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भद्रजनों के खेल को मुंह चिढ़ा रही है ‘ईमानदार’ जालसाज क्रिकेटरों की अनदेखी

अलजज़ीरा चैनल की क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को लेकर बनी सनसनीखेज डॉक्यूमेंट्री के दावों पर आईसीसी को जल्द करना चाहिए काम

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: May 30, 2018 09:01 AM IST

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भद्रजनों के खेल को मुंह चिढ़ा रही है ‘ईमानदार’ जालसाज क्रिकेटरों की अनदेखी

अलजज़ीरा चैनल की क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को लेकर बनी सनसनीखेज डॉक्यूमेंट्री के दावों पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल या उसके सदस्य बोर्डों ने फिलहाल कई ठोस जांच के संकेत अभी नहीं दिए हैं. लेकिन इस पूरे स्टिंग ऑपरेशन से एक बात साफ हो जाती है कि जो क्रिकेट प्रशासक मान कर बैठे हैं कि भद्रजनों के इस खेल से भ्रष्टाचार खत्म हो गया है, वे पूरी तरह से गलत हैं

क्रिकेट में जालसाजी बिलकुल नया चोला पहन कर खड़ी है और इससे आंखें मूंदी गई तो जल्द ही सन 2000 से बड़ा फिक्सिंग स्कैंडल इस खेल पर कालिख लगाएगा. 2000 में क्रिकेटरों ने अपनी पूरी टीम को ही बेच दिया था और डॉलरों के बंडल उन्हें मैच हारने और हारने के हालात बनाने में राजी करने के लिए कामयाब हो गए थे. लेकिन अब खेल पूरी तरह बदल चुका है.

साल 2000 में फिक्सिंग के मामले में फंसे साउथ अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रॉन्जे

साल 2000 में फिक्सिंग के मामले में फंसे साउथ अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रॉन्जे

नए वक्त में  फिक्सिंग करने के नए तरीके

अब इस खेल को भ्रष्ट करने वाले लोगों ने अपने शिकार खिलाड़ियों को नए तर्क से साथ फांसना शुरू किया है. स्पॉट फिक्सिंग को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, क्योंकि इसमें किसी को फंसाना आसान है.

मसलन किसी क्रिकेटर को पैसे की कीमत पर ऐसा कुछ करने के लिए राजी कर लिया जाए, जिससे उसकी टीम की जीत या मैच के नतीजे पर कोई असर न पड़े. लगता नहीं कि मैच के उस एक क्षण के लिए मिलने वाले लाखों रुपये छोड़ना आसान होगा.

क्या कहती है आईसीसी की प्रचार सामग्री 

सन 2000 की मैच फिक्सिंग के बाद आईसीसी की एंटी क्रप्शन यूनिट ने खिलाड़ियों की शिक्षित करने के लिए प्रचार सामग्री तैयार की. उसे पढ़ने के बाद साफ हो जाता है कि आईसीसी को अंदाजा था कि भविष्य में जालसाज क्या-क्या हथकंडे अपना सकते हैं.

उस प्रचार सामग्री का एक पैरा कुछ यूं है, ‘पहले वे लोग आपको बतौर तोहफे खेल का सामान या कुछ और देंगे. आपका विश्वास हासिल करेंगे. फिर एक दिन आपको मुस्कुराते हुए कहेंगे कि क्या तुम फलां ओवर में एक नो या वाइड बॉल फेंक सकते हो या किसी एक ओवर में खुद को रन बनाने से रोक सकते हो!’

आईसीसी एक जगह लिखती है, ‘फिक्सिंग किसी भी तरह से हो सकती है. मसलन मैच में कितने खिलाड़ी मैदान पर सन ग्लास पहन कर आएंगे या अंपायर कौन से एंड से मैच शुरू करेगा.’

इस दस्तावेज को लिखे 18 साल हो गए हैं, लेकिन लगता नहीं कि आईसीसी अपनी भविष्यवाणी को वास्तविकता में बदलने से रोक पाई है. ऊपर से पिच फिक्सिंग भी सामने आ रही है.

जांच ना करने के बहाने दे रही है आईसीसी

सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि अलजज़ीरा के स्टिंग ऑपरेशन में 2016 के जिस श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के मैच के बारे में जिक्र किया गया है, उसे लेकर अखबार द ऑस्ट्रेलियन ने अपनी न्यूज रिपोर्ट में लिखा था कि संभव है कि क्यूरेटर ने पिच से साथ गड़बड़ की है. लेकिन आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट ने उस समय इन आरोपों की जांच करना जरूरी नहीं समझा.

यह भी रोचक तथ्य है कि उस समय आईसीसी ने 2015 में श्रीलंका और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट मैच में पैसे लेकर पिच बुकियों के हिसाब से बनाने के लिए गॉल के क्यूरेटर जयनंदा वरनवीरा के खिलाफ जांच कर रही थी.

ढाई दिन चले इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी दोनों पारियों में महज 501 गेंदों में सिमटी थी. टीम अपने 20 विकेट गंवा कर 229 रन से हारी थी.

शर्मनाक यह भी है कि वह अलजज़ीरा से वीडियो टेप न मिलने का रोना रो रही है. स्टिंग में आरोप लगे हैं और उनका कुछ आधार है. उस पर जांच करने के लिए आईसीसी को किसी टेप की जरूरत नहीं होनी चाहिए.

यकीनन अगर अलजजीरा अनएडिट फुटेज दे तो काफी मदद होगी लेकिन इसके बिना भी जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है. स्पॉट फिक्सिंग ऐसी है कि कोई देश यह दावा नहीं कर सकता है उसके खिलाड़ी उसमें शामिल नहीं हो सकते.

पूरा खेल किसी एक  मैच में एक ओवर में एक नो या वाइड बॉल डालने या फिर किसी दस ओवर के एक ब्लॉक में थोड़ा रुक कर खेलने का है. यह कुछ ऐसा है जिसका मैच के नतीजे पर और ऐसी कलाकारी करने वाले खिलाड़ी की टीम की जीत की संभावना पर कोई असर नहीं पड़ता. यही कारण है कि खिलाड़ी को इसमें असानी से फंसाया जा सकता है.

2013 में फिक्सिंग में फंस पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद आसिफ, सलमान बट् और मोहम्मद आमिर

2013 में फिक्सिंग में फंसे पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद आसिफ, सलमान बट् और मोहम्मद आमिर

पाकिस्तान के मोहम्मद आसिफ, सलमान बट् और मोहम्मद आमिर की धांधली और 2013 की आईपीएल का फिक्सिंग स्कैंडल केस स्टडी के तौर पर लिए जाने चाहिए और आईसीसी और सभी संबंधित बोर्डों को एहतियातन जांच शुरू करनी चाहिए. नहीं तो वह समय दूर नहीं है जब आईसीसी को फिर किसी बड़ी मैच फिक्सिंग की खबर कहीं बाहर से मिलेगी. क्योंकि स्पॉट फिक्सिंग में फंसे किसी खिलाड़ी को ब्लैकमेल करके मैच फिक्सिंग के लिए तैयार करना भ्रष्टाचारियों के लिए कोई मुश्किल खेल नहीं है.

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