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अंडर-19 वर्ल्ड कप: मिलिए भारत के उन चैंपियनों से जिन्होंने जीता है वर्ल्ड कप...

कोच राहुल द्रविड़ की सेना में शामिल इन क्रिकेटर्स ने भारत को चौथी बार दिलाया खिताब

FP Staff Updated On: Feb 03, 2018 06:28 PM IST

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अंडर-19 वर्ल्ड कप: मिलिए भारत के उन चैंपियनों से जिन्होंने जीता है वर्ल्ड कप...

पृथ्वी शॉ की अगुआई में भारतीय टीम ने चौथी बार अंडर 19 वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम कर लिया है. भारतीय टीम पिछली बार यानी 2016 में बांग्लादेश में हुई इस चैंपियनशिप के फाइनल में वेस्ट इंडीज से हारकर उप विजेता रही थी. इससे पहले 2014 में तो वह पांचवें स्थान पर खिसक गई थी. राहुल द्रविड़ द्वारा तैयार यह टीम 2012 के बाद पहली बार चैंपियन बनी है.

पृथ्वी शॉ (कप्तान)

prithvi shaw

महाराष्ट्र के थाणे में 9 नवंबर, 1999 को जन्मे पृथ्वी शॉ के सामने भारतीय टीम को चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी थी. जिसे उन्होंने पूरा भी किया। शॉ ने टूर्नामेंट में छह मैचों में कुल 261 रन बनाए, आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ शॉ ने 94 रन की पारी खेली थी। वहीें पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ नाबाद 57 रन, बांग्लादेश के खिलाफ 40 रन, पाकिस्तान के खिलाफ 41 रन और फाइनल में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ 29 रन बनाए । शॉ ने घरेलु टूर्नामेंट दलीप ट्रॉफी के पहले मैच में शतक लगाकर सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी. वह हैरिस शील्ड में 546 रन बनाने का रिकॉर्ड बना चुके हैं. पृथ्वी ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं. तमाम विशेषज्ञों को उनमें सचिन तेंदुलकर की छवि नजर आती है.

शुभमन गिल (उपकप्तान)

पंजाब के फजिल्का में 8 सितंबर, 1999 को जन्मे शुभमन इस वर्ल्ड कप में भारतीय अभियान की मुख्य कड़ी थे. वह तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आते है. टूर्नामेंट में गिल ने 372 रन बनाकर दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। फाइनल में गिल ने 31 रन बनाए, वहीं सेामीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 102 रन, बांग्लादेश के खिलाफ 86 रन, जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 90 रन और आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में 63 रन बनाए थे

हर्विक देसाई (विकेट कीपर)

गुजरात के भावनगर में 4 अक्टूबर 1999 को जन्मे हर्विक भारतीय टीम के नंबर एक विकेटकीपर हैं. वह सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी में खेल चुके हैं. टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 56 रन बनाए और 2 स्टंप किए। बांग्लोदश के खिलाफ 34 रन, पाकिस्तान के खिलाफ 20 रन और 1 स्टंप, और फाइनल में नाबाद 47 रन व 3 कैच लिए। भारतीय अंडर-19 टीम के साथ इंग्लैंड का दौरा कर चुके हैं. चेस्टरफील्ड में खेले गए मैच में हर्विक ने 89 रन की पारी खेली थी.

हिमांशु राणा (ओपनर)

हरियाणा के सोनीपत में एक अक्टूबर, 1998 को जन्मे हिमांशु राणा भारतीय टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं और वह कप्तान पृथ्वी शॉ के साथ पारी की शुरुआत करते हैं. हिमांशु इस साल एशिया कप में अपने शतकीय प्रहार से भारतीय जीत में अहम भूमिका निभा चुके थे. हिमांशु को टूर्नामेंट के पहले मैच में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ 14 रन बनाए थे

अभिषेक शर्मा (ऑलराउंडर)

पंजाब के अमृतसर में 4 सितंबर, 2000 को जन्मे अभिषेक शर्मा टीम के बहुत ही प्रतिभावान खिलाड़ी हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह युवराज की स्टाइल में खेलने वाले हैं और सही समय पर द्रविड़ की देखरेख मिल जाने से उनके खेल में और निखार आ गया है. टूर्नामेंट के पहले मैच में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ अभिषेक ने 23 रन बनाए थे साथ ही एक विकेट भी हासिल किया था। बांग्लादेश के खिलाफ 50 रन की पारी खेली थी साथ ही दो विकेट भी लिए थे। अभिषेक को पहले अंडर-16 टीम में चुना गया और उनके खेल को देखते हुए अंडर-19 में पदोन्नति दी गई. यही नहीं उन्हें एशिया कप में कप्तानी करने का मौका भी दिया गया. वह बल्लेबाजी करने के साथ लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं.

कमलेश नागरकोटी (तेज गेंदबाज) 

kamlesh nagarkoti

राजस्थान के बाड़मेर में 28 दिसंबर, 1999 को जन्मे कमलेश नागरकोटी ने 26 फरवरी 2017 को राजस्थान के लिए पहला विजय हजारे ट्रॉफी मैच खेला था. दो दिन बाद ही गुजरात के खिलाफ वह हैट्रिक लेकर सुर्खियों में आ गए थे. भारत के इस तेज गेंदबाज ने विरोधी बल्लेबाजों को बहुत परेशान किया . इनकी रफ्तार के सामने बल्लेबाजों का टिकना मुश्किल हुआ. 149 किमी तक की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले नागरकोटी भारतीय गेंदबाजी का अहम हिस्सा थे. 6 मैचों में नागरकोटी ने 9 विकेट लिए. उनकी ताकत सिर्फ रफ्तार नहीं थी. वह सही समय पर रनों की गति पर अंकुश लगा देते थे. पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भले ही उन्होंने कोई विकेट हासिल नहीं किया हो लेकिन उन्होंने पांच ओवर में सात ही रन दिए और एक मेडन ओवर भी डाला था.

इशान पोरेल (तेज गेंदबाज)

बंगाल के हुगली में 5 सितंबर,1998 को जन्मे इशान पोरेल का सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव इस टीम के बहुत काम आया. वह भी हर युवा क्रिकेटर की तरह सचिन और द्रविड़ बनना चाहते थे. पर कोच ने उनकी लंबाई को देखते हुए कहा कि वह तेज गेंदबाज भी बन सकते हैं और कोच की सलाह मानकर अब वह तेज गेंदबाज बन चुके थे। विश्व कप में इशान ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 17 रन पर 4 अहम विकेट लिए थे, वहीं फाइनल में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ दो विकेट लिए

पंकज यादव (स्पिन गेंदबाज)

पंकज यादव की क्रिकेटर बनने की कहानी बहुत ही प्रेरणा देने वाली है. पंकज का जन्म झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुआ. इनके पिता चंद्रदेव यादव ग्वाले हैं, इसलिए घर-घर जाकर दूध बेचना उनका काम है. 20 साल पहले उनके पिता कांके (रांची) में आकर बस गए. बेटे को पढ़ने के दिनों में क्रिकेट से लगाव हो गया था. शुरुआत में घर में खरी-खोटी भी सुनी पर लक्ष्य से हिले नहीं और आज विश्व विजेता टीम का हिस्सा बने

अर्शदीप सिंह (तेज गेंदबाज) 

छह फुट, दो इंच कद वाले अर्शदीप सिंह का जन्म 15 फरवरी, 1999 को हुआ है. वह पंजाब के लिए इस सीजन में वीनू मांकड ट्रॉफी में 13 विकेट ले चुके हैं. टूर्नामेंट में अर्शदीप ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 10 देकर दो विकेट और पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ एक विकेट लिया था

शिव सिंह (लेफ्ट आर्म स्पिनर) 

वह निचले क्रम में ठीक-ठाक बल्लेबाजी कर लेते हैं पर मुख्यत: लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं. उन्होंने टांटन में भारत को इंग्लैंड पर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. खिताबी मुकाबले में शिव ने 2 विकेट लिए। वहीं सेमीफाइनल में 20 रन पर दो विकेट लिए थे.

शिवम मावी ( मध्यम तेज गेंदबाज) 

यूपी के नोएडा में 26 नवंबर, 1998 को जन्मे शिवम प्रभावी मध्यम तेज गेंदबाज हैं और जरूरत के समय निचले क्रम पर ठीक-ठाक बल्लेबाजी कर लेते हैं. टूर्नामेंट में मावी की गेंदबाजी ने सभी को आकर्षित किया। आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में मावी ने तीन विकेट लिए। वहीं पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ दो विकेट, जिम्बाब्वे के खिलाफ 1 विकेट और फाइनल में एक विकेट हासिल किए

रियान पराग (मध्यक्रम के बल्लेबाज)

असम के गुवाहाटी में 10 नवंबर, 2001 को जन्मे रियान पराग मध्यक्रम के मजबूत बल्लेबाज हैं. साथ ही वह लेग ब्रेक गेंदबाजी भी करते हैं. टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में छह रन पर दो विकेट लिए थे, वहीं जिम्बाब्वे के खिलाफ एक विकेट हासिल किया था.

अनुकूल रॉॅय (ऑलराउंडर) 

anukul roy

झारखंड में 30 नवंबर, 1998 को जन्मे अनुकूल रॉॅय लेफ्ट आर्म स्पिन के साथ उपयोगी बल्लेबाजी भी कर लेते हैं. भारतीय टीम के इस खिलाड़ी ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. 14 विकेट लेकर अनुकूल टूर्नामेंट में संयुक्त रूप में शीर्ष प रहे. फाइनल में रॉय ने दो विकेट लिए पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ उन्होंने पांच विकेट लिए थे जिसकी बदौलत पूरी टीम 67 रनों पर ऑलआउट हो गई थी. इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ भी उन्होंने चार विकेट लिए थे. इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने सही समय पर 33 रनों की अहम पारी खेली थी.

मनजोत कालरा (बल्लेबाज)

मनजोत का दिल्ली में 15 जनवरी, 1999 को जन्म हुआ. टूर्नामेंट में खिताबी मुकाबले में नाबाद 101 रन की अहम पारी खेली, वहीं सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 47 रन बनाए थे. उन्होंने पांच लिस्ट ए और दो प्रथम श्रेणी मैच दिल्ली के लिए खेले हैं. पर कुछ समय पहले उन्हें मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. उनसे आयु को प्रमाणित करने को कहा गया. आखिर में बीसीसीआई ने उनके नाम को हरी झंडी दिखा दी.

आर्यन जुयाल (विकेटकीपर) 

आर्यन का दूसरे विकेट कीपर के तौर पर चयन किया गया था. उत्तराखंड के इस क्रिकेटर का कूच बिहार ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन की वजह से राष्ट्रीय अंडर-19 टीम में पहली बार चयन हुआ था. टूर्नामेंट में उन्होंने आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में दो कैच और पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ एक कैच लिया।

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