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पुण्यतिथि विशेष: छक्के से शतक पूरा करने में सहवाग याद हैं, तो इन्हें भी याद रखिए

पॉली उमरीगर पहले भारतीय बल्लेबाज थे, जिन्होंने छक्का लगाकर शतक पूरा किया था

Updated On: Nov 07, 2017 01:26 PM IST

Sachin Shankar

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पुण्यतिथि विशेष: छक्के से शतक पूरा करने में सहवाग याद हैं, तो इन्हें भी याद रखिए

वीरेंद्र सहवाग ने जब पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में तिहरा शतक (309 रन) लगाने का कारनामा कर दिखाया था तब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई थी कि वह छक्के के साथ इस माइलस्टोन तक पहुंचे थे. निश्चित रूप से यह काम कोई कलेजे वाला बल्लेबाज ही कर सकता था. क्योंकि जब आप करियर में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब हों तो ऐसा करना दुस्साहस माना जाएगा. लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते होंगे कि सहवाग के यह करने से पांच दशक पहले पॉली उमरीगर यह करिश्मा कर चुके थे.

पारसी समुदाय से आने वाले पहलान रतनजी यानी पॉली उमरीगर ने 1952-53 के वेस्टइंडीज दौरे में पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में सोनी रामाधीन की गेंद पर छक्का लगाकर शतक पूरा किया था. वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय थे. उस टेस्ट में उन्होंने 130 रन की पारी खेली थी. हालांकि बाद में कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और राहुल द्रविड़ ने भी यह उपलब्धि हासिल की.

विविधतापूर्ण स्ट्रोक्स का भंडार

मशहूर क्रिकेट लेखक केएन प्रभु के अनुसार उमरीगर दो पीढ़ियों की बीच की कड़ी के समान थे. एक ओर तो वह विजय मर्चेंट और विजय हजारे की तरह ज्यादा जोखिम लिए बिना खेलने को तरजीह देते थे. वहीं उनके पास विविधतापूर्ण स्ट्रोक्स का भंडार था. उनके ड्राइव और कट उन्हें स्टाइलिश बल्लेबाज बनाते थे. साथ ही वह छक्के जड़ने में भी माहिर थे, जिसकी वजह से उनका खेल देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी.

टुअर मैच में शतक से खुला रास्ता

उनके करियर की शुरुआत भी धमाकेदार रही थी. उन्होंने अक्टूबर 1948 में भ्रमणकारी वेस्टइंडीज के खिलाफ कंबाइंड यूनिवर्सिटीज की ओर से नाबाद 115 रन बनाए थे. इस प्रदर्शन से उन्होंने सबका ध्यान आकर्षित किया था. उसके सात हफ्ते बाद ही उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ बॉम्बे में दूसरे टेस्ट में पदार्पण का मौका मिला.

 ... जब फ्रैंक वॉरेल पर लगाए लगातार दो छक्के

1949-50 और 1950-51 में कॉमनवेल्थ टीम ने भारत का दौरा किया था. उमरीगर तब तक भारतीय टेस्ट टीम के नियमित सदस्य बन गए थे. उन्होंने पहली टीम के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट में 276 रन की पारी खेली थी. दूसरी टीम के खिलाफ मद्रास में उन्होंने 562 रन बनाए थे. उस मैच के दौरान वह फ्रैंक वॉरेल पर लगातार दो छक्के लगाकर 90 से 102 तक के स्कोर तक पहुंचे थे.

गेंदबाजी में भी थे माहिर

मुख्य तौर पर वह मध्य क्रम के बल्लेबाज थे, लेकिन कभी कभार मीडियम पेस और ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते थे. 1955 से 1958 तक आठ टेस्ट में उमरीगर ने भारत की कप्तानी की.  1962 में रिटायर होने तक उन्होंने 59 टेस्ट खेले. इस दौरान उमरीगर ने 3631 रन बनाए और 12 शतक लगाए.  उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में दोहरा शतक जमाया था. वह दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज थे.

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