीम 400 प्लस का स्कोर बनाती है, तो घरेलू टीम उस पर 600 बना सकती है. उसके बाद भी उनके टैंक में थोड़ा पेट्रोल बचा होगा. वो फिर 150 प्लस रन से बढ़त के बाद पारी घोषित कर देगी. इसके बाद भी कुछ ओवर बच जाएंगे. फिर इसके बाएं हाथ स्पिनर का रोल आएगा, जिसने 50 रन देकर पांच विकेट लिए थे और 51 रन बनाए थे. वो गेंदबाज आएगा और विपक्षी टीम के ओपनर को आउट कर देगा. उसके बाद नाइट वॉचमैन को भी पवेलियन भेज देगा.

पुजारा की पारी लक्ष्मण के 281 रन के बराबर

इन सबको एक फैक्ट में तब्दील करना हो, तो इस कहानी का श्रेय एक आदमी को जाता है. चेतेश्वर पुजारा. पुजारा बैटिंग करते रहे... करते रहे... करते रहे. किसी भी भारतीय बल्लेबाज से ज्यादा समय क्रीज पर बिताया. कभी भी किसी भारतीय बल्लेबाज से ज्यादा गेंद खेलीं. ऐसी पारी, जिसमें धैर्य और तन्मयता का पहाड़ था. पुराने जमाने की टेस्ट बैटिंग मास्टर क्लास इसे कहा जा सकता है. इस पारी ने जिस तरह टेस्ट का रुख मोड़ा, उसे 15 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ वीवीएस लक्ष्मण की 281 रन की पारी के साथ रखा जा सकता है.

लेकिन ये टेस्ट सिर्फ पुजारा के लिए नहीं है. इस वजह से नहीं कि पुजारा को अगर मौका मिलता तो इसी तरह वो पांच दिन खेल लेते. ज्यादा अहम ये है कि उन्होंने साहा में भरोसा भरा कि वो भी लंबी पारी खेल सकते हैं.

पुजारा ने साहा में भी भरा भरोसा

171वें ओवर में एक मौका था, जब साहा थोड़े भटके हुए लग रहे थे. ऑस्ट्रेलिया ने एक छोर से स्पिन और दूसरे से तेज गेंदबाजी की. इससे भारत को हर रन के लिए मेहनत करनी पड़ी. ऐसा लगा कि साहा दबाव महसूस कर रहे हैं.

इस ओवर में ओ’कीफ ने लगातार लेग स्टंप के बाहर गेंद की. पुजारा लगातार पैड से गेंद को लगने देते रहे. साहा आगे बढ़कर बड़ा स्ट्रोक खेलने आए. रफ से, स्पिन के खिलाफ उन्होंने खेला. गेंद मिड विकेट से थोड़ा दूर रह गई. अगली गेंद पर वो फिर आगे आए. वही शॉट खेलने की कोशिश की. बाहरी किनारा लेकर गेंद दूसरी तरफ चली गई. किस्मत वाले थे कि गेंद मिड ऑफ के पीछे गिरी.

Ranchi: Indian batsman Cheteswar Pujara greets his teammate Wriddhiman Saha after he complete his century during 4th days play of 3rd test match against Australia in Ranchi on Sunday. PTI Photo by Swapan Mahapatra(PTI3_19_2017_000101B)

बैट्समैन ने तीन रन लिए. पुजारा ने तुरंत अपने पार्टनर को बुलाया. उनसे बात की. पता नहीं सीनियर बल्लेबाज ने अपने साथी से क्या कहा. लेकिन उसके बाद साहा ने अगली 18 गेंदों को डिफेंड किया. ये पुजारा का असर था. सिर्फ खुद के लिए नहीं, अपने पार्टनर को भी भरोसा दिलाना, फोकस कायम करवाना एक काम है, जो उन्हें पूरी तरह अलग नजरिए से देखने को मजबूर करता है.

पुजारा की पारी को हर तरफ से तारीफ मिली. कमेंटेटर, विश्लेषक, आंकड़ों के जानकार, प्रशंसकर.. हर तरफ से. लेकिन मेरे लिए जो सबसे बड़ा लम्हा रहा, वो उनके आउट होने का था. क्रीज पर 11वां घंटा चल रहा था. भारतीय ड्रेसिंग रूम से उनके लिए संदेश आ रहा था, जिसमें दोनों बल्लेबाजों से तेज खेलने के लिए कहा जा रहा था.

आउट होने वाले शॉट से बेहद नाराज दिखे पुजारा

पुजारा ने ऐसा शॉट खेला, जो उनके स्वभाव से बिल्कुल अलग था. उसमें बच गए. फिर उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर से ऑनसाइड चिप किया. ऐसा शॉट खेलने की वो सोच भी नहीं सकते थे. उन्होंने पिछली 524 गेंदों में ऐसा शॉट खेला भी नहीं था. लेकिन इस बार वो सीधे मिड विकेट के हाथों में खेल गए.

उन्होंने आसमान की तरफ देखा. खुद पर चिल्लाए. झल्लाहट दिखाई दी. अपने बल्ले को गुस्से में पैड पर मारा. ये काफी नहीं था कि उनमें इस तरह की मैराथन पारी खेलने का भरोसा था. वो और रन बनाना चाहते थे. एक और अच्छी तस्वीर थी. ग्लेन मैक्सवेल ने कैच लेने के बाद दौड़ लगाई. वो पुजारा से हाथ मिलाने गए. उसके बाद अपने साथियों के साथ विकेट की खुशियां मनाईं. ऑस्ट्रेलियन टीम ने तालियां बजाईं. एक पारी को वो सम्मान दिया, जिसकी वो हकदार थी.

साहा ने पुजारा का साथ देकर बहुत अच्छा काम किया. अपने स्ट्रोक्स को नियंत्रित रखा. स्पिनर को स्वीप करने में खुद को रोककर रखा. उमेश यादव-रवींद्र जडेजा की साझेदारी भी अच्छी थी. जडेजा ने बड़ी आजादी से बल्लेबाजी की.

ऑस्ट्रेलिया ने ऐसे दिन अपना धैर्य बनाए रखा, जो शायद लंबे समय से उनके लिए सबसे ज्यादा दिल तोड़ने वाला दिन था. इस वजह से और ज्यादा, क्योंकि पिछले दो टेस्ट में उन्होंने घरेलू टीम के मुकाबले ज्यादा सेशन में दबदबा जमाया था.

ऑस्ट्रेलिया के लिए हीरो रहे दो खिलाड़ी

ऑस्ट्रेलिया के लिए दो खिलाड़ियों का जिक्र करना जरूरी है. पहले पैट कमिंस, जो साढ़े पांच साल बाद चोट से वापसी कर रहे हैं. उन्होंने बेहतरीन ऐसी पिच पर, जहां उनके लिए ज्यादा कुछ नहीं था, गेंदबाजी में अपना दिल निकालकर रख दिया. दूसरी हीरो रहे स्पिनर ओ’कीफ. नैथन लायन अपनी उंगली के छाले का इलाज ही करा रहे थे. ऐसे में ओ’कीफ ने ऑस्ट्रेलिया के कुल 210 ओवर्स में 77 ओवर किए.

इसके बाद रवींद्र जडेजा ने दिन को भारत के लिए परफेक्ट बनाने में कसर नहीं छोड़ी. डेविड वॉर्नर के खिलाफ ओवर द विकेट रफ में गेंद की. जब वो बैटिंग कर रहे थे, तो ओकीफ ने उसी स्पॉट पर गेंदबाजी की थी. तब जडेजा सिर हिलाते दिखे. स्पॉट देखने आगे गए. उसे याद रखा. फिर वहीं गेंदबाजी की. वॉर्नर के डिफेंसिव पुश को भेदा. बल्ले और शरीर के बीच से गेंद सीधे स्टंप्स पर गई.

जब दाएं हाथ के नैथन लायन नाइट वॉचमैन के तौर पर आए, तो जडेजा ने ड्रिफ्ट के साथ गेंद को मिडिल स्टंप की लाइन में खेला. इस बार रफ नहीं था. गेंद ने बल्ले को छकाया और ऑफ स्टंप के टॉप पर लगी. ये ड्रीम बॉल थीं. ऐसी गेंद, जिसकी तलाश में ओकीफ ने 77 ओवर किए. उसने दो विकेट लिए. ऑस्ट्रेलिया 129 रन पीछे है. आठ विकेट उनके पास हैं. कुल मिलाकर इस टेस्ट में एक दिन ने सब कुछ बदल दिया.

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