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महिला विश्व कप क्रिकेट : हार के सामने खड़े होने के जज्बे का जश्न मनाना चाहिए

उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया है भारतीय टीम ने

Snehal Pradhan Updated On: Jul 24, 2017 01:33 PM IST

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महिला विश्व कप क्रिकेट : हार के सामने खड़े होने के जज्बे का जश्न मनाना चाहिए

ये हार तो होनी ही थी. ‘वो लोग’ तो तबसे कह रहे थे, जब भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला वॉर्म-अप मैच हारा था. भारत ने टूर्नामेंट के पहले मैच में इंग्लैंड को हराया. उसके बाद भी हार तो होनी ही थी, ऐसा वो लोग कह रहे थे. उन्होंने फिर अपनी बात दोहराई, जब भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका से हार गई. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भटके, तब भी वे बोले. वे कहते हैं, जब दबाव आएगा, तो भारतीय टीम हार जाएगी.

वे भारत के कमजोर घरेलू सिस्टम की तरफ इशारा करते हैं. वे बताते हैं कि कैसे टूर्नामेंट से दो महीने पहले कामयाब कोच को हटा देना सही नहीं था. वे मिताली राज पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता की ओर इशारा करते हैं. ये वो लोग हैं, जो लगातार बताते रहे हैं कि भारत क्यों नहीं जीतेगा.

इस बीच भारत जीतता रहा. भारत ने नॉकआउट जैसे मैच में न्यूजीलैंड को हराया. पिछली चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल में स्तब्ध कर दिया. वे वर्ल्ड कप फाइनल भी लगभग जीत ही गए थे. उसके बाद हार और इंग्लैंड ने उन्हें जकड़ लिया.

इंग्लैंड नहीं खड़ा पाई बड़ा स्कोर

पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने दो बार स्कोरिंग बढ़ाने की कोशिश की. ये वो समय था, जब वे भारत को मैच से बाहर कर सकते थे. लेकिन एक बार वे स्पिन के सामने पकड़े गए, दूसरी बार पेस के सामने. दस ओवर में बगैर नुकसान के स्कोर 43 रन था, जब स्पिन के सामने 21 गेंदों के भीतर दोनों ओपनर आउट हो गए.

दूसरा मौका तब था, जब सारा टेलर और नताली शिवर बैटिंग कर रहे थे. दोनों के बीच 83 रन जुड़ चुके थे. इसी समय झूलन गोस्वामी आईं और दोनों का विकेट लिया. साथ में फ्रैन विल्सन का भी. झूलन का स्पैल पांच ओवर, एक मेडन, 14 रन और तीन विकेट का था. अपने आखिरी वर्ल्ड कप मैच में उन्होंने यादगार प्रदर्शन किया.

जब भारतीय टीम की बैटिंग आई, तो दो रन आउट ने सारा काम बिगाड़ दिया. पहले पूनम राउत ने मिताली को रन के लिए बुलाया. ऐसा लग रहा था कि मिताली मन में आउट होना तय कर चुकी हैं. 186 वनडे में सिर्फ 11वां मौका था, जब मिताली रन आउट हुईं.

दूसरा, जब शिखा पांडेय रन आउट हुईं. मिताली ने मैच के बाद कहा, ‘शिखा के आउट होने तक हम मैच में थे. वो आखिरी इंसान थीं, जिनसे मैंने मैच खत्म करने की उम्मीद की थी. जब वो आउट हुईं, तो 11 रन बनाने थे. इसके बाद मैंने सोचा कि काश हम दस रन बना लें और बराबरी पर आ जाएं.’

 एन्या श्रबसोल की गेंदबाजी दूसरा टर्निंग पॉइंट

एक और टर्निंग पॉइंट एन्या श्रबसोल की गेंदबाजी थी. पूनम राउत ने हरमनप्रीत कौर और वेदा कृष्णमूर्ति के साथ साझेदारी की थी. जब वह श्रबसोल की गेंद पर आउट हुईं, तो  भारत को जीत के लिए 42 गेंद में 39 रन बनाने हैं. श्रबसोल ने आउट करने से पहले राउत के हाथों दो चौके खाए थे. बाद में उन्होंने कहा, ‘हेदर (नाइट) मुझे बॉलिंग से हटाने वाली थीं. मुझे उसी वक्त विकेट मिल गया. फिर मैं उन्हें भरोसा दिलाने में कामयाब रही कि मुझे गेंदबाजी पर लगाए रखें.’

यही टर्निंग पॉइंट बन गया. श्रबसोल ने अगले ओवर में कृष्णमूर्ति को आउट किया. श्रबसोल ने इसके बाद यॉर्कर पर गोस्वामी को आउट किया. यानी आठ गेंदों में दो रन देकर तीन विकेट लिए. इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने जोखिम लिया. सुषमा वर्मा को दीप्ति शर्मा की जगह भेजा. सुषमा स्वीप करने की कोशिश में बोल्ड हो गईं. इससे वेदा पर दबाव और बढ़ गया. उन्होंने अपने स्वभाव से अलग शॉट खेला और आउट हो गईं.

शिखा पांडेय को टीम में ऑलराउंडर के तौर पर लिया गया था. लेकिन इस साल खेले 18 मैचों में उन्हें सिर्फ सात बार बल्लेबाजी का मौका मिला था. साल में उन्होंने कुल 100 गेंद भी नहीं खेली हैं. अनुभवहीनता ही दिखी, जब 16 गेंद में 11 रन की जरूरत थी और वो रन आउट हो गईं. इसी से मैच का नतीजा तय हो गया. आखिर में श्रबसोल आईं और आखिरी दो विकेट लिए. उन्होंने 46 रन देकर छह विकेट लिए.

हार के बावजूद यह भारतीय टीम की जीत है

अगर ये ओलिंपिक होता, तो हम खुशी मना रहे होते, जैसे पीवी सिंधु के सिल्वर मैडल के लिए मनाई थी. इसके बजाय मिताली असहाय अपनी टीम को एक और  फाइनल हारते देखती रहीं. लेकिन इस हार का जश्न मनाने की जरूरत है. ठीक वैसे ही, जैसे भारत को मिताली राज और गोस्वामी के करियर का जश्न मनाना चाहिए. ये दोनों करियर के बेहतरीन अंत से कुछ इंच पीछे रह गईं. भारत ने विश्व कप फाइनल में बाद में बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाए. ये उन्होंने मिताली के बगैर किया.

आखिरकार भारत को हार ने पकड़ ही लिया. अच्छे स्तर के घरेलू क्रिकेट में ना खेलना उन्हें भारी पड़ा. मैनेजमेंट में स्थायित्व और सोच की कमी होना बारी पड़ा. लेकिन उन्होंने हार को धोखा दिया. वो भी अंत तक. पहले क्वार्टर में... फिर सेमी में. जब हार आई भी, तो वे उसके सामने डटकर खड़े हुए. ... पूरे मुल्क ने उन्हें ऐसा करते देखा. ये कुछ ऐसा है, जिसका जश्न मनाना चाहिए.

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