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भारत ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट, पहला दिन: ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा दिन

'जैसा सोचा था, उससे बेहतर विकेट'

FP Staff Updated On: Mar 18, 2017 08:47 AM IST

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भारत ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट, पहला दिन: ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा दिन

सबसे आसान है ऐसे जाल में फंसना, जहां खुद को विक्टिम यानी पीड़ित मान लिया जाए. आमतौर पर भारत आने वाली टीमें इस बीमारी का शिकार होती हैं. इनमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को खासतौर पर ऐसा माना जा सकता है.

‘बकवास विकेट’... इस सीरीज की समीक्षा के लिए ये दो शब्द सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए हैं. ये एक तरह का फैसला था. टेस्ट शुरू होने से पहले ही इस तरह की आवाज सुनी जा सकती थी. मैच से पहले पिच की तस्वीरें ऑस्ट्रेलियन मीडिया को परेशान कर रही थीं. कई ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ मीडिया की बातों को और मुखर बना रहे थे. वे सिर और जुबान हिलाकर पिच के खराब होने पर मानो मुहर लगाने का काम कर रहे थे.

ऑस्ट्रेलिया को पिच के पहले इस्तेमाल का मौका मिला. पहले की जा रही सभी बातें किसी काम की साबित नहीं हुईं. कोई असमान या अलग किस्म का उछाल नहीं. टर्न नहीं... एक तरह से कुछ नहीं. ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने ब्लॉक से किसी रॉकेट की तरह निकली. लेकिन जैसे ही स्पिन आक्रमण आया, तब पिच का इस्तेमाल शुरू हुआ. पिच से न सही, लेकिन बल्लेबाज के दिमाग से स्पिनर्स खेल रहे थे.

शायद इसीलिए डेविड वॉर्नर ने समझने की कोशिश ही नहीं की कि रवींद्र जडेजा की गेंद पिच पर टप्पा खाने के बाद कैसा व्यवहार करने वाली है. वे इस बात पर अड़े थे कि बाएं हाथ के इस गेंदबाज को सेटल नहीं होने देना है. पहली गेंद उन्होंने खेली, तो अजीब तरीके से चौका लगाया. अगली गेंद पर जैसे थप्पड़ मारने की कोशिश की. ऐसे बल्लेबाज को फुलटॉस मिल जाए, इससे बेहतर क्या हो सकता है. लेकिन वॉर्नर इसे सीधे गेंदबाज के हाथों में खेल गए.

इसी तरह शॉन मार्श बाउंस और टर्न के लिए खेलने गए. अश्विन की गेंदों में दोनों नहीं था. वो लाइन के अंदर खेल गए. सख्त हाथों से पुश किया. अंदरूनी किनारा लेकर गेंद पैड पर लगी. इसके बाद वो कैच हो गए.

उमेश यादव ने की अच्छी गेंदबाजी

उमेश यादव ने जरूर विकेट कमाया. पहला विकेट था, जो मानसिक गेम के बाद आया. मैट रेनशॉ बहुत अच्छी तरह खेल रहे थे. उमेश क्रीज के कोने से गेंदबाजी करने आए. ऑफ स्टंप या उससे ठीक बाहर कोण बनाती गेंद आई. इस खतरे के साथ कि कोई गेंद रिवर्स स्विंग हो सकती है. बाहर निकल सकती है, जिससे बल्ले का किनारा लग सकता है.

उमेश के इस हमले ने रेनशॉ को हर गेंद को डिफेंसिव पुश के लिए मजबूर किया. वो कभी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि कौन सी गेंद छोड़नी है. उमेश ने इस बीच एक गेंद सीधी की, जो स्टंप से बाहर थी. बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गेंद स्लिप में कोहली के हाथों में आ गई. हैंड्सकॉम्ब के खिलाफ तेज लेट स्विंगिंग यॉर्कर ने बल्लेबाज को छकाया. मिडिल और ऑफ स्टंप के सामने गेंद बल्लेबाज के बूट पर लगी.

इस भारतीय टीम को लेकर एक रोचक बात है, जो उसे पिछली टीमों से अलग करती है. यह टीम कमान कसने की कोशिश करती है. लंबे वक्त तक धैर्य बनाए रखती है. आमतौर पर पार्टनरिशिप होने का मतलब गेंदबाजों का डिफेंसिव होना होता है. उस वक्त अलग-अलग लाइन और लेंथ पर गेंद करने की कोशिश होती है. इससे रन बनते हैं. लेकिन पूरे घरेलू सीजन में भारतीय गेंदबाज एक योजना के मुताबिक गेंदबाजी करते नजर आए हैं.

पहले घंटे का खेल खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 64 था. उसने वॉर्नर का विकेट खोया था. दूसरे घंटे में दो विकेट पर 45 रन बने. लंच के बाद पहले घंटे में 15 ओवर में एक विकेट पर 42 रन बने. इस दौरान भी भारतीय गेंदबाज योजना के साथ गेंदबाजी करते नजर आए. चौथे घंटे के खेल में 15 ओवर हुए और 43 रन बने. स्टीव स्मिथ और ग्लेन मैक्सवेल सतर्कता के साथ खेले. उनका फोकस था कि गेंदबाजों को विकेट से दूर रखें.

खेल के आखिरी घंटे में 57 रन बने. स्मिथ शतक तक पहुंचे, जो टेस्ट क्रिकेट में उनका 19वां शतक है. भारत के खिलाफ उन्होंने छठा शतक जमाया. ग्लेन मैक्सवेल अपने पिछले बेस्ट टेस्ट स्कोर से आगे निकले. फिर 50 रन पूरे किए और इसको भी बेहतर किया.

'जैसा सोचा था, उससे बेहतर विकेट'

मैच के बाद स्मिथ ने कहा कि जैसा सोचा था, विकेट उससे कहीं बेहतर है. पिच में समान उछाल है. उन्हें यह भी जोड़ना चाहिए था कि मैक्सवेल के साथ वो खेले, तो पिच के संभावित खौफ से निकल गए थे. तब बैटिंग बहुत आसान दिखाई दी. समझ आया कि अगर धैर्य है, तो रन आसानी से बनेंगे. यहां तक कि भारत ने कुछ ओवर्स के लिए मुरली विजय की पार्ट टाइम गेंदबाजी का भी इस्तेमाल किया.

स्मिथ उसी तरीके से खेले, जिसके लिए वो जाने जाते हैं. दृढ़ता उनके खेल की खासियत है. मैक्सवेल को टीम में लेना कमाल का फैसला रहा. उन्होंने स्टोइनिस से आगे रहकर खुद के लिए जगह बनाई. उन्होंने बड़ी खामोशी के साथ शुरुआत की और पहली 50 गेंदों में 19 रन बनाए. एक बार उनकी नजरें जमीं और समझ आया कि पिच कैसा व्यवहार कर रही है, तो उन्होंने गीयर बदला. विकेट के दोनों तरफ वो खेले. अगली 97 गेंदों पर उन्होंने 63 रन बनाए और कभी मुश्किल में नहीं दिखे.

भारतीय गेंदबाजों ने की अनुशासित गेंदबाजी

भारत ने अनुशासन के साथ गेंदबाजी की, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है. उन्होंने टी के बाद पहले घंटे में पाया कि अगर वो ओवर द विकेट गेंदबाजी करते हैं, तो गेंदबाज के फुटमार्क से उन्हें टर्न और बाउंस मिल सकता है. ऐसी एक गेंद ने मैक्सवेल को मुश्किलों में डाला भी. गेंद ग्लव्स पर हल्का सा लगकर पहली स्लिप में गई. अंपायर ने अपील ठुकरा दी. भारत ने रिव्यू न लेने का फैसला किया.

हैरत तब हुई, जब जडेजा दोनो बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे थे, तभी उन्हें हटाकर अश्विन को गेंद थमा दी गई. अश्विन ने भी उसी स्पॉट पर गेंद की कोशिश की. लेकिन एंगल उनके खिलाफ था. उनको बल्लेबाजों ने आसानी से खेला. यहां तक कि स्मिथ ने स्वीप करके एक चौका भी लगाया.

भारत ने वो सब किया, जो कर सकता था. ऐसी विकेट पर, जहां गेंदबाजों के लिए फिलहाल कुछ नहीं था. तेज गेंदबाज पूरी रफ्तार से गेंदबाजी करते रहे. अश्विन ने शिकंजा कसा हुआ था. जडेजा ने लगातार सवाल पूछे. लेकिन पांचवें विकेट की पार्टनरशिप भारत के आड़े आ गई. स्मिथ और मैक्सवेल ने 159 रन की साझेदारी के साथ ऑस्ट्रेलिया को मैच में आगे ला दिया है.

दूसरा दिन भी बल्लेबाजी के लिए अच्छा होगा. बल्कि पहले दिन से बेहतर हो सकता है, क्योंकि मैच से पहले पिच पर डाले गए पानी की वजह से आई नमी पूरी तरह खत्म हो गई होगी. रोलर भी अपना काम कर देगा. भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया को बड़े स्कोर से रोकना आसान नहीं होगा.

वैसे अब आप ‘बकवास’ पिच के बारे में कुछ और कहना चाहते हैं क्या?

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